उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी पर मंदिरों और धार्मिक आस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आक्रांता मंदिर तोड़ सकते हैं, लेकिन लोगों की आस्था को खत्म नहीं कर सकते. मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन उनसे जुड़े विश्वास और मूल्यों को मिटाया नहीं जा सकता.
सीएम योगी ने कहा कि भारत की संस्कृति और आस्था को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद इतिहास के पन्नों में मिट गए, लेकिन भारत आज भी जीवित और जागृत है.
'मंदिर टूटे, लेकिन आस्था कायम रही'
सीएम योगी ने कहा कि मंदिरों के ऊपर दूसरी इमारतें खड़ी की जा सकती हैं. लेकिन लोगों के मन में बसे श्रीराम और श्रीकृष्ण को कोई नहीं छू सकता. उन्होंने सोमनाथ मंदिर का उदाहरण दिया. CM ने कहा कि यह मंदिर कई बार तोड़ा गया. इसके बावजूद भारत ने इसे बार-बार बनाया.
उन्होंने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भी जिक्र किया. CM योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को भी कई बार नुकसान पहुंचाया गया. लेकिन आज यह मंदिर अपनी अजेय पताका के साथ खड़ा है.
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि इस मंदिर को भी कई बार नुकसान पहुंचाया गया. इसके बाद अहिल्याबाई होल्कर ने इसका पुनर्निर्माण कराया. योगी ने कहा कि आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम को भव्य और दिव्य स्वरूप दिया.
योगी ने कहा कि भारत की संस्कृति और आस्था को खत्म करने की कोशिश करने वाले लोग इतिहास में खुद खत्म हो गए. इसके उलट भारत आज भी अपनी परंपरा और संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है.
जन्माष्टमी के मौके पर सीएम योगी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश को भी याद किया. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म अंधकार के बीच जेल में हुआ था. इसके बावजूद उन्होंने समाज को प्रकाश का रास्ता दिखाया.
CM ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए हुआ. उनके जीवन में अन्याय के खिलाफ संघर्ष की सीख मिलती है. कंस के खिलाफ उनका संघर्ष और महाभारत का प्रसंग इसका उदाहरण है.
'भ्रम में रास्ता दिखाता है श्रीकृष्ण का संदेश'
सीएम योगी ने कहा कि जब जीवन में भ्रम और संशय की स्थिति आती है, तब श्रीकृष्ण का संदेश प्रेरणा देता है. श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी लोगों के लिए अहम हैं. भारतवासी श्रद्धा के साथ उनके संदेश का अनुसरण करते हैं.
योगी ने कहा कि भारत की आस्था और संस्कृति हजारों सालों से चली आ रही है. इसे खत्म नहीं किया जा सकता. देश अपनी परंपराओं के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है. भारत जीवित है, जागृत है और अपनी निरंतर यात्रा पर आगे बढ़ रहा है.