बिहार में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. जल संसाधन विभाग के 5 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, 5 जगह- मनेर, दीघा घाट, गांधी घाट, हाथीदह और मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है. बेगूसराय के मटिहानी में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच चुका है. बलहपुर और खोरमपुर पंचायतों में सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं. कई जगह हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोगों को आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.
पटना के गांधी घाट पर स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है. यहां गंगा का जलस्तर 50.43 मीटर पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है. यानी पानी सिर्फ 1.83 मीटर ऊपर है. गांधी घाट का अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर 50.52 मीटर है, जो 20 अगस्त 2016 में दर्ज किया गया था. मौजूदा हालात में पानी इस रिकॉर्ड से महज 9 सेंटीमीटर नीचे है, साथ ही जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
मनेर और हाथीदह में भी रिकॉर्ड के करीब
मनेर में गंगा 53.55 मीटर पर पहुंच गई है, जो खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर है. यहां का अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर 53.79 मीटर है. यानी अभी के रिकॉर्ड से सिर्फ 24 सेंटीमीटर नीचे.
वहीं हाथीदह में नदी 43.37 मीटर पर बह रही है. खतरे का निशान 41.76 मीटर है. यहां भी पानी अपने हाई फ्लड लेवल 43.52 मीटर से सिर्फ 15 सेंटीमीटर नीचे है.
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दीघा घाट और मुंगेर खतरे के निशान के ऊपर
दीघा घाट पर गंगा 51.77 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से 1.32 मीटर ऊपर है. हालांकि यहां पानी फिलहाल स्थिर है. इसका अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर 52.52 मीटर रहा है.
वहीं मुंगेर में गंगा 39.58 मीटर पर पहुंच गई है. खतरे का निशान 39.33 मीटर है, यानी नदी 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. यहां भी जलस्तर बढ़ रहा है.
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पटना से मुंगेर तक गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है. खासकर गांधी घाट, मनेर और हाथीदह में पानी जिस तरह पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंच रहा है, उसने हालात को और गंभीर बना दिया है.
बेगूसराय में सड़कें डूबीं, घरों में घुसा पानी
बेगूसराय के मटिहानी में भी बाढ़ के हालात बने हुए हैं. बलहपुर और खोरमपुर पंचायतों में ग्रामीण सड़कें पानी में डूब गई हैं.कई जगह दो से तीन फीट पानी सड़कों के ऊपर बह रहा है.
गांव के अंदर कई घरों में 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है. घर का सामान डूब चुका है और कई परिवार ऊंचे व सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं. नावों में लोग जरूरी सामान के साथ अपने मवेशियों को भी सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं.
गंगा का पानी अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो पटना से बेगूसराय और मुंगेर तक निचले इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. फिलहाल प्रभावित गांवों में नाव, राहत सामग्री, पीने का पानी, भोजन और मवेशियों के चारे की जरूरत सबसे बड़ी है.