मेडागास्कर में एक मां अपनी डेढ़ साल की बच्ची को सीने से लगाए सो रही थी. रात के करीब 12 बजे थे. तभी तीन लोग घर में घुस आए. उन्होंने बच्ची के पिता पर हमला किया और फिर मां की गोद से बच्ची को छीनने लगे. मां ने कपड़े से बच्ची को अपनी पीठ पर बांध रखा था. वह उसे बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही थी.
हमलावरों ने धमकी दी, 'बच्ची को छोड़ दो, नहीं तो तुम्हें मार देंगे.' लेकिन मां ने पकड़ ढीली नहीं की. आखिरकार हमलावर बच्ची को छीनकर भाग निकले. मां उनके पीछे दौड़ी, मदद के लिए चिल्लाई, लेकिन कुछ दूर जाकर बेहोश होकर गिर पड़ी.
कुछ दिनों बाद बच्ची का सिर कटा शव एक तांत्रिक के घर से मिला. उसका सिर प्लास्टिक की थैलियों में लपेटकर दूसरे घर में रखे सूटकेस से बरामद हुआ.
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कहानी 32 साल की निकोल सोआलाला और उनकी 18 महीने की बेटी लैंड्रिसिया की है. बच्ची को एल्बिनिज्म था, जिसे आम बोलचाल में सफेद दाग या जन्मजात रंगहीनता से जोड़कर देखा जाता है. भारत में ऐसे बच्चों को सूरजमुखी भी कहा जाता है.
अफ्रीका के मेडागास्कर में कुछ लोगों की आंखें उनकी जान की दुश्मन बन गई हैं. यहां सफेद दाग और हल्के रंग की त्वचा वाले बच्चों को अगवा कर उनकी बेरहमी से हत्या की जा रही है. अंधविश्वास ऐसा कि लोगों को लगता है कि इनकी आंखों और शरीर के अंगों से दौलत, किस्मत और कामयाबी मिल सकती है. इस साल अब तक 13 लोगों की हत्या हो चुकी है. इनमें ज्यादातर बच्चे हैं.
हालांकि, यह त्वचा का सामान्य सफेद दाग नहीं, बल्कि एक आनुवंशिक स्थिति है. इसमें शरीर में मेलेनिन नाम का रंग बनाने वाला पिगमेंट कम बनता है. इसका असर त्वचा, बालों और आंखों पर पड़ता है. कई लोगों की नजर कमजोर होती है और धूप से त्वचा को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है.
आंखों के लिए क्यों हो रही हत्याएं?
मेडागास्कर में एल्बिनिज्म से प्रभावित लोगों को लेकर कई तरह के अंधविश्वास फैले हुए हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इनके शरीर के अंगों से बनी चीजें धन, अच्छी किस्मत और राजनीतिक सफलता दिला सकती हैं. खासतौर पर इनकी आंखों की मांग होने की बात सामने आई है.
बच्चों को इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि अंधविश्वास के मुताबिक उनकी मासूमियत से शरीर के अंगों से बनी चीजों का असर ज्यादा होगा. इसके अलावा छोटे बच्चों को अगवा करना भी अपेक्षाकृत आसान होता है.
इस साल अब तक ऐसे 13 लोगों की हत्या की जानकारी सामने आई है. सभी के सिर काटे गए. इनमें नौ महीने से लेकर 14 साल तक के बच्चे शामिल हैं. एल्बिनोस मेडागास्कर नाम के संगठन के मुताबिक, 2022 में बने इस संगठन के रिकॉर्ड में यह हत्याओं का सबसे खतरनाक साल है.
संगठन के अध्यक्ष फुलजेंस सोजा खुद एल्बिनिज्म से प्रभावित हैं. उनका कहना है कि हालात बेहद गंभीर हैं और लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे.
गरीबी और अंधविश्वास के बीच खतरनाक धंधा
मेडागास्कर दुनिया के गरीब देशों में शामिल है. यहां करीब 80 फीसदी आबादी रोजाना 2.15 डॉलर से कम पर गुजारा करती है. देश लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है. सूखा, बाढ़ और चक्रवात जैसी घटनाएं लोगों की जिंदगी और रोजगार पर असर डालती हैं.
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार सलाहकार सबीना लॉबर का मानना है कि बदतर होते हालात और जीवन की मुश्किलें लोगों को ऐसी खतरनाक मान्यताओं की तरफ धकेल रही हैं.इन हत्याओं के पीछे सिर्फ अंधविश्वास नहीं, बल्कि पैसे का बड़ा खेल भी बताया जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की हत्या कर उनके अंग हासिल करने के लिए लोगों को बड़ी रकम दी जाती है. कई मामलों में पूरा नेटवर्क काम करता है. कुछ मानवाधिकार विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि कीमती पत्थरों और सोने की खदानों के आसपास ऐसे हमलों के मामले सामने आए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी तोहोवेरी रजाकामानाना के मुताबिक, पहले ये घटनाएं देश के दक्षिणी हिस्सों तक सीमित थीं, लेकिन अब उत्तर और दूसरे इलाकों में भी सामने आ रही हैं.
14 साल के बच्चे की हत्या, बहन ने आंखों के सामने देखी
मेडागास्कर के उत्तरी हिस्से में रहने वाली 20 साल की ओडेट भी एल्बिनिज्म से प्रभावित हैं. उनकी नजर कमजोर है और धूप में त्वचा जलने लगती है. फरवरी में उनके 14 साल के चचेरे भाई मार्सेलिन की हत्या कर दी गई. उसका सिर काट दिया गया और शव घर के सामने आम के पेड़ के नीचे छोड़ दिया गया. उसका सिर अब तक नहीं मिला है.
ओडेट का तीन साल का बेटा है. वह खेतों में काम करके और छोटे-मोटे कामों से रोज करीब 3,000 एरियारी यानी लगभग 50 पैसे कमाती हैं. हमले के डर से उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और अब करीब एक दर्जन लोगों के साथ एक छोटी-सी झोपड़ी में रहती हैं. वह कहती हैं कि उन्हें डर है कि कोई भी रात में आकर उनकी हत्या कर सकता है.
एक दूसरे गांव में नौ साल की वेरोलिन और उसका छोटा भाई भी इसी डर में जी रहे हैं. दोनों को एल्बिनिज्म है. मई में उनके 14 साल के भाई राकोटोम्बेलो की हत्या कर दी गई थी. हमलावर उसे घर से उठाकर ले गए और उसका सिर काट दिया.
अब दोनों बच्चे गांव के मेयर की सुरक्षा में रह रहे हैं. उनकी निगरानी के लिए तीन सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. इनमें से एक के पास बंदूक है. गांव के मेयर का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है.
सरकार ने बढ़ाई सुरक्षा, लेकिन डर बरकरार
लगातार हो रही हत्याओं के बाद मेडागास्कर सरकार ने आरोपियों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बढ़ाई है. राष्ट्रपति ने अपने निजी सुरक्षा दस्ते को भी आरोपियों की तलाश में लगाया है. देश की प्रथम महिला ने दक्षिणी हिस्से में एल्बिनिज्म से प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय केंद्र खोलने का वादा किया है.
हालांकि, आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद लोगों का डर कम नहीं हुआ है. लैंड्रिसिया के मामले में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. परिवार की ओर से कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
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संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय संगठन सरकार से राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने की मांग कर रहे हैं. इसमें सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर देने की बात कही गई है. साथ ही एल्बिनिज्म से प्रभावित लोगों की सही संख्या जानने के लिए देशव्यापी गणना और जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई है.
लैंड्रिसिया की मां आज भी अपनी बच्ची को याद कर रो पड़ती हैं. उनकी एक और छोटी बेटी को भी एल्बिनिज्म है. वह अक्सर पूछती है कि उसकी छोटी बहन कहां है. मां उसे सच बताती हैं कि वह अब इस दुनिया में नहीं है.
बेटी को खोने के बाद निकोल ने काम पर जाना लगभग बंद कर दिया है. परिवार अब उनके पति की रिक्शा चलाकर होने वाली रोजाना करीब 6,000 एरियारी की कमाई पर निर्भर है. निकोल कहती हैं कि उन्हें रात में नींद नहीं आती. उन्हें डर है कि कहीं उनकी बची हुई बच्ची को भी कोई अगवा न कर ले.
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जिस त्वचा और आंखों के रंग को लेकर इन बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है, वह कोई बीमारी नहीं जिसे अंधविश्वास से जोड़ा जाए. यह एक आनुवंशिक स्थिति है. लेकिन मेडागास्कर में इसी गलतफहमी और लालच ने कई परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी है. यहां बच्चों को बचाने की लड़ाई अब सिर्फ उनके परिवारों की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी बन गई है.