भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेज और एनएसजी कमांडो की जिंदगी कितनी कठिन और चुनौतियों भरी होती है, इसका अंदाजा लगाना आम इंसान के लिए आसान नहीं है. दुश्मन के इलाके में ऑपरेशन करना, घने जंगलों में दिनों-दिन बिताना, आतंकियों का डटकर सामना करना और हर पल जान जोखिम में डालना- यह सब उनकी रोजमर्रा की ड्यूटी का हिस्सा होता है. ऐसे कठिन हालात में सिर्फ शरीर का मजबूत होना काफी नहीं, दिमागी तौर पर भी उतना ही दृढ़ होना जरूरी होता है.
द लल्लनटॉप से बातचीत में पूर्व 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज और एनएसजी कमांडो कर्नल कौशल कश्यप ने अपने सैन्य करियर और खतरनाक मिशनों से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए. इस बातचीत में एनएसजी और पैरा एसएफ की ट्रेनिंग, आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, विमान हाईजैक जैसी स्थितियों, मणिपुर के जंगलों में काम करने के अनुभव और मुश्किल हालात में जिंदा रहने की ट्रेनिंग पर खुलकर चर्चा हुई.
खाने की पहचान भी ट्रेनिंग का हिस्सा
कर्नल कश्यप ने बताया कि स्पेशल फोर्सेज की ट्रेनिंग में जवानों को ऐसी परिस्थितियों के लिए भी तैयार किया जाता है, जहां सामान्य भोजन आसानी से उपलब्ध नहीं होता. जंगल में रहते हुए कई बार जवानों को यह पहचानना पड़ता है कि आसपास मौजूद चीजों में से क्या खाया जा सकता है और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए. इसी सिलसिले में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दिनों का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया, जिसमें एक सांप उनका 'बड्डी' बन गया था.
कर्नल कश्यप ने बताया कि सांप पालना उनका कोई शौक नहीं था, बल्कि यह उनकी ट्रेनिंग का एक हिस्सा था. उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें सांप पकड़ने की ट्रेनिंग दी गई थी, जिसके बाद निर्देश मिला कि वह सांप अब उनके साथ रहेगा. इसके बाद वे उस सांप को एक डिब्बे में रखकर अपने बैग के साथ लेकर घूमा करते थे.
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उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी याद किया कि किस तरह पहली बार सांप को ठीक से न पकड़ पाने पर उनके सीनियर ने नाराजगी जताई थी और सांप को हमेशा साथ रखने का आदेश दिया. इसी दौरान कैंप में एक जेसीओ ने उनसे उनके 'बड्डी' के बारे में पूछा और उसे कुछ खिलाने को भी कहा. कर्नल कश्यप ने बताया कि उस दौरान उन्हें यह भी नहीं पता था कि सांप जहरीला है या नहीं, लेकिन उसके दांत जरूर तेज थे.
एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था सीनियर ने कहा सांप को कुछ खिला कर दिखाओ, मैंने मुंह खोला खैनी दबा दिया उसके मुंह में.
इस पूरे अनुभव को याद करते हुए कर्नल कश्यप ने कहा कि जंगल में किसी भी जीव को संभालना और उसके व्यवहार को समझना भी कमांडो ट्रेनिंग का एक अहम और जरूरी हिस्सा था.