ईरान में महिलाओं के कपड़ों को लेकर सख्ती एक बार फिर चर्चा में है. उत्तरी ईरान के अमोल शहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें बस स्टॉप पर शॉर्ट्स पहनकर बैठी एक महिला को पहले एक दूसरी महिला डांटती-फटकारती नजर आती है. मामला यहीं नहीं रुका. कुछ देर बाद मॉरल पुलिस वहां पहुंची और महिला को अपने पैरों को ढकने के लिए पैंट दे दी. पुलिस ने इसके साथ उसे सिर पर हिजाब पहनने का आदेश भी दिया.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल वीडियो में एक महिला शॉर्ट्स पहनी युवती पर गुस्सा करती दिखाई देती है. वह उससे कहती है कि इस तरह के कपड़े पहनकर बाहर निकलना ठीक नहीं है. वह युवती को वहां से जाने के लिए भी कहती है. युवती इसका विरोध करती है और उसे अकेला छोड़ने के लिए कहती है, लेकिन महिला उसका पीछा करती रहती है और कपड़ों को लेकर उसे खरी-खोटी सुनाती है.
इसी बीच मॉरल पुलिस के अधिकारी वहां पहुंचते हैं. पुलिसकर्मी युवती को पैर ढकने के लिए एक पैंट देते हैं और उससे कहते हैं कि इसे पहन लो. इतना ही नहीं, एक अधिकारी उसे सिर पर स्कार्फ यानी हिजाब पहनने के लिए भी कहता है.
वीडियो कब का है, इसकी सटीक जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान में महिलाओं के अनिवार्य हिजाब को लेकर निगरानी और कार्रवाई फिर बढ़ने की खबरें आ रही हैं. हाल की रिपोर्टों में मॉरल पेट्रोलिंग के दोबारा सक्रिय होने, लोगों को कपड़ों को लेकर रोकने और कुछ मामलों में पुलिस वैन में ले जाने की बात सामने आई है.
सिर्फ कपड़े देना ही काम नहीं, कई तरह से होती है निगरानी
ईरान की मॉरल पुलिस या हिजाब लागू कराने वाली पुलिस व्यवस्था का काम सिर्फ सड़क पर किसी महिला को कपड़े पहनने के लिए कहना भर नहीं है. अधिकारियों की कार्रवाई में चेतावनी देना, रोककर पूछताछ करना, हिरासत में लेना और कुछ मामलों में पुलिस वाहन में ले जाना भी शामिल रहा है.
हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ जगहों पर सादे कपड़ों में अधिकारी भी महिलाओं के पहनावे पर नजर रखते हैं. लोगों की तस्वीरें लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. महिलाओं पर नजर रखने के लिए पुलिस सिर्फ गश्त पर निर्भर नहीं है. ईरान में निगरानी कैमरों, चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक और दूसरे डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की भी रिपोर्ट सामने आई है.
आम लोगों को भी महिलाओं के हिजाब को लेकर शिकायत करने के लिए एक रिपोर्टिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. हिजाब नियमों का असर सिर्फ सड़क पर चल रही महिलाओं तक सीमित नहीं रहा है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त करना और कारोबार बंद कराना, जैसी कार्रवाई भी हुई है. कुछ मामलों में बिना हिजाब महिलाओं के साथ यात्रा कर रहे वाहनों पर भी ट्रैफिक कार्रवाई की गई है.
यानी किसी महिला के कपड़ों का मामला सिर्फ उसे मौके पर रोकने तक सीमित नहीं रहता. कार्रवाई आगे बढ़कर उसके वाहन, काम और रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंच सकती है.
कैफे-रेस्टोरेंट भी पुलिस की नजर में
ईरान में हिजाब नियमों को लेकर कार्रवाई का दायरा दुकानों, कैफे और रेस्टोरेंट तक भी पहुंच गया है. हाल के महीनों में ऐसे कई कारोबार बंद किए गए हैं जिन पर हिजाब या दूसरे कथित सामाजिक नियमों का पालन नहीं कराने का आरोप लगा. कुछ जगहों पर अधिकारियों ने कैफे और दूसरे व्यवसायों की निगरानी बढ़ाने की बात कही है.
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, कारोबारों पर कार्रवाई के साथ जुर्माना, लाइसेंस से जुड़ी पाबंदियां और बंद कराने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. यानी नियम सिर्फ महिला पर नहीं, बल्कि उस जगह के मालिक और संचालक पर भी असर डाल सकते हैं.
महसा अमीनी की मौत के बाद दुनिया का ध्यान गया
ईरान के अनिवार्य हिजाब कानून पर दुनिया का ध्यान खास तौर पर महसा अमीनी की मौत के बाद गया. 22 साल की अमीनी को 2022 में कथित तौर पर हिजाब सही तरीके से नहीं पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. हिरासत में उसकी मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' आंदोलन ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं.
इसके बाद भी ईरान में हिजाब को लेकर सरकारी सख्ती पूरी तरह खत्म नहीं हुई. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अधिकारियों ने अनिवार्य हिजाब लागू कराने के लिए मुकदमे, वाहन जब्ती, कारोबार बंद करने और डिजिटल निगरानी जैसे कदम उठाए हैं.
कानून में क्या है?
ईरान में सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के लिए हिजाब अनिवार्य है. हाल के वर्षों में प्रस्तावित 'हिजाब एंड चैस्टिटी' कानून में नियम तोड़ने वालों के लिए जुर्माना, यात्रा पर रोक और कुछ मामलों में जेल जैसी कड़ी सजा का प्रावधान बताया गया है. हालांकि कानून को लेकर इसकी लागू स्थिति और अलग-अलग प्रावधानों पर लगातार बदलाव और बहस होती रही है.
यही वजह है कि अमोल का यह वीडियो सिर्फ एक महिला को पैंट दिए जाने की घटना नहीं है. यह दिखाता है कि ईरान में सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के पहनावे को लेकर निगरानी किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है.
बस स्टॉप पर बैठी महिला के कपड़ों पर पहले राहगीर ने आपत्ति जताई और फिर पुलिस ने उसे पैर ढकने के लिए कपड़े दिए और हिजाब पहनने का निर्देश दिया. यानी वहां कपड़े पहनना भी कानून और पुलिस कार्रवाई का मामला बन सकता है.