अयातुल्ला अली खामेनेई (सैय्यद अली होसैनी खामेनेई) ईरानी के सुप्रीम लीडर थे. वह ईरान के तीसरे राष्ट्रपति थे. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया, जिसमें खामेनेई की मृत्यु हो गई. खामेनेई सबसे लंबे समय तक के राष्ट्राध्यक्ष थे, साथ ही शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बाद पिछली सदी के दूसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले ईरानी नेता थे (Ayatollah Ali Khamenei).
खामेनेई बारहवें शिया मरजा भी थे. बता दें कि मरजा बारहवीं शिया धार्मिक मौलवी के सबसे बड़ी दी जाने वाली एक उपाधि थे, जिसमें मदरसा द्वारा अनुयायियों और मौलवियों के लिए इस्लामी कानून के दायरे में 'कानूनी निर्णय' लेने का अधिकार दिया जाता थे.
एक सर्वोच्च नेता के रूप में, खामेनेई इस्लामी गणराज्य में सबसे शक्तिशाली राजनेता थे. वह ईरान के राष्ट्राध्यक्ष हैं. सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ भी थे. वह ईरान में अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विदेश नीति और राष्ट्रीय नियोजन जैसे कई क्षेत्रों में सरकार की मुख्य नीतियों पर अंतिम निर्णय ले सकते थे. सर्वोच्च नेता के रूप में, खामेनेई का सरकार की कार्यकारी, विधायी और न्यायिक शाखाओं के साथ-साथ सैन्य और मीडिया पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण थे.
अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल के दौरान खामेनेई को छह बार गिरफ्तार किया गया था. ईरानी क्रांति द्वारा शाह को उखाड़ फेंकने के बाद, जून 1981 में उनकी हत्या की कोशिश की गई थी. इस घटना में उनका दाहिना हाथ लकवाग्रस्त हो गया था.
इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने युद्ध से पहले ट्रंप को खुफिया जानकारी दी थी कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई पर हमले का ये बेहतरीन मौका है. हालांकि, नेतन्याहू अमेरिका पर युद्ध के लिए दबाव डालने से इनकार करते आ रहे हैं.
ईरान पर हमले से पहले ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई फोन बातचीत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई को निशाना बनाने का सुझाव दिया गया था. हालांकि, दोनों नेताओं ने युद्ध के फैसले को स्वतंत्र बताया और दबाव की बात से इनकार किया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के पीछे की असली वजह का खुलासा किया है. ट्रंप ने अपने मंत्रियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की और कहा कि अमेरिका को इस समस्या को खत्म करना होगा. उन्होंने बताया कि अमेरिकी वॉर सेक्रेटरी ने उन्हें युद्ध शुरू करने की सलाह दी थी.
ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर ने शिया उलेमा से कहा – ईरान से इतना प्यार है तो वहां चले जाओ. पाकिस्तान में 90% सुन्नी और 10% शिया हैं. शिया प्रदर्शनों के बाद यह बयान आया जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है. ईरान फिलहाल पाकिस्तान पर हमला नहीं करेगा, लेकिन पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ दे सकता है.
ईरान-इजरायल जंग के 24वें दिन तक 2500 के करीब मौतें हो चुकी हैं, लेबनान में जमीनी लड़ाई और होर्मुज बंद होने से वैश्विक संकट गहराया है. ट्रंप की ओर से लगातार ईरान को होर्मुज का रास्ता खोलने की धमकी मिल रही है. वहीं, ईरान की ओर से इज़रायल पर हमले जारी हैं.
ईरान-इजरायल युद्ध का आज 23वा दिन है. और तीन हफ्ते बाद ईरान ने अपनी पूरी रणनीति बदल दी है. अब वो सिर्फ सैन्य ठिकानों को तबाह नहीं कर रहा बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल रहा है. ताकि सभी पर दबाव बनाया जा सके. इजरायल ईरान के तेल ठिकानों पर हमले कर रहा है तो ईरान सऊदी अरब, कतर और कुवैत में तेल-गैस के ठिकानों को निशाना बना रहा है.
ईरान ने सोचा था कि वो सिर्फ अपने जज्बे और कुछ मिसाइलों और ड्रोन के भरोसे जंग जीत लेगा. इसी ओवर-कॉन्फिडेंस वो मात खाता जा रहा है, जब उसके एक के बाद एक बड़े नेता ताबूत में बंद होते दिखाई दे रहे हैं. ईरानी जज्बे का मुकाबला इजरायली इंटेलिजेंस यानी दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क से है. वो नेटवर्क जो ईरानी नेताओं के बेडरूम तक घुसा हुआ है.
इजरायल के द्वारा टार्गेटेड हत्याओं से ईरानी नेतृत्व कमजोर हुआ है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह रणनीति स्थायी समाधान नहीं, इससे संघर्ष खत्म नहीं होता है.
इजरायल के साथ मिलकर भी जब अमेरिका ईरान को झुका नहीं पाया तो उसने अब उसने ईरान के यूरेनियम को ही चुराने का फैसला किया है. ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने में मौजूद यूरेनियम पर कब्जा करने के लिए ट्रंप अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाने की सोच रहे हैं.
दस्तक की शुरूआत एक सवाल से, क्या खामेनेई औ लारीजानी के बाद इजरायल और अमेरिका की हिट लिस्ट पर ईरान के नए सुप्रीम कमांडर मोजतबा हैं. क्या इजरायल और अमेरिका का ऑपरेशन मोजतबा शुरू हो चुका है. क्या अमेरिका और इजरायल के हमले के डर से सुप्रीम लीडर बनने के बाद भी मोजतबा सामने नहीं आए हैं. ईरान में इस वक्त क्या चल रहा हैं, लारीजानी के मारे जाने के बाद अमेरिकी और इजरायल के वॉररूम में क्या प्लान बनाया गया है.
आज अली लारीजानी, उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी और बासिज फोर्स के कमांडर जनरल गुलामरेज़ा सुलेमानी का जनाज़ा निकाला गया. दावा है कि उनकी अंतिम विदाई देने के लिए तेहरान में 10 लाख से भी ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे और इस दौरान तेहरान के इंकलाब Square पर इस युद्ध में अब तक की सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई. इजरायल और अमेरिका यही उम्मीद कर रहे थे कि अली लारीजानी की मौत के बाद ईरान में सरकार विरोधी गुट सड़कों पर आएंगे और रिजीम चेंज के लिए नई कोशिशें शुरू होंगी. लेकिन अली लारीजानी के जनाज़े में इकट्ठा हुई इस विशाल भीड़ ने ये बता दिया कि ईरान में रिजीम चेंज करना बहुत मुश्किल काम है.
इजरायल के हमले में अली लारिजानी की मौत ने ईरान की राजनीति में बड़ा संकट पैदा कर दिया है. वह सत्ता, सेना और कूटनीति के बीच संतुलन बनाने वाले अहम चेहरा थे. माना जाता है कि वह मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने के भी खिलाफ थे और सुप्रीम लीडर के चुनाव को टालने की कोशिश भी की थी. इस्लामी शासन में उन्हें एक सेक्युलर नेता के तौर पर देखा जाता था.
अली लारिजानी की मौत ने ईरान की राजनीति में बड़ा खालीपन छोड़ दिया है. वे सत्ता, IRGC और कूटनीति के बीच संतुलन बनाने वाले अहम नेता थे. मोजतबा खामेनेई के विरोध और मध्यमार्गी सोच के चलते उन्हें सत्ता संतुलन का प्रमुख खिलाड़ी माना जाता था.
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी कूटनीति, खुफिया और सैन्य शक्ति को जोड़ने वाले शीर्ष नेताओं में थे. उनकी कमी से ईरान की जोखिम आंकने की क्षमता कमजोर होगी और सुरक्षा नेटवर्क में तालमेल की समस्या बढ़ सकती है.
मोजतबा खामेनेई मौत से बाल-बाल बचे हैं. इजरायली मिसाइलें जब उनके कंपाउंड पर गिरी तो उसके कुछ ही सेकेंड पहले वे बगीचे में निकल गए थे. हमले में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी और रिश्तेदार मारे गए. लीक ऑडियो में ईरानी अधिकारी ने बताया कि मोजतबा को सिर्फ पैर में हल्की चोट आई. तब से वे सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे.
अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान की missile और drone attack capacity में बड़ी कमी देखने को मिली है. शुरुआती दिनों के मुकाबले अब हमलों की संख्या काफी घट गई है, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अब भी सीमित स्तर पर हमला करने में सक्षम है. जानिए जंग के पहले दिन और अब के आंकड़ों में कितना अंतर आया है.
इजरायली डिेफेंस फोर्सेज ने दावा किया है कि उसने अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिशियल प्लेन को निशाना बनाया है. ईरान के सुप्रीम लीडर जिस हवाई जहाज का इस्तेमाल करते हैं, उसको मारने का दावा इजरायल कर रहा है. मेहराबाद एयरपोर्ट पर विमान खड़ा था, जहां पर आईडीएफ ने बम बरससाए और विमान नष्ट कर दिया. देखें वीडियो.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट फिर से दुनिया की चर्चा में आ गया है. क्या ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगें यानी समुद्री खदानें बिछा दी हैं? क्या ईरान के कब्जे में हैं समुद्र के रास्ते? आखिर किन तरीकों से जहाजों को रोक रहा है ईरान?जानिए आखिर कैसे काम करते हैं नेवल माइंस? सबसे ताकतवर समुद्री सेना होने के बावजूद अमेरिका क्यों हुआ बेबस? ईरान के सामने 'समुद का बादशाह' अमेरिका क्यों बेबस?
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि अयातुल्ला अली खामेनेई ने बढ़ते तनाव के बावजूद तेहरान में अपना घर छोड़ने या बंकर में जाने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि जब तक तेहरान के 9 करोड़ लोगों के लिए सुरक्षित शेल्टर नहीं होंगे, तब तक वह खुद के लिए सुरक्षा नहीं लेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि एक नेता को आम लोगों की तरह ही जीवन जीना चाहिए और इस्लाम में शहादत को सर्वोच्च सम्मान माना जाता है.
मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
ईरान के नए Supreme Leader Mojtaba Khamenei की सेहत को लेकर वेस्टर्न मीडिया में सनसनीखेज दावे सामने आए हैं. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे गंभीर रूप से घायल हैं और कथित तौर पर कोमा में हैं. हालांकि ईरान की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.