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ऑफिस से पहले और बाद में चलाता है रैपिडो... राइडर की कहानी पढ़कर भावुक हुए लोग

दिल्ली-एनसीआर के एक रैपिडो राइडर की संघर्ष भरी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. वह सुबह ऑफिस जाने से पहले और शाम नौकरी खत्म होने के बाद रैपिडो चलाकर अपने परिवार का खर्च उठाता है. 20 हजार रुपये की नौकरी करने वाले इस शख्स का एक बच्चा जन्म से दिव्यांग है, जिसके इलाज पर हर महीने करीब 10 हजार रुपये खर्च होते हैं.

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सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतना संघर्ष करने के बावजूद उसके चेहरे पर निराशा नहीं थी. ( Photo:  ITG)
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतना संघर्ष करने के बावजूद उसके चेहरे पर निराशा नहीं थी. ( Photo: ITG)

हम में से ज्यादातर लोग ऑफिस का थोड़ा-सा काम बढ़ जाए, ट्रैफिक में फंस जाएं या नींद पूरी न हो, तो दिनभर शिकायत करते रहते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अपनी परेशानियों को दिल में दबाकर सिर्फ अपने परिवार की खुशियों के लिए हर दिन संघर्ष करते हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रैपिडो राइडर की कहानी लोगों की आंखें नम कर रही है और जिंदगी को देखने का नजरिया बदल रही है.

दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले X यूजर शिखर ने अपने साथ हुई एक मुलाकात शेयर की. उन्होंने बताया कि एक दिन उन्हें ऑफिस पहुंचने में देर हो रही थी, इसलिए उन्होंने मेट्रो की जगह रैपिडो बाइक टैक्सी बुक कर ली. राइडर कुछ ही मिनटों में पहुंच गया, लेकिन शिखर को नीचे आने में करीब पांच मिनट लग गए। इस दौरान राइडर ने उन्हें तीन बार फोन करके जल्दी आने के लिए कहा.

20 हजार की नौकरी, फिर भी चलानी पड़ती है रैपिडो
जब शिखर बाइक पर बैठे तो उन्होंने हंसते हुए पूछा, भाई, इतनी जल्दी किस बात की है? राइडर का जवाब सुनकर वह चौंक गए. उसने कहा- भैया, मुझे भी ऑफिस के लिए लेट हो रहा है. यह सुनकर शिखर को लगा कि शायद वह मजाक कर रहा है. लेकिन जब बातचीत आगे बढ़ी तो उसकी जिंदगी की सच्चाई सामने आई. राइडर ने बताया कि वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है, जहां उसे हर महीने करीब 20 हजार रुपये सैलरी मिलती है. लेकिन इतने पैसों से घर चलाना आसान नहीं है. उसके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं. सबसे बड़ी चिंता उसके उस बच्चे की है, जो जन्म से ही दिव्यांग है. बच्चे के इलाज और दवाइयों पर हर महीने लगभग 10 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं. ऐसे में घर का खर्च पूरा करने के लिए उसे दूसरी नौकरी की जरूरत पड़ी और उसने रैपिडो चलाना शुरू कर दिया.

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'पिछले 8 महीनों से 5 घंटे से ज्यादा नहीं सोया'
उसका डेली रुटीन किसी भी इंसान को सोचने पर मजबूर कर सकती है. वह रोज सुबह 6 बजे बाइक लेकर निकल जाता है और 9 बजे तक रैपिडो चलाता है. इसके बाद जल्दबाजी में तैयार होकर सुबह 10 बजे अपनी नौकरी पर पहुंचता है. शाम 6:30 बजे ऑफिस खत्म होने के बाद जब ज्यादातर लोग घर जाकर आराम करते हैं, तब वह फिर से सड़कों पर उतर जाता है. रात करीब 11 बजे तक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के बाद ही उसका दिन खत्म होता है. शिखर ने जब उससे पूछा कि इतनी भागदौड़ के बीच वह आखिर सोता कब है, तो राइडर हल्का-सा मुस्कुराया और बोला- पिछले 8 महीनों से 5 घंटे से ज्यादा नहीं सोया हूं. इसके बाद उसने एक ऐसी बात कही, जिसने शिखर का दिल छू लिया. उसने बिना किसी शिकायत के सिर्फ इतना कहा- अब भगवान की यही मर्जी है, तो यही सही. 

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतना संघर्ष करने के बावजूद उसके चेहरे पर निराशा नहीं थी. न उसने अपनी किस्मत को कोसा और न ही हालात की शिकायत की. वह मुस्कुराते हुए अपनी जिंदगी की कहानी सुना रहा था. शायद यही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी. इस मुलाकात के बाद शिखर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि जिन बातों को लेकर वे रोज शिकायत करते हैं, वे किसी और की. जिंदगी के मुकाबले कितनी छोटी हैं. उन्होंने लिखा कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी हर सांस जिम्मेदारियों के नाम कर देते हैं, लेकिन फिर भी चेहरे की मुस्कान नहीं खोते.

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'पिछले 8 महीनों से 5 घंटे से ज्यादा नहीं सोया'
यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई. हजारों लोगों ने रैपिडो राइडर के जज्बे को सलाम किया. किसी ने उसे असली हीरो बताया तो किसी ने लिखा कि परिवार के लिए की गई मेहनत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता. कई लोगों ने कहा कि यह कहानी याद दिलाती है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी लड़ाई छिपी हो सकती है, जिसका अंदाजा हमें कभी नहीं होता. यह कहानी सिर्फ एक रैपिडो राइडर की नहीं है. यह उन लाखों लोगों की कहानी है, जो हर दिन अपने परिवार की बेहतर जिंदगी के लिए अपनी नींद, आराम और इच्छाओं का त्याग कर देते हैं. ऐसे लोग हमें सिखाते हैं कि जिंदगी मुश्किल जरूर हो सकती है, लेकिन हिम्मत और जिम्मेदारी इंसान को हर हाल में आगे बढ़ने की ताकत देती है.

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