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सिक्योरिटी गार्ड को 3 करोड़ का GST नोटिस... नौकरी गई और राशन कार्ड भी हुआ रद्द

कानपुर में एक सिक्योरिटी गार्ड को कथित तौर पर उसके नाम पर हुए 17 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के आधार पर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का GST नोटिस मिला. ओम जी शुक्ला का दावा है कि उन्हें इस कारोबार की कोई जानकारी नहीं थी. नोटिस के बाद नौकरी चली गई और राशन कार्ड समेत सरकारी सुविधाएं भी बंद हो गईं.

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पुलिस कमिश्नर से रोते हुए बताई पूरी कहानी.(Photo: Ranjay Singh/ITG)
पुलिस कमिश्नर से रोते हुए बताई पूरी कहानी.(Photo: Ranjay Singh/ITG)

कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र के हंसपुरम निवासी ओम जी शुक्ला एक सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड की नौकरी करते थे. उनकी मासिक आय करीब 10 हजार रुपये थी. इसी कमाई से उनका घर चलता था. लेकिन 21 सितंबर 2025 को मिले GST नोटिस ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. नोटिस में उनके नाम पर 17 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दिखाया गया था.

GST विभाग की ओर से जारी नोटिस में ओम जी शुक्ला से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स जमा करने और जवाब दाखिल करने को कहा गया. शुक्ला का कहना है कि उन्होंने जिंदगी में 3 करोड़ रुपये तो दूर, कभी 3 लाख रुपये भी नहीं देखे. अचानक करोड़ों के कारोबार और टैक्स की जानकारी मिलने के बाद वह परेशान हो गए और मदद के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने लगे.

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नोटिस के बाद नौकरी भी चली गई

शुक्ला पहले पुलिस के पास पहुंचे, लेकिन उन्हें GST विभाग से संपर्क करने की सलाह दी गई. इसके बाद वह एक व्यापारी नेता के साथ GST कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को नोटिस दिखाकर अपनी स्थिति बताई. उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया. वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने दिल्ली स्थित GST मुख्यालय को भी पत्र भेजा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ.

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इस दौरान लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने और मानसिक परेशानी के बीच उनकी नौकरी भी चली गई. करीब एक साल में हालात ऐसे हो गए कि उनके पास रोजगार तक नहीं रहा. शुक्ला का कहना है कि GST के रिकॉर्ड में वह करोड़ों का कारोबारी दिखाई दे रहे हैं, जबकि वास्तविकता में उनके पास घर चलाने के लिए भी पर्याप्त आय नहीं है.

नोटिस के बाद उनकी परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई. आरोप है कि उनका राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया और कई सरकारी सुविधाएं भी बंद हो गईं. शुक्ला का कहना है कि GST रिकॉर्ड में करोड़ों का कारोबार उनके नाम दर्ज होने की वजह से अब वह आर्थिक मदद या लोन लेने की स्थिति में भी नहीं हैं. वह लगातार इस मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे थे.

पुलिस कमिश्नर से रोते हुए बताई पूरी कहानी

ओम जी शुक्ला ने बताया कि पूर्व पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के सामने भी उन्होंने अपनी शिकायत रखी थी और जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद मंगलवार को उन्होंने मौजूदा पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल से मुलाकात की. शुक्ला ने रोते हुए अपनी पूरी परेशानी उनके सामने रखी.

पुलिस कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नौबस्ता पुलिस को शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए. साथ ही पूरे प्रकरण की जांच क्राइम ब्रांच से कराने का आदेश दिया गया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शुक्ला के दस्तावेजों और पहचान का इस्तेमाल किसने किया और उनके नाम पर करोड़ों का कारोबार कैसे दर्ज हुआ.

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शुक्ला का आरोप है कि किसी व्यक्ति ने उनके नाम पर फर्म बनाई और उनके नाम का पैन कार्ड इस्तेमाल किया. उनका कहना है कि यह काम किसी ऐसे व्यक्ति ने किया होगा, जिसे उनकी निजी जानकारी की जानकारी थी. उनका दावा है कि उनके नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार करने की उन्हें भनक तक नहीं थी. अब उन्हें पुलिस जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है.

कानपुर

'पैन कार्ड लेकर किसी ने किया कारोबार'

पुलिस कमिश्नर के स्टाफ ऑफिसर सुबोध कुमार ने बताया कि एक पूर्व गार्ड को GST की ओर से 3 करोड़ रुपये का नोटिस भेजा गया है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी व्यक्ति ने उनके पैन कार्ड और अन्य कागजात का इस्तेमाल कर उनके नाम पर कारोबार किया हो सकता है. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है. जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी.

वहीं, व्यापार मंडल ने इस मामले में GST अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. व्यापार मंडल के लोगों का कहना है कि GST नंबर जारी होने से पहले संबंधित पते का सत्यापन और फोटो जैसी प्रक्रिया होती है. ऐसे में उनके मुताबिक यह पता लगाया जाना चाहिए कि शुक्ला के नाम पर कारोबार दर्ज करते समय सत्यापन कैसे हुआ.

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व्यापार मंडल का कहना है कि शुक्ला आमदनी के लिहाज से करोड़पति तो दूर, लखपति भी नहीं हैं. ऐसे व्यक्ति के नाम पर करोड़ों का कारोबार दर्ज होना गंभीर सवाल खड़े करता है. संगठन की ओर से मामले में जवाब तैयार कर दिल्ली स्थित केंद्रीय GST विभाग को भेजने की बात कही गई है, ताकि शुक्ला को राहत दिलाने का प्रयास किया जा सके.

क्राइम ब्रांच की जांच में खुलेगा राज

अब इस पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच करेगी. पुलिस यह पता लगाएगी कि ओम जी शुक्ला के दस्तावेजों का इस्तेमाल किसने किया, फर्जी फर्म कैसे बनाई गई और 17 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार उनके नाम पर किस तरह दर्ज हुआ. साथ ही GST प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी.

फिलहाल, शुक्ला नौकरी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. उनका कहना है कि जिस कारोबार से उनका कोई लेना-देना नहीं, उसका बोझ उनके सिर डाल दिया गया. पुलिस की जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि आखिर उनके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों का कथित कारोबार किसने किया और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं.

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