उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने का फैसला लिया है. इसके लिए ₹300 करोड़ की धनराशि मंजूर की गई है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है. इस योजना के तहत बेसिक शिक्षा परिषद के 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास स्थापित किए जाएंगे. इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, ICT लैब और डिजिटल संसाधनों के जरिए बच्चों को आधुनिक सुविधा दी जाएगी.
स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है. प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के जरिए काम कराया जाएगा. इसके लिए हर स्कूल को 2,07,910 रुपये की प्रस्तावित दर तय की गई है. इसमें सेनेटेज चार्जेज और GST शामिल हैं. ़
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अगर टेंडर प्रक्रिया में इससे कम दर मिलती है तो 300 करोड़ रुपये की तय सीमा के भीतर और ज्यादा स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाया जा सकेगा. बता दें, उत्तर प्रदेश में पहले से 32 हजार से ज्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास संचालित होती हैं. 15 हजार से ज्यादा विद्यालयों में ICT लैब की सुविधा उपलब्ध है.
इसके अलावा 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी भी चल रही हैं. प्रदेश में 2,61 लाख से ज्यादा शिक्षकों को अब तक टैबलेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं. वहीं, प्राथमिक विद्यालयों में साल 2021 में स्मार्ट क्लास की शुरुआत हुई थी. जबकि शैक्षिक सत्र 20222-23 से इसका विधिवत संचालन शुरू हुआ था.
अब स्मार्ट स्कूल योजना के जरिए डिजिटल शिक्षा का दायरा और बढ़ाया जाएगा. विद्यार्थियों की संख्या और नामांकन को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट क्लास और ICT लैब की सुविधाओं का चरणबद्ध तरीके विस्तार किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने पर है.