चीन की राजधानी बीजिंग तेजी से बूढ़ी होती आबादी की चुनौती का सामना कर रही है. अनुमान है कि 2035 तक शहर में रहने वाला हर तीसरा व्यक्ति 60 साल या उससे ज्यादा उम्र का होगा. चीन में आबादी का तेजी से बूढ़ा होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, घरेलू खपत और पेंशन व्यवस्था पर पड़ सकता है.
बीजिंग डेली के मुताबिक, पिछले साल के अंत तक राजधानी में 60 साल या उससे अधिक उम्र के 52.9 लाख स्थायी निवासी थे. यह शहर की कुल आबादी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी और 2035 तक बीजिंग की आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा बुजुर्गों का हो जाएगा.
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इस चुनौती से निपटने के लिए बीजिंग की सरकार बुजुर्गों को दी जाने वाली सुविधाओं और आर्थिक मदद को बढ़ा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें बुनियादी पेंशन बढ़ाना भी शामिल है. आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने के साथ पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है.
घटती जन्मदर से चीन की चिंता बढ़ी
चीन की आबादी 2022 से लगातार घट रही है और देश तेजी से उम्रदराज हो रहा है. इससे सरकार की घरेलू खपत बढ़ाने और कर्ज पर नियंत्रण पाने की कोशिशों को मुश्किल हो सकती है. आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों के कामकाजी उम्र से बाहर होने की आशंका है. ऐसे समय में पेंशन बजट पर पहले से दबाव बना हुआ है.
कम जन्मदर का असर सिर्फ आबादी की संख्या तक सीमित नहीं है. जनसांख्यिकी विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आज कम बच्चे पैदा होने का मतलब भविष्य में कम परिवार और खपत की धीमी बढ़ोतरी भी हो सकता है. इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा है.
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जन्म बढ़ाने के लिए बड़ा खर्च
चीन की सरकार आबादी बढ़ाने की योजना को आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है. रॉयटर्स के अनुमानों के मुताबिक, इस साल जन्मदर बढ़ाने के उपायों पर संभावित खर्च करीब 180 अरब युआन यानी लगभग 26.92 अरब डॉलर हो सकता है. सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह जन्मदर में गिरावट को कैसे रोके और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को कैसे पूरा करे.