बटुक यौन शोषण मामले को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है. इस केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने खुद पीछे हटने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें न्याय की उम्मीद अब लगभग खत्म होती नजर आ रही है.
आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि इस मामले में शुरुआत से ही उन्हें सहयोग नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले एफआईआर दर्ज करने में ही देरी की और जब कोर्ट के निर्देश पर मामला दर्ज हुआ, तब भी आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. उनका दावा है कि आरोपी अविमुक्तेश्वरानंद को बचाने की कोशिश की गई, जिससे उन्हें अदालतों में राहत लेने का पर्याप्त समय मिल गया.
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उन्होंने कहा कि उनके पास न तो बड़े वकील हैं और न ही इतना पैसा कि वे लंबी कानूनी लड़ाई लड़ सकें. दूसरी तरफ आरोपी के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि हम कोर्ट कैसे जाएं, जब हमारे बटुकों की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं है. उनका कहना है कि उन्होंने सभी सबूत संबंधित एजेंसियों को सौंप दिए हैं और यह मामला पॉक्सो कानून के तहत आता है, फिर भी कार्रवाई में सुस्ती समझ से परे है.
आशुतोष ब्रह्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस, सरकार और यहां तक कि न्यायिक प्रक्रिया भी आरोपी के पक्ष में झुकी हुई नजर आती है. उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित बटुकों के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है, और बटुकों के साथ अन्याय हो रहा है.
सबसे गंभीर आरोप उन्होंने सुरक्षा को लेकर लगाए. उनका कहना है कि उन्हें और पीड़ित बच्चों (बटुकों) को किसी तरह की सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है, जबकि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है. ऐसे हालात में उन्होंने खुद को इस लड़ाई से पीछे हटाने का फैसला लिया है.
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फिलहाल, आशुतोष ब्रह्मचारी ने पीछे हटने की बात कही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में सक्रिय भूमिका निभाना उनके लिए संभव नहीं है. अब निगाहें प्रशासन और पुलिस पर हैं कि वे इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं.
क्या है पूरी कहानी
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य पर के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने केस दर्ज हुआ था. शिकायत में यौन शोषण के आरोप लगे और कहा गया कि यह घटनाएं जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच की हैं, जिनमें दो शिष्यों के साथ शोषण हुआ.
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया था कि पीड़ित लंबे समय से डर और दबाव में थे, इसलिए सामने नहीं आ पा रहे थे. आरोप यह भी लगा था कि कुंभ मेला 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान लगे शिविरों में, यहां तक कि कैंप के बाहर खड़ी गाड़ी में भी शोषण की घटनाएं हुईं. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया था.