चीन ने नेपाल सीमा पर हुए भूस्खलन हादसे को लेकर पहली बार मौत के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं. चीनी अधिकारियों के मुताबिक गिरोंग इलाके में इमिग्रेशन और कस्टम भवन से अब तक 31 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 531 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. यह जानकारी शुक्रवार शाम 6 बजे तक की स्थिति के आधार पर दी गई है. यह हादसा 26 अगस्त को हुए भूस्खलन के बाद नदी में आई भीषण बाढ़ की वजह से हुआ था.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार यह पूरा मामला नेपाल चीन सीमा पर स्थित गिरोंग क्षेत्र का है. यहां भूस्खलन के बाद नदी उफान पर आ गई और इसका पानी सीमा पर बने इमिग्रेशन व कस्टम भवन में घुस गया. इसी भवन में मौजूद रहे 531 लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है.
बचाव दल लगातार मलबे और आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं. अब तक बचावकर्मियों को घटनास्थल से 987 व्यक्तिगत सामान भी मिले हैं, जिनकी मदद से लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.
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हादसे के बाद बचाव कार्य में सबसे बड़ी अड़चन जी-216 राजमार्ग को लेकर आई है. यह हाईवे गिरोंग बंदरगाह तक जाता है और बाढ़ में इसका एक हिस्सा टूट गया है, जिससे बचाव दलों को मौके तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है. चीनी अधिकारियों ने बुधवार तक इस रास्ते का निरीक्षण किया, जिसमें 58 ऐसी जगहें मिलीं जहां आगे भी भूस्खलन जैसा खतरा हो सकता है. इसके अलावा बाढ़ ने कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया है और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे बचाव कार्य और मुश्किल हो गया है.
चीनी प्रशासन का कहना है कि उन्होंने सीमा क्षेत्र के सभी जोखिम वाले इलाकों की जांच पूरी कर ली है और खतरे का आकलन भी कर लिया गया है. साथ ही प्रभावित लोगों को अस्थायी रूप से ठहराने के लिए दो जगहों को आपातकालीन आश्रयस्थल के तौर पर चुना गया है, ताकि बेघर हुए लोगों को तुरंत सहारा मिल सके.