अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है. कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की. सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने चोरी के तरीके, रकम के इस्तेमाल और गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए. इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी एक बार फिर सामने आया. वहीं, जांच अब आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों तक पहुंच गई है.
इस चढ़ावा चोरी केस की जांच में हर दिन कई नई जानकारियां सामने आ रही हैं. पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक बिना किसी शक के कैसे गायब होती रही और इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही. इसी कड़ी में मंगलवार को पुलिस की टीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जिला जेल पहुंची. वहां गिरफ्तार आरोपियों से करीब दो घंटे तक अलग-अलग पूछताछ की गई. सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा समय आरोपी अविनाश मिश्रा से पूछताछ में लगाया गया. बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे अधिक बरामदगी हुई थी, इसलिए पुलिस उससे पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है.
पूछताछ में क्या-क्या सामने आने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये की चोरी की पूरी कार्यप्रणाली पुलिस को बताई. दावा है कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था. किस समय रकम निकाली जाती थी, कैसे उसे छिपाया जाता था और किस तरह बाहर पहुंचाया जाता था, इन सभी बिंदुओं पर पुलिस ने विस्तार से सवाल किए. सूत्रों का यह भी कहना है कि पूछताछ के दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम एक बार फिर सामने आया. आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में उनकी प्रमुख भूमिका रहती थी. हालांकि, इस संबंध में पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और न ही किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आया है. जांच एजेंसियां आरोपियों के दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही हैं.
एक व्यक्ति रकम निकालता था, बाकी घेरा बना लेते थे
पूछताछ में सामने आया सबसे चौंकाने वाला दावा चोरी के कथित तरीके को लेकर है. सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पुलिस को बताया कि दान राशि निकालने का काम एक व्यक्ति करता था, जबकि बाकी लोग उसके चारों ओर इस तरह खड़े हो जाते थे कि बाहर से किसी को शक न हो. इससे कैमरों या अन्य कर्मचारियों की नजर सीधे उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचती थी. दावा है कि रकम निकालने के बाद उसे तत्काल बाहर नहीं ले जाया जाता था. पहले उसे मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था. इसके बाद अनुकूल मौका मिलने पर उसे परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था. पुलिस अब इस दावे की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के जरिए करने में जुटी है.
कैमरों की लोकेशन तक थी जानकारी
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की पूरी जानकारी थी. उन्हें यह भी पता था कि किस दिशा में कैमरों की निगरानी रहती है और किन जगहों पर उनकी नजर कम पड़ती है. इसी वजह से कथित तौर पर पूरी योजना कैमरों की सीधी निगरानी से बचते हुए बनाई जाती थी. पूछताछ में यह भी दावा किया गया कि सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कुछ कमियों का लगातार फायदा उठाया गया. पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का भी मिलान कर रही है.
गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी बड़ा दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी. आरोपियों ने कथित तौर पर दावा किया कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था. हालांकि, बैंक कर्मियों की कथित भूमिका को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है.
पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस ने पिछले सप्ताह मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई की थी. इसके बाद चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गिनती इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और रकम गिनने वाले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है. अब जेल में हुई पूछताछ को जांच का अहम पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आरोपियों से पूरे घटनाक्रम को लेकर विस्तार से सवाल-जवाब किए गए.
बैंक ने दिया नोटिस का जवाब
अयोध्या स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा को नोटिस भेजकर कुछ खातों की जानकारी मांगी गई थी. इसके बाद बैंक की ओर से जवाब दे दिया गया. बैंक ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान तक सीमित है. बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए आने वाली धनराशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है. नकद चढ़ावे की गणना, उसकी पैकिंग या उसे बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक का कोई हस्तक्षेप नहीं होता. यानी मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती. सूत्रों के मुताबिक, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का करीब 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के जरिए ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से किया जाता है.
चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की भी जांच
जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है. बताया जा रहा है कि यह खाता कई वर्ष पहले दिल्ली से अयोध्या स्थानांतरित किया गया था. फिलहाल उसमें बहुत कम पैसा है और लंबे समय से उसमें कोई खास ट्रांजेक्शन नहीं हुई है. इसी तरह ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी इसी शाखा में बैंक खाता है. सूत्रों का दावा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक लोन लिया था. फिलहाल पुलिस इस जानकारी का सत्यापन कर रही है. जांच एजेंसियों की ओर से अब तक यह नहीं कहा गया है कि इन बैंक खातों का कथित चोरी से कोई सीधा संबंध मिला है.
किन लोगों के खातों की मांगी गई जानकारी
पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से जिन खातों का विवरण मांगा, उनमें आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के नाम शामिल हैं. बैंक ने जवाब में बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला. सूत्रों के मुताबिक, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये की राशि दर्ज है और पिछले कुछ महीनों से उसमें कोई विशेष लेनदेन नहीं हुआ. पुलिस अब दूसरे बैंकों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित चोरी की रकम कहीं अन्य माध्यमों से तो नहीं पहुंचाई गई.