ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी सीजफायर टूटने के बाद करीब दो हफ्ते से जारी तनाव के बीच रविवार(26 जुलाई) को लगातार दूसरे दिन दोनों देशों की तरफ से कोई हमला नहीं किया गया. अमेरिका ने ईरान पर अपने हमले रोक रखे हैं, वहीं तेहरान ने भी कहा है कि उसने जवाबी हमले नहीं किए हैं. इस बीच दोनों देशों को अंतरिम सीजफायर समझौते पर बातचीत के लिए वापस लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं.
अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के बाद अचानक हमले क्यों रोके हैं, इसकी वजह अभी साफ नहीं हुई है. व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते रहे हैं. हालांकि, अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट या अमेरिकी सहयोगियों के खिलाफ गतिविधियां जारी रखता है तो अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हैं.
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने रविवार को सरकारी टीवी से कहा कि पिछले दो दिनों से अमेरिका की तरफ से हमले नहीं हुए हैं और ईरान ने भी इस दौरान कोई हमला नहीं किया. इससे पहले ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की मेजबानी करने वाले देशों को निशाना बनाया था. जॉर्डन में एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई थी.
हमले रुकना 'पॉजिटिव सिग्नल'
मध्यस्थता की कोशिशों से जुड़े एक क्षेत्रीय अधिकारी ने दोनों देशों की तरफ से हमले रोके जाने को तनाव कम करने की दिशा में 'पॉजिटिव सिग्नल' बताया है. अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान दोनों अंतरिम सीजफायर समझौते पर वापस लौटना चाहते हैं. फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर समझौते का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है.
ईरान ने भी कहा है कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ओमान के साथ उसकी बातचीत जारी है और इसमें प्रगति हुई है. दूसरी तरफ अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान के खिलाफ दोबारा लागू की गई नौसैनिक नाकाबंदी जारी है.
ट्रंप से मिलेंगे नेतन्याहू
इस घटनाक्रम के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार(28 जुलाई) को वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. नेतन्याहू ने कहा कि वह ईरान को कमजोर करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के ट्रंप के प्रयासों का पूरी तरह समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बिना बड़े सैन्य संघर्ष की तरफ लौटे यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है. हालांकि, नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने दोबारा सीधे या अपने सहयोगी संगठनों के जरिए इजरायल पर हमला किया तो यह उसकी बड़ी गलती होगी.