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बिकरू कांड: जमानत मिल गई, फिर भी जेल में रहेगा विकास दुबे का ड्राइवर, जानें क्यों नहीं हो सकेगी रिहाई

कानपुर के चर्चित बिकरू कांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी राम सिंह यादव की जमानत मंजूर कर ली है. अदालत ने समान स्थिति वाले सह-आरोपियों को पहले जमानत मिलने और मुकदमे में देरी की आशंका को राहत का आधार माना. हालांकि, गैंगस्टर एक्ट के एक अन्य मामले में सजा होने के कारण राम सिंह यादव फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेगा.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी राम सिंह यादव को जमानत दी. (Photo: Representational)
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी राम सिंह यादव को जमानत दी. (Photo: Representational)

कानपुर के चर्चित बिकरू कांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी राम सिंह यादव को जमानत दे दी है. यह वही मामला है, जिसमें जुलाई 2020 में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों पर पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोप लगा था. इस मामले में राम सिंह यादव पर भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है. जस्टिस कृष्ण पहल की अदालत ने 13 अक्टूबर 2026 को राम सिंह यादव की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली. अदालत के आदेश के मुताबिक, आरोपी को राहत देने के पीछे एक अहम आधार यह रहा कि समान स्थिति वाले सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है. इसके अलावा, मुकदमे की सुनवाई में देरी होने की आशंका को भी ध्यान में रखा गया. हालांकि, हाईकोर्ट से जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि राम सिंह यादव तुरंत जेल से बाहर आ जाएगा. गैंगस्टर एक्ट के एक अन्य मामले में उसे सजा हो चुकी है. ऐसे में उस मामले के कारण उसकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं हो सकेगी.

राम सिंह यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने समान स्थिति वाले सह-आरोपियों को पहले मिली राहत को भी ध्यान में रखा. अदालत के आदेश के अनुसार, जब समान परिस्थितियों में दूसरे आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, तो संबंधित आरोपी के मामले में भी इस आधार पर विचार किया जा सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी आरोपी को जमानत देने का आधार बनता है, तो उसे केवल उसके आपराधिक इतिहास के कारण जेल में नहीं रखा जा सकता. यानी आपराधिक इतिहास अपने आप में जमानत से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं होना चाहिए, यदि मामले की परिस्थितियां राहत देने के पक्ष में हों. कोर्ट ने राम सिंह यादव को जमानत देते हुए निर्धारित शर्तें पूरी करने का निर्देश दिया है. इनमें व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार पेश करना शामिल है. हालांकि, गैंगस्टर एक्ट के दूसरे मामले में सजा के कारण उसे फिलहाल जेल में ही रहना होगा.

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क्या है कानपुर का चर्चित बिकरू कांड

बिकरू कांड 2 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरू गांव में हुआ था. आरोप है कि पुलिस की एक टीम गैंगस्टर विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी. इसी दौरान विकास दुबे और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया. इस हमले में आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. घटना ने पूरे प्रदेश में चर्चा पैदा कर दी थी. इसके बाद मामले में विकास दुबे और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. राम सिंह यादव पर भी इस घटना से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था.

हत्या और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में मुकदमा

राम सिंह यादव पर बिकरू कांड में भारतीय दंड संहिता की हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज है. इस मामले में हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है. हालांकि, जमानत के आदेश के बावजूद उसकी रिहाई का रास्ता फिलहाल साफ नहीं है. गैंगस्टर एक्ट के एक अन्य मामले में सजा होने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सकेगा. इस तरह बिकरू कांड में जमानत मिलने के बाद भी उसे दूसरे मामले में मिली सजा का सामना करना होगा.
 

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