UPSC मेंस तक पहुंचे, लेकिन फाइनल सेलेक्शन नहीं हुआ. इसके बाद शिक्षक बनने का फैसला किया और आज उसी पेशे में ऐसी पहचान बनाई कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों अध्यापक राज्य पुरस्कार मिलने जा रहा है. कहानी संभल के बृजकिशोर यादव की है, जिन्होंने सरकारी स्कूल को सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के लिए बेहतर और संस्कारयुक्त माहौल देने वाला विद्यालय बनाने की कोशिश की.
दरअसल, संभल जिले के रहने वाले बृजकिशोर यादव का सपना IAS या IPS बनकर देश की सेवा करने का था. उन्होंने UPSC की तैयारी की और मेंस परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. इसी बीच परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ रही थीं और समय भी सीमित था. ऐसे में उन्होंने शिक्षक बनने की राह चुनी. साल 2001 में BTC करने के बाद 2009 में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई.
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समय बीतने के साथ बृजकिशोर यादव को साल 2015 में प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी मिली. उन्हें संभल जिले की गुन्नौर तहसील के रसूलपुर गांव स्थित कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक बनाया गया. कार्यभार संभालने पर उन्होंने पाया कि विद्यालय की स्थिति पहले से ठीक थी, लेकिन नामांकन कम था और स्कूल में दर्ज बच्चों की तुलना में उपस्थिति भी काफी कम रहती थी. इसके बाद उन्होंने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर स्कूल की दिशा और दशा बदलने की योजना तैयार की.
425 तक पहुंचा नामांकन, 90% तक रहने लगी उपस्थिति
प्रधानाध्यापक ने सबसे पहले विद्यालय में बच्चों के नामांकन को बढ़ाने पर काम शुरू किया. अभिभावकों से संपर्क किया गया और उन्हें बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया गया. शिक्षकों ने माता-पिता से लगातार संवाद किया और बच्चों की पढ़ाई के प्रति परिवारों को जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया. इसका असर यह हुआ कि विद्यालय में अब 425 छात्र-छात्राओं का नामांकन है. खास बात यह है कि यहां छात्राओं की संख्या छात्रों से ज्यादा है.
नामांकन बढ़ने के साथ बच्चों की नियमित उपस्थिति पर भी जोर दिया गया. प्रधानाध्यापक और उनके साथी शिक्षकों ने अभिभावकों को समझाया कि सिर्फ बच्चे का नाम स्कूल में दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी रोजाना मौजूदगी और पढ़ाई में भागीदारी भी जरूरी है. इन प्रयासों के बाद विद्यालय में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति करीब 90% तक पहुंच गई है.
स्कूल के भौतिक परिवेश को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों ने मिलकर एक ब्लूप्रिंट तैयार किया. इसके बाद सामुदायिक सहयोग और CSR फंड की मदद से विद्यालय में कई काम कराए गए. नरोरा से मिले CSR सहयोग के जरिए साइंस और ICT लैब विकसित की गई. स्कूल की दीवारों को भी शिक्षण और संस्कार से जुड़े संदेशों से सजाया गया, ताकि बच्चे किताबों के अलावा आसपास के माहौल से भी सीख सकें.
दीवारों पर राष्ट्रगान, स्वामी विवेकानंद के विचार, स्मार्ट स्क्रीन पर पढ़ाई
विद्यालय की दीवारों पर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम', राष्ट्रगान, पंच प्रण शपथ, सप्त कर्म सूत्र और सूर्य नमस्कार की पेंटिंग बनवाई गई. इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के विचार लिखवाए गए और मां सरस्वती का चित्र भी बनाया गया. इन प्रयासों से स्कूल का पूरा परिवेश बदल गया. विद्यालय को बाल मैत्री बनाने के लिए जगह-जगह ऐसी पेंटिंग कराई गईं, जो बच्चों को पढ़ने और सीखने के लिए प्रेरित करती हैं.
विद्यालय में अब बच्चों को केवल पारंपरिक ब्लैक बोर्ड के सहारे पढ़ाई नहीं कराई जाती. बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से स्मार्ट स्क्रीन लगाए जाने के बाद कुछ क्लासरूम में डिजिटल माध्यम से पढ़ाई शुरू हुई है. शिक्षक ICT लैब और ICT टूल्स का इस्तेमाल कर शिक्षण को ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रयास करते हैं. शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ नए प्रयोगों पर भी लगातार काम किया गया.
स्कूल का बदला हुआ माहौल बच्चों के व्यवहार में भी नजर आने लगा. प्रधानाध्यापक के मुताबिक, बच्चे विद्यालय में प्रवेश करते समय शिक्षकों के पैर छूकर प्रणाम करते हैं. इसके बाद मां सरस्वती के चित्र के सामने धूपबत्ती जलाकर प्रार्थना करते हैं और फिर कक्षा में जाते हैं. विद्यालय में आने वाले बच्चों को अपनी बात रखने और अपनी समस्याएं साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है. बृजकिशोर यादव का कहना है कि स्कूल का वातावरण हमेशा बच्चों के अनुरूप और बाल मैत्री होना चाहिए.
'भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार शिक्षा देना हमारा प्रयास'
बृजकिशोर यादव का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को किताबों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर नागरिक बनाना और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना भी है. इसी सोच के साथ विद्यालय में अलग-अलग गतिविधियों और प्रयोगों को जगह दी गई. उनका प्रयास है कि बच्चे शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदारी भी सीखें, ताकि वे आगे चलकर देश और समाज के लिए अच्छे नागरिक बन सकें.
राज्य पुरस्कार के लिए चयनित बृजकिशोर यादव बताते हैं कि उन्होंने 2009 में बेसिक शिक्षा विभाग में जॉइनिंग की थी और 2015 में इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक बने. कार्यभार संभालने के दौरान उन्हें नामांकन और बच्चों के स्कूल में ठहराव की कमी दिखाई दी. इसके बाद उन्होंने साथी शिक्षकों के साथ विचार-विमर्श किया और सबसे पहले विद्यालय के भौतिक परिवेश को बेहतर बनाने की दिशा में काम शुरू किया. सामुदायिक सहयोग से कई कार्य कराए गए और धीरे-धीरे समाज का सहयोग भी मिलने लगा.
वह बताते हैं कि विद्यालय में सभी शिक्षकों के सहयोग से ICT लैब और दूसरे ICT टूल्स का समुचित प्रयोग किया जाता है. उनका कहना है कि जब बच्चे किसी चीज को अपने आसपास देखते हैं तो उससे सीखते भी हैं. इसलिए स्कूल के माहौल को बच्चों के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया. विद्यालय में नामांकन 400 से ज्यादा पहुंच चुका है और उनके मुताबिक 80% से अधिक बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं.
पुरस्कार को साथी शिक्षकों और बच्चों को करेंगे समर्पित
बृजकिशोर यादव का कहना है कि विद्यालय में किए गए इन प्रयासों को बेसिक शिक्षा विभाग ने नई पहचान दी है. शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूल के परिवेश में सुधार और नए इनोवेशन के आधार पर उनका चयन अध्यापक राज्य पुरस्कार के लिए किया गया. 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के 61 शिक्षकों को अध्यापक राज्य पुरस्कार दिया जाना है. इसी सूची में संभल के बृजकिशोर यादव का नाम भी शामिल है.
पुरस्कार मिलने से पहले बृजकिशोर यादव अपने साथियों को इसका श्रेय देते हैं. उनका कहना है कि विद्यालय के दूसरे शिक्षकों ने उन्हें कभी पीछे खींचने का काम नहीं किया,बल्कि हर कदम पर सहयोग दिया. इसी वजह से स्कूल में किए गए प्रयोग आगे बढ़ सके. वह इस सम्मान को अपने साथी शिक्षकों और विद्यालय के छात्र-छात्राओं को समर्पित करना चाहते हैं.
प्रधानाध्यापक का कहना है कि यह पुरस्कार मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाएगी. बेसिक शिक्षा विभाग ने उनके इनोवेशन और काम को जो पहचान दी है, वह उनके लिए प्रेरणा है. अब उनका प्रयास शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर करने, ICT और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से बच्चों को आगे बढ़ाने तथा विद्यालय के बाल मैत्री माहौल को और मजबूत करने का रहेगा. UPSC में IAS या IPS बनने का सपना भले पूरा नहीं हुआ, लेकिन शिक्षक के रूप में बृजकिशोर यादव ने सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने की राह जरूर चुन ली.