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रात के 3 बजे... यात्री सो रहे थे, तभी बस में भरने लगा धुआं! कुछ मिनट में डबल डेकर बस आग का गोला बन गई

रात के करीब 3 बजे का वक्त था. दिल्ली से सिद्धार्थनगर जा रही एसी स्लीपर डबल डेकर बस गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़ रही थी. ज्यादातर यात्री नींद में थे. तभी बस के अंदर धुआं भरने लगा. कुछ ही पलों में धुआं आग की लपटों में बदल गया. यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई. गनीमत रही कि सभी 15 यात्री समय रहते बस से बाहर निकल आए.

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दिल्ली से सिद्धार्थनगर जा रही थी डबल डेकर बस. (Photo: ITG)
दिल्ली से सिद्धार्थनगर जा रही थी डबल डेकर बस. (Photo: ITG)

आधी रात का सफर था. डबल डेकर बस एक्सप्रेसवे पर दौड़ रही थी. ज्यादातर यात्री गहरी नींद में थे. तभी अचानक बस के अंदर धुआं भरने लगा. लोगों को पता चला तो तुरंत सीटों से उठे, किसी ने बच्चों को संभाला, कोई सामान छोड़कर भागा. और फिर देखते ही देखते पूरी बस आग की लपटों में घिर गई.

यह घटना उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में गंगा एक्सप्रेसवे पर हुई, जहां दिल्ली से सिद्धार्थनगर जा रही एक एसी स्लीपर डबल डेकर बस में देर रात भीषण आग लग गई. गनीमत रही कि बस में सवार सभी 15 यात्री समय रहते बाहर निकल आए. घटना बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र में तड़के करीब 3 बजे की है. बस गंगा एक्सप्रेसवे पर बढ़ रही थी. 

यहां देखें  Video

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चलते-चलते बस के एसी सिस्टम में शॉर्ट सर्किट हुआ. इसके बाद धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया. यात्री तुरंत बस से बाहर निकलने लगे. कुछ ही मिनटों में सभी यात्री सुरक्षित बाहर आ गए. अगर थोड़ी भी देर होती, तो यह हादसा कहीं ज्यादा भयावह साबित हो सकता था.

पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक डबल डेकर बस लगभग पूरी तरह जल चुकी थी. पुलिस ने बस चालक शिव कुमार निवासी बस्ती और यात्रियों के बयान दर्ज किए हैं. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है.

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अभी शुरुआती वजह एसी में शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है. लेकिन पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के बाद ही आग लगने की असली वजह स्पष्ट होगी. यानी फिलहाल शॉर्ट सर्किट की आशंका है, अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा. पिछले कुछ समय में चलती बसों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं. 

हर बार सवाल वही उठता है कि क्या बसों की फिटनेस जांच समय पर हो रही है? क्या इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित सर्विसिंग की जा रही है? और क्या लंबी दूरी की रात्रिकालीन बसों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो रहा है?

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