क्या सिर्फ एक आईडी कार्ड बदलकर नाबालिग बच्चे गेमिंग के सख्त नियमों को तोड़ सकते हैं? चीन में सामने आए एक मामले ने यही सवाल खड़ा कर दिया है. बेटे की गेमिंग की लत से परेशान एक पिता ने आरोप लगाया है कि बड़ी गेमिंग कंपनियों ने पहचान की सही जांच नहीं की, इसलिए उनका बेटा आसानी से किसी और की आईडी से अकाउंट बनाकर घंटों गेम खेलता रहा. अब यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया है. आपको बता दें कि दरअसल, चीन में नाबालिगों के लिए गेम खेलने के सख्त नियम हैं. वहां 18 साल से कम उम्र के बच्चे सिर्फ शुक्रवार, शनिवार, रविवार और सरकारी छुट्टियों के दिन रात 8 बजे से 9 बजे तक ही ऑनलाइन गेम खेल सकते हैं.
चीनी पिता ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के खिलाफ ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. उन्होंने सिर्फ 10 युआन (करीब 1.5 अमेरिकी डॉलर) के सांकेतिक मुआवजा की मांग करते हुए चार बड़ी गेमिंग कंपनियों पर मुकदमा दायर किया है. उनका कहना है कि उनका मकसद पैसे कमाना नहीं, बल्कि बच्चों को गेमिंग की लत से बचाने के लिए कंपनियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराना है.
कहां का है मामला?
यह मामला चीन के हेनान प्रांत का है. यहां रहने वाले एक पिता, जिनका सरनेम किन है, ने अपने 18 साल के बेटे की हालत देखने के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 23 मई की शाम उनके बेटे ने एक साथ बुखार की 18 गोलियां खा लीं. कुछ ही घंटों बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई. उसे तेज उल्टियां होने लगीं और वह बेहोश होकर गिर पड़ा. परिवार तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसे दवा का जहर (ड्रग पॉइजनिंग) हो गया है.
इलाज के बाद लड़का ठीक होकर घर लौट आया, लेकिन उसने अब तक यह नहीं बताया कि उसने इतनी सारी गोलियां क्यों खाई थीं. हैरानी की बात यह भी थी कि उसे बुखार था ही नहीं।
पिता को गेमिंग की लत पर हुआ शक
किन का मानना है कि उनका बेटा लंबे समय से ऑनलाइन गेम खेलने का आदी हो चुका था. उन्हें शक है कि लगातार गेम खेलने, मानसिक दबाव या थकान की वजह से उसने ऐसा कदम उठाया होगा. इस घटना के बाद उन्होंने अपने बेटे की गेमिंग की आदतों पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया.
कई सालों से घंटों खेलता था गेम
पिता के मुताबिक, उनका बेटा एक वोकेशनल स्कूल में पढ़ता है और कई सालों से मोबाइल गेम्स में डूबा हुआ था. जब भी वह वीकेंड पर घर आता, तो लगभग पूरा दिन बिस्तर पर लेटकर गेम खेलता रहता था. कई बार वह रात 3 से 4 बजे तक जागता रहता और उसके बाद सोता था. लगातार देर रात तक जागने और अस्वस्थ जीवनशैली का असर उसकी सेहत पर भी पड़ा। पिता का कहना है कि इस दौरान बेटे का करीब 10 किलो वजन कम हो गया.
पिता ने गेमिंग प्लेटफॉर्म का रिकॉर्ड भी देखा. उसमें पता चला कि मार्च 2024 से अब तक उनका बेटा कुल 1,868 घंटे गेम खेल चुका है. यानी औसतन हर दिन दो घंटे से ज्यादा समय सिर्फ गेमिंग में बीत रहा था. किन ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को मोबाइल इसलिए दिलाया था ताकि वह उनसे संपर्क में रह सके, क्योंकि वे दूसरे शहर में काम करते हैं. लेकिन वही मोबाइल धीरे-धीरे उसकी गेमिंग की लत का कारण बन गया.
बहन के पहचान पत्र से बनाया अकाउंट
जांच में यह भी सामने आया कि लड़के ने अपनी बड़ी बहन के पहचान पत्र (आईडी कार्ड) का इस्तेमाल करके गेमिंग अकाउंट बनाया था. किन का आरोप है कि गेमिंग कंपनियों ने सही तरीके से पहचान की जांच नहीं की. उनका कहना है कि कंपनियों के पास फेस रिकग्निशन जैसी आधुनिक तकनीक मौजूद है, फिर भी उनके बेटे ने किसी और की पहचान का इस्तेमाल करके आसानी से अकाउंट बना लिया.
चार बड़ी कंपनियों पर मुकदमा
इसी वजह से किन ने चीन की चार बड़ी गेमिंग कंपनियों टेनसेंट, नेटईज, मीहोयो और 37 इंटरएक्टिव एंटरटेनमेंट के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है. उन्होंने केवल 10 युआन का सांकेतिक मुआवजा मांगा है. उनका कहना है कि असली मकसद पैसे लेना नहीं, बल्कि अदालत से यह सुनिश्चित कराना है कि गेमिंग कंपनियां नाबालिगों को गेम की लत से बचाने के लिए अपने नियमों का सही तरीके से पालन करें. उन्होंने यह भी मांग की है कि इस मामले की सुनवाई सार्वजनिक रूप से हो, ताकि गेमिंग इंडस्ट्री की कमियों पर खुलकर चर्चा हो सके.
फिलहाल टल गई सुनवाई
इस मामले की पहली सुनवाई 6 जुलाई को होनी थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल इसे टाल दिया है. चारों कंपनियों ने अदालत के अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि सभी कंपनियां अलग-अलग शहरों में स्थित हैं. इसी वजह से सुनवाई आगे बढ़ा दी गई.
पिता का कहना है कि वह अपने बेटे और दूसरे बच्चों के भविष्य के लिए यह कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा- मैं अपने बेटे के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करूंगा. आज की पीढ़ी पर ऑनलाइन गेम्स का बहुत गहरा असर पड़ रहा है. अगर मैं अपने बच्चे के लिए आवाज नहीं उठाऊंगा, तो मैं एक जिम्मेदार पिता नहीं कहलाऊंगा.
सोशल मीडिया पर लोगों का मिला समर्थन
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है. कई लोगों ने पिता के कदम का समर्थन किया है. एक यूजर ने लिखा- गेमिंग कंपनियां अक्सर कम उम्र के खिलाड़ियों की पहचान को नजरअंदाज कर देती हैं. ऐसे मामलों पर सख्ती जरूरी है.
वहीं, दूसरे यूजर ने कहा- उम्मीद है कि यह पिता केस जीतेंगे. इससे गेमिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और वे नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए अपने नियमों को और मजबूत करेंगी. यह मामला अब सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं रह गया है, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की सुरक्षा और कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर चीन में एक बड़ी बहस का विषय बन चुका है.