ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे. इनमें विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का नाम शामिल है. अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी. 9 जुलाई को उत्तर-पूर्वी ईरान के पवित्र शहर मशहद में उनके दफन के साथ खत्म होंगी.
सूत्रों ने सोमवार को इंडिया टुडे टीवी को बताया कि भारत सरकार ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को भेजेगी. पिछले हफ्ते ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया था.
इसके बाद भारत की तरफ से प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया गया. अयातुल्ला अली खामेनेई 36 साल तक इस्लामिक रिपब्लिक के सुप्रीम लीडर रहे. 86 साल के खामेनेई की 28 फरवरी को हत्या कर दी गई थी. यह घटना तेहरान पर इजरायली और US के हवाई हमलों के पहले दिन हुई थी. खामेनेई ने लंबे समय तक ईरान की राजनीति और शासन व्यवस्था को दिशा दी.
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अंतिम संस्कार की तैयारियों में कई बड़े धार्मिक आयोजन शामिल हैं. 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर कोम में भी समारोह आयोजित किया जाएगा. इसके बाद 9 जुलाई को मशहद में उन्हें दफन किया जाएगा. मशहद वही जगह है जहां खामेनेई का जन्म हुआ था. खामेनेई के निधन के बाद से अंतिम संस्कार की अटकलें थी.
इस्लामिक कानून के तहत मृत व्यक्ति को जल्द से जल्द दफनाने की परंपरा है. आमतौर पर मौत के एक दिन के अंदर दफन किया जाता है. हालांकि युद्ध जैसे हालात में कुछ छूट दी जाती है. शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया था कि खामेनेई को जून के आखिर में दफन किया जा सकता है. लेकिन बाद में सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि अंतिम संस्कार की रस्में जुलाई में होंगी.
इस बड़े आयोजन में भारी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. तेहरान, मशहद और क़ोम में करीब 20 मिलियन लोग शोक मनाने के लिए पहुंच सकते हैं. यदि यह आंकड़ा सही साबित होता है तो यह 1989 में इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए करीब 10 मिलियन लोगों के रिकॉर्ड तोड़ सकता है.
इस बीच पूरी दुनिया की नजरें ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पर भी होंगी. 56 साल के मोजतबा खामेनेई अपने पिता की मौत के बाद से सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं. 28 फरवरी के एयरस्ट्राइक के बाद उन्हें न तो किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में देखा गया और न ही वीडियो संदेश जारी हुआ. उनकी सेहत को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कई वरिष्ठ US अधिकारियों ने दावा किया है कि वो कोमा में हैं. हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया है कि उन्हें चेहरे और पैर में गंभीर चोट लगी है, लेकिन उनकी मौजूदा हालत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. खामेनेई का अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है, शांति समझौते की कोशिशें जारी हैं.
इस टकराव ने पश्चिम एशिया में बड़ा संकट पैदा कर दिया था. इसके असर से दुनिया भर में ईंधन और ऊर्जा की कमी की चिंता भी बढ़ी थी. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग डिजिटल MoU पर साइन किए हैं. वहीं स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच लंबे समय से शांति वार्ता भी चल रही है.