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'मस्जिद से तकलीफ तो नजर फेर लो, खुन्नस मिटाने के लिए बुलडोजर एक्शन क्यों', सहारनपुर मामले में यूपी सरकार पर भड़के ओवैसी

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी अवैध घोषित मस्जिद को शनिवार तड़के प्रशासन ने चार बुलडोजर लगाकर ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के बाद सपा सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किया गया और असदुद्दीन ओवैसी समेत कई राजनीतिक नेताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है.

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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Photo-ITG)
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Photo-ITG)

Uttar Pradesh News: सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अवैध घोषित मस्जिद को शनिवार सुबह 4 बजे प्रशासन ने 4 बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया. इस ध्वस्तीकरण के विरोध में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ होती है. लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं. नजर फेरनी है तो फेर लो. लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चला सकते. 

मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन, देश में सियासी तूफान

आपको बता दें की सहारनपुर सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानने और जिला अदालत से मस्जिद कमेटी की फर्स्ट अपील खारिज होने के बाद यह कानूनी एक्शन लिया गया. इस कार्रवाई के दौरान परिसर में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात रही. हालांकि, इसको लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है. सपा और कांग्रेस के बाद अब AIMIM ने भी यूपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ऐसे मामलों में सरकार को नसीहत दी है. 

तड़के 4 बजे पहुंची टीम, 4 बुलडोजर से कार्रवाई

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार तड़के 4 बजे भारी पुलिस फोर्स के साथ प्रशासनिक टीम पहुंची. सुबह 6 बजे 4 बुलडोजरों की मदद से दीवारों को तोड़कर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई. बुलडोजर द्वारा मलबे को उठाकर नगर निगम की गाड़ियों में भरा गया. कलेक्ट्रेट के सभी प्रमुख गेट बंद कर बाहरी आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई.

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कानूनी विवाद और अदालत का आदेश

यह विवाद पिछले डेढ़ साल से चल रहा था. सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने 16 जुलाई को विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानकर मस्जिद को अवैध घोषित किया था और 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति लगाई थी. 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी थी.

सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण की सूचना पर कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने के लिए निकलीं. भारी पुलिस बल ने उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें जाने से रोक दिया. पुलिस ने जन्माष्टमी और देर रात का हवाला देकर निवेदन किया, जबकि सांसद ने इसे जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन बताया. इस दौरान पुलिस और सांसद के बीच तीखी बहस हुई.

ओवैसी का तीखा हमला और संवैधानिक सवाल

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर कार्रवाई का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज पेश कर इसे एक सदी से अधिक पुरानी बताया था, जो वक्फ बाय यूजर के तहत संरक्षित है. उन्होंने कहा कि राज्य का यह कदम मुसलमानों की धार्मिक आजादी पर सीधा हमला है और मस्जिद पहले बनी थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया.

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'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया'

बकौल ओवैसी- सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को आज सुबह ढहा दिया गया. क्या मुसलमानों के लिए अब मजहबी आजादी का संवैधानिक हक भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोज़र क्यों चलाया जाता है?

मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज अदालत में पेश करके यह साबित करने की कोशिश की कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी. एक सदी से भी ज़्यादा वक़्त से वहां लगातार नमाज होती रही है.  यानी यह कोई आज खड़ी कर दी गई इमारत नहीं है, बल्कि लंबे अरसे से एक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है.  यही वक़्फ़ बाय यूज़र की बुनियाद है, जिसे क़ानून में भी मान्यता मिली है. 

और Limitation Act का भी यही उसूल है कि हुकूमत किसी ज़मीन पर एक सदी से ज़्यादा पुरानी, खुलेआम और लगातार चली आ रही क़ब्ज़ेदारी को अचानक नज़रअंदाज़ करके एक दिन उठे और कहे कि अब यह ज़मीन हमारी है. 

जब एक सदी से ज़्यादा अरसे से खुला और लगातार क़ब्ज़ा रहा है, तो रियासत यह कैसे मान सकती है कि क़ब्ज़ा कल से शुरू हुआ था? हुकूमत की दलील को मान भी लें, तो इतने लंबे अरसे की क़ब्ज़ेदारी के बाद adverse possession का सवाल तो उठेगा ही. मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया. 

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रातभर चला राजनीतिक ड्रामा

शुक्रवार रात से ही ध्वस्तीकरण की आशंका को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने लाइव आकर अपनी बात रखी. सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन उन्हें गेट पर रोक दिया गया। बाद में नेताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात की.

सुरक्षा व्यवस्था पर डीआईजी का बयान

सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि अदालत से फर्स्ट अपील खारिज होने के बाद यह ध्वस्तीकरण किया गया है. त्योहारों के मद्देनजर कलेक्ट्रेट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और आरएएफ की 5 कंपनियां तैनात की गई हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर अफवाह या फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.

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