अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस में एक ऐसा वाकया सामने आया है जिस पर दुनियाभर में चर्चा शुरू हो गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में हुई एक प्रार्थना सभा के दौरान खुले तौर पर कहा कि ईश्वर उनके "प्रभु और उद्धारकर्ता" हैं. इस दौरान कई ईसाई पादरी उनके आसपास खड़े होकर अमेरिका और राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे थे.
यह प्रार्थना सभा व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित की गई थी. वहां मौजूद लोगों के मुताबिक जैसे ही प्रार्थना शुरू हुई, ट्रंप ने सिर झुका लिया और आंखें बंद कर लीं. इसके बाद पादरियों ने उनके कंधों पर हाथ रखकर अमेरिका के लिए "दिव्य मार्गदर्शन, ताकत और सुरक्षा" की प्रार्थना की. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
पादरियों का कहना था कि देश इस समय एक "निर्णायक दौर" से गुजर रहा है और ऐसे समय में ईश्वर का आशीर्वाद बहुत जरूरी है. पादरियों ने कहा, "हम प्रार्थना करते हैं कि स्वर्ग से ज्ञान उनके दिल और दिमाग में भर जाए, और हे प्रभु, आप आज हम जिस मुश्किल समय का सामना कर रहे हैं, उसमें उनका मार्गदर्शन करें."
प्रार्थना के बाद क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप?
प्रार्थना खत्म होने के बाद ट्रंप ने भी संक्षेप में बात की. उन्होंने कहा, "कठिन समय में अमेरिका को विश्वास और ताकत की जरूरत है." ट्रंप ने आगे कहा, "अमेरिका को इस चुनौती भरे समय में फिर से ईश्वर की ओर लौटना होगा." उनके समर्थकों का कहना है कि यह एक प्रतीकात्मक संदेश है कि देश का नेतृत्व आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित होना चाहिए.
यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. वॉशिंगटन का आरोप है कि ईरान मध्य-पूर्व में आक्रामक गतिविधियां बढ़ा रहा है. वहीं तेहरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है.
ईरान की जंग को धार्मिक रंग देने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे संघर्ष में धार्मिक भाषा और विचारधारा का इस्तेमाल भी देखने को मिल रहा है. कई पश्चिमी विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की राजनीति में धार्मिक नेतृत्व की बड़ी भूमिका है. अब अमेरिका में भी कुछ राजनीतिक बयान धार्मिक संदर्भों के साथ दिए जा रहे हैं.
इस प्रार्थना सभा के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई. ट्रंप के समर्थकों ने उनकी सार्वजनिक आस्था की तारीफ की. उनका कहना है कि जब दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हो, तब आध्यात्मिक मार्गदर्शन जरूरी हो जाता है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम अमेरिका के ईवेंजेलिकल मतदाताओं के लिए भी एक मजबूत संदेश माना जा रहा है. यह समुदाय लंबे समय से ट्रंप का मजबूत समर्थक रहा है. हालांकि आलोचकों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकार और धर्म को इस तरह जोड़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है.
US सैनिकों से कहा गया, "ईरान जंग ईश्वर की योजना"
इसी बीच एक और विवाद भी सामने आया है. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना के कुछ अधिकारियों ने सैनिकों से कहा कि ईरान के साथ युद्ध “ईश्वर की योजना” का हिस्सा है. धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले संगठन मिलिट्री रिलीजियस फाउंडेशन का कहना है कि उन्हें इस मामले में सैकड़ों शिकायतें मिली हैं.
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत में यह भी कहा गया कि कमांडर ने सैनिकों से कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यीशु ने चुना है. रिपोर्ट के मुताबिक, MRFF के अध्यक्ष और एयर फोर्स के पूर्व सैनिक माइकी वेनस्टीन ने सैनिकों की शिकायत पर कहा, "जब भी इजरायल या US मिडिल ईस्ट में शामिल होता है, तो हमें ईसाई राष्ट्रवादियों के बारे में ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं.