अमेरिका में मिडटर्म चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है. चुनाव से करीब दो महीने पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग ऑल टाइम लो पर पहुंच गई है. ऐसे में रिपब्लिकन पार्टी के लिए संसद में अपनी मौजूदा बढ़त बचाना मुश्किल होता दिख रहा है. सर्वे में डेमोक्रेट्स को वोटरों की पसंद में बढ़त मिली है, जबकि हाउस में उनकी वापसी के संकेत नजर आ रहे हैं.
रॉयटर्स और इप्सॉस के ताजा सर्वे के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग सबसे निचले स्तर पर है. बड़ी संख्या में अमेरिकी लोग ईरान युद्ध और देश की अर्थव्यवस्था से खुश नहीं हैं. ट्रंप की लोकप्रियता में यह गिरावट रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए भी परेशानी बन सकती है. सर्वे में रजिस्टर्ड वोटरों से पूछा गया कि अगर अभी कांग्रेस के चुनाव हों तो वे किस पार्टी को वोट देंगे. इसमें डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन से 5 प्रतिशत अंक की बढ़त मिली. डेमोक्रेट्स के समर्थक चुनाव को लेकर ज्यादा उत्साहित भी दिखे.
मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर सबकी नजर है. अभी रिपब्लिकन के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214. बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को सिर्फ तीन सीटें और जीतनी होंगी. करीब 50 सीटों पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है. अगर डेमोक्रेट्स हाउस में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कई जांचें शुरू हो सकती हैं. इससे सरकार को कई अहम कानूनों पर डेमोक्रेट्स के साथ समझौता करना पड़ सकता है.
सीनेट की तस्वीर फिलहाल साफ नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई सीटों पर मुकाबला कड़ा है. डेमोक्रेट्स को बहुमत के लिए रिपब्लिकन की चार सीटें जीतनी होंगी. अगर ऐसा हुआ तो ट्रंप के कई नामित उम्मीदवारों की नियुक्ति रोकने की उनकी ताकत बढ़ जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में कोई सीट खाली होने पर इसका असर और बड़ा हो सकता है.
ट्रंप की लोकप्रियता क्यों अहम?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव अक्सर मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय से जुड़े होते हैं. इस बार ट्रंप की कम लोकप्रियता रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन रही है.
इतिहास भी डेमोक्रेट्स के पक्ष में जाता दिख रहा है. 1938 के बाद से सिर्फ दो मिडटर्म चुनाव ऐसे रहे हैं, जब राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस में अपनी सीटें बढ़ाई थीं. ऐसे में नवंबर का चुनाव ट्रंप के साथ-साथ पूरी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.