scorecardresearch
 

हरदोई का हिस्ट्रीशीटर 22 साल बाद झांसी में मिला, ‘नटरोज’ से बना ‘काली सरकार’, मंदिर में लगाता था दरबार, खुद को बताया दुनिया का सबसे बड़ा ज्योतिष

हरदोई में लूट, हत्या के प्रयास और अपहरण समेत 13 मुकदमों में नामजद प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज करीब 22 साल बाद झांसी के मऊरानीपुर में मिला. यहां वह सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से मंदिर में दरबार लगाता था. पुलिस उसे सत्यापन के लिए हरदोई लाई और प्रक्रिया पूरी होने के बाद छोड़ दिया.

Advertisement
X
22 साल बाद पुलिस की नजर में आया प्रदीप शुक्ला.  (Photo: Screengrab)
22 साल बाद पुलिस की नजर में आया प्रदीप शुक्ला. (Photo: Screengrab)

उत्तर प्रदेश के हरदोई में कभी ‘नटरोज’ के नाम से पहचाने जाने वाला प्रदीप शुक्ला करीब दो दशक तक पुलिस और अपने पुराने परिचितों की नजरों से दूर रहा. इस बीच उसकी जिंदगी ऐसी बदली कि हरदोई का हिस्ट्रीशीटर झांसी के एक गांव में ‘सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार’ के नाम से चर्चित हो गया. यहां वह मंदिर में दरबार लगाता था और लोगों की समस्याएं दूर करने, बीमारियां ठीक करने तथा पर्ची निकालकर भविष्य बताने जैसे दावे किए जाते थे. सोशल मीडिया पर उसके वीडियो प्रसारित हुए तो उसकी नई पहचान के साथ पुराना नाम भी चर्चा में आ गया. आखिरकार 10 अक्टूबर 2026 को हरदोई और झांसी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे कुरैंचा गांव स्थित मंदिर से हरदोई लाया गया. हालांकि, यह गिरफ्तारी नहीं, बल्कि हिस्ट्रीशीटर के सत्यापन की कार्रवाई थी. सत्यापन के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया.

प्रदीप शुक्ला हरदोई शहर कोतवाली क्षेत्र के चौहान थोक का रहने वाला है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ वर्ष 1987 से 2002 के बीच 13 मुकदमों का उल्लेख है. इन मामलों में लूट, हत्या के प्रयास, अपहरण, यौन शोषण के प्रयास, मारपीट, धमकी और अवैध हथियार रखने जैसे आरोप शामिल हैं. वर्ष 1987 में उसके खिलाफ लूट से जुड़ा मुकदमा दर्ज हुआ था. इसके बाद 1988 में हत्या के प्रयास, अपहरण और अन्य गंभीर आरोपों से संबंधित मामले सामने आए. वर्ष 1996 और 1997 में भी उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए. वर्ष 2002 में धारा 110जी जाब्ता फौजदारी के तहत मुकदमा संख्या 68/02 दर्ज हुआ. इसी दौरान कोतवाली शहर में उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 34ए खोली गई. इसके बाद प्रदीप लंबे समय तक हरदोई में नजर नहीं आया. स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह करीब 20 से 24 साल पहले शहर से गायब हो गया था.
बचपन के नाम ‘नटरोज’ से हुई थी पहचान

Advertisement

प्रदीप को बचपन में उसकी शरारतों के कारण ‘नटरोज’ कहा जाता था. उसके परिवार का कारोबार अंगूठी, रत्न, नग, रुद्राक्ष की मालाएं और बिसातखाने का सामान बेचने से जुड़ा था. उसके पिता मायाराम शुक्ला मंदिर के पास चाय की दुकान चलाते थे. प्रदीप भी परिवार के इसी कारोबार से जुड़ा हुआ था. बताया जाता है कि हरदोई से निकलने के बाद वह कानपुर रेलवे स्टेशन के आसपास रत्न और नग बेचने लगा. बाद में वह झांसी पहुंच गया और धीरे-धीरे धार्मिक गतिविधियों से जुड़ गया. समय बीतने के साथ उसकी पहचान बदलती गई और वह मऊरानीपुर क्षेत्र के कुरैंचा गांव स्थित काली सरकार मंदिर में सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से जाना जाने लगा.

मंदिर में दरबार, बीमारियां ठीक करने के दावे

झांसी के मऊरानीपुर क्षेत्र के कुरैंचा गांव में स्थित मंदिर में प्रदीप सेना जैसी पोशाक पहनकर दरबार लगाता था. यहां आने वाले लोगों की परेशानियां दूर करने, बीमारियां ठीक करने और पर्ची निकालकर भविष्य बताने जैसे दावे किए जाने की जानकारी सामने आई है. बताया गया कि उसके दरबार में दूर-दराज से लोग पहुंचते थे. विदेशी अनुयायियों के होने के दावे भी किए गए. सोशल मीडिया पर उसके वीडियो प्रसारित होने लगे और फेसबुक तथा इंस्टाग्राम पर बड़ी संख्या में लोगों के जुड़ने की बात सामने आई. इसी लोकप्रियता के बीच उसकी पुरानी पहचान को लेकर पड़ताल हुई. जब सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार का नाम हरदोई के पुराने रिकॉर्ड से जोड़ा गया, तो प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज का आपराधिक इतिहास फिर चर्चा में आ गया. करीब दो दशक तक दूर रहने के बाद उसकी नई पहचान और पुराने पुलिस रिकॉर्ड की कहानी सामने आई.

Advertisement

प्रदीप के लंबे समय तक हरदोई नहीं लौटने के कारण उसके परिवार और मोहल्ले के कई लोगों को लगने लगा था कि उसकी मौत हो चुकी है. उसके पिता मायाराम शुक्ला की करीब 18 साल पहले मौत हो गई थी. उसके भाई नन्हे की भी लगभग दो साल पहले मृत्यु हो गई, लेकिन प्रदीप वापस नहीं आया. वर्ष 2019 में उसका पैतृक मकान भी बिक गया. इस तरह एक समय हरदोई में रहने वाला प्रदीप अपने पुराने घर और परिचितों से दूर हो चुका था. उधर, झांसी में वह नई पहचान के साथ धार्मिक गतिविधियों के कारण चर्चा में था.

सोशल मीडिया से पुलिस तक पहुंची जानकारी

हरदोई पुलिस अपने रिकॉर्ड में दर्ज हिस्ट्रीशीटरों और अन्य अपराधियों के सत्यापन का अभियान चला रही थी. इसी दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के जरिए प्रदीप के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद झांसी पुलिस से संपर्क किया गया और उसकी पहचान का सत्यापन किया गया. 10 अक्टूबर 2026 को हरदोई और झांसी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उसे कुरैंचा गांव स्थित मंदिर से हरदोई लाया गया. पुलिस ने थाने में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की और फिर उसे छोड़ दिया.


हरदोई के सीओ सिटी अजीत सिंह ने बताया, “उत्तर प्रदेश पुलिस के अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और अन्य अपराधियों के सत्यापन का अभियान लगातार चल रहा है. इसी क्रम में कोतवाली शहर के हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला का सत्यापन किया जा रहा था. वह झांसी जिले के मऊरानीपुर में काफी समय से रह रहा था. उसे सत्यापन के लिए लाया गया था और प्रक्रिया पूरी होने के बाद भेज दिया गया है.” इस तरह करीब 22 साल तक हरदोई से दूर रहने वाले प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज की पहचान एक बार फिर सामने आ गई. हरदोई के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से लेकर झांसी में सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से मंदिर में दरबार लगाने तक का उसका सफर अब चर्चा का विषय बना हुआ है.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement