सूर्य और राहु की युति से बनने वाला ग्रहण योग जब कुंडली के द्वादश भाव में बनता है तो इसके परिणाम व्यक्ति के खर्च, विदेश यात्रा, एकांत, अस्पताल, कारागार, मुकदमे तथा मानसिक तनाव जैसे विषयों से जुड़ सकते हैं. हालांकि किसी भी योग का फल केवल ग्रहों की युति देखकर तय नहीं किया जा सकता. राशि, भाव स्वामित्व, दशा-अंतर्दशा, ग्रहों की शक्ति और शुभ-अशुभ दृष्टियों को भी साथ में देखना आवश्यक होता है.
द्वादश भाव को व्यय, विदेश, एकांत, शयन, अस्पताल, परदे के पीछे होने वाले कार्य और बंधन का भाव माना जाता है. यहां सूर्य और राहु की युति होने पर व्यक्ति के जीवन में ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं. इसमें धन का अप्रत्याशित खर्च, सरकारी मामलों को लेकर परेशानी या व्यक्ति किसी विवाद में अनावश्यक रूप से फंस सकता है. राहु सूर्य का तेज निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकता है. परिणामस्वरूप व्यक्ति कभी-कभी जल्दबाजी में ऐसा निर्णय ले सकता है, जिसका प्रभाव बाद में कानूनी या आर्थिक परेशानी के रूप में सामने आए.
यदि सूर्य मजबूत होकर द्वादश भाव में राहु के साथ स्थित हो और कुंडली में अन्य ग्रह भी विपरीत परिस्थितियों को बढ़ावा दे रहे हों, तो कोर्ट-कचहरी, सरकारी जांच या कारावास जैसी स्थिति की आशंका बढ़ सकती है. विशेष रूप से सूर्य या राहु की दशा-अंतर्दशा में इस प्रकार के योग सक्रिय होने की संभावना मानी जाती है. हालांकि केवल ग्रहण योग के आधार पर यह कहना उचित नहीं है कि व्यक्ति निश्चित रूप से जेल जाएगा. इसके लिए छठे, आठवें और द्वादश भाव, उनके स्वामियों तथा दशा क्रम का विस्तृत अध्ययन जरूरी है.
विदेश से जुड़ सकता है सकारात्मक पक्ष
द्वादश भाव का एक प्रमुख संबंध विदेश से भी है. इसलिए यही योग कुछ कुंडलियों में व्यक्ति को विदेश जाने, विदेश में काम करने अथवा लंबे समय तक जन्मस्थान से दूर रहने का अवसर भी दे सकता है. यदि द्वादश भाव और उसके स्वामी मजबूत हों, विदेश संबंधी ग्रहों का सहयोग मिले तथा राहु शुभ स्थिति में हो तो विदेश से जुड़े क्षेत्र में उपलब्धियां मिल सकती हैं. ऐसे मं ग्रहण योग का प्रभाव पूरी तरह नकारात्मक न रहकर व्यक्ति को नए वातावरण में अपनी पहचान बनाने का अवसर दे सकता है.
विपरीत राजयोग बना सकता है परिणाम बेहतर
यदि सूर्य छठे या आठवें भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित हो और कुंडली की अन्य परिस्थितियां उसका समर्थन करें, तो कठिनाइयों के बाद सफलता प्राप्त होने की संभावना बन सकती है. विदेश में रहकर तरक्की कर सकता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति संघर्षों से निकलकर अपने लिए बेहतर रास्ता बना सकता है. परेशानी आती है, लेकिन उसका अंतिम परिणाम अपेक्षाकृत सुखद हो सकता है. शुभ ग्रहों की दृष्टि या संबंध इस योग की नकारात्मकता को कम कर सकते हैं.
क्या समस्याएं हो सकती हैं?
अनावश्यक खर्च, कानूनी विवाद, सरकारी मामलों में उलझन, विदेश से जुड़ी परेशानी, नींद में बाधा, मानसिक बेचैनी, प्रतिष्ठा को लेकर चिंता तथा अकेलेपन की भावना जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं. व्यक्ति को गुप्त शत्रुओं और बिना सोचे किए गए समझौतों से भी सावधान रहना चाहिए. दस्तावेजों, टैक्स, कानूनी कागजात और सरकारी प्रक्रियाओं में विशेष सतर्कता रखना लाभकारी रहेगा.
उपाय
ग्रहण योग की तीव्रता कम करने के लिए सूर्य को मजबूत और राहु से संबंधित नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के उपाय किए जा सकते हैं. प्रतिदिन प्रातः तांबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पित करें और आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य मंत्र का पाठ करें. रविवार को जरूरतमंद व्यक्ति को गेहूं, गुड़ या तांबे से संबंधित वस्तु का दान करना भी शुभ माना जाता है. राहु के लिए शनिवार को काले तिल का दान करें और भगवान शिव की आराधना करें. महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप भी मानसिक स्थिरता और संकट के समय धैर्य बनाए रखने में सहायक माना जाता है. इसके साथ ही व्यक्ति को झूठे दस्तावेज, अनैतिक कार्य, कर चोरी और बिना पढ़े किसी कानूनी कागज पर हस्ताक्षर करने से बचना चाहिए.