श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की न्यासी मंडल की बैठक हुई. इस बैठक में श्रावण मास में श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ी संख्या को देखते हुए दर्शन और व्यवस्थाओं को लेकर अहम फैसले लिए गए.
चढ़ावे की गणना में अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है. इसी कारण इस विषय पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया. न्यासियों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और न्यायालय के आदेशों का संज्ञान भी लिया.
मंदिर परिसर के सभी सीसीटीवी कैमरों, विशेषकर चढ़ावा गणना कक्ष के कैमरों की सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंच की समीक्षा की गई और व्यवस्था पर संतोष जताया गया. स्वर्ण और रजत चढ़ावे की मात्रा व शुद्धता की जांच के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक संस्थान की टकसाल (मिंट) के साथ व्यवस्था जारी रखने का फैसला लिया गया है.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुए एमओयू के तहत बैंक की जिम्मेदारियों और त्रुटियों पर विस्तृत चर्चा हुई और बैंक की प्रतिक्रिया पर न्यासी मंडल ने निराशा व्यक्त की. ट्रस्ट की वित्त समिति को एसबीआई के साथ संबंधों और मानक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश दिए गए.
बता दें, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए गठित समिति को अधिक आवेदन मिलने के कारण एक महिने का अतिरिक्त समय दिया गया है. सीईओ की नियुक्ति में विलंब को देखते हुए ट्रस्ट ने एक सचिव नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की.
ट्रस्ट ने कहा कि दुष्प्रचार और आरोपों के बावजूद राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और रामभक्तों की आस्था अटूट बनी हुई है. संत समाज, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और अयोध्या के समाज के प्रति ट्रस्ट ने आभार व्यक्त किया.
मीडिया के माध्यम से नियमित संवाद बनाए रखने के लिए ट्रस्ट ने प्रवक्ता नियुक्त करने का निर्णय लिया. न्यासी मंडल में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है और इसे पूरा होने में कुछ और हफ्ते लग सकते हैं.
पूजा-अर्चना की परंपरागत शुद्धता बनाए रखने के लिए धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे. अन्य प्रमुख संतों और महंतों को भी समिति में शामिल किया गया है.