कानपुर बिजली विभाग में स्क्रैप के निस्तारण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है. आरोप है कि विभाग के करोड़ों रुपये के पुराने उपकरण और स्क्रैप को निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई. शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के जेई मुन्ना यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है.
आरोप है कि बिजली विभाग के स्टोर से निकलने वाले स्क्रैप पोल और अन्य उपकरणों को निजी खरीदारों को दिया जा रहा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्क्रैप की लोडिंग और निस्तारण प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई और इस पूरे मामले में कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
FIR के मुताबिक, कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी के R.P.H. स्टोर से स्क्रैप सामग्री के निस्तारण के लिए ई-ऑक्शन के जरिए खरीदार को स्क्रैप पोल दिए गए थे. 21 जुलाई 2026 को स्क्रैप पोल लेकर जा रहे ट्रक का धर्मकांटे पर वजन कराया गया, जिसमें ट्रक का कुल वजन 32,920 किलोग्राम और खाली वाहन का वजन 10,605 किलोग्राम दर्ज हुआ. इसके बाद स्क्रैप का वजन 22,315 किलोग्राम बताया गया.
शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्क्रैप की लोडिंग में गड़बड़ी हुई है. रास्ते में ट्रक का टायर फटने के बाद मामला सामने आया और वाहन को सीज करके काकडे थाने ले जाया गया. FIR में इस लोडिंग की जिम्मेदारी जेई मुन्ना यादव के पास होने का जिक्र किया गया है.
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा सिर्फ स्क्रैप पोल की लोडिंग तक सीमित नहीं है. आरोप है कि बिजली विभाग के कई पुराने खंभों और अन्य उपकरणों को स्क्रैप के नाम पर बेहद कम कीमतों में निजी कंपनियों को दिया जाता था. इसके बाद इन्हीं उपकरणों को ऊंची कीमतों पर वापस खरीदने का खेल चलता था. सूत्रों का यह भी दावा है कि कई ऐसे उपकरण भी स्क्रैप में शामिल कर दिए जाते थे जो अभी उपयोग की स्थिति में थे. इसके अलावा कई मामलों में स्क्रैप के वजन को कम दिखाने जैसी अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है. पुलिस अब इस पूरे सिस्टम और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.
अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है कि स्क्रैप निस्तारण की प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई. जांच में अगर किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.
सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा सिर्फ एक ट्रक की लोडिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्क्रैप निस्तारण की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है. आरोप है कि इस पूरे खेल में बिजली विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा था, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी.