अमेरिका में एक ऐसा शहर है, जहां कभी हजारों लोगों की भीड़ रहती थी. सड़कें लोगों से गुलजार रहती थीं, दर्जनों बार और होटल चलते थे और सोने की तलाश में दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते थे. लेकिन आज यहां सन्नाटा पसरा है. सड़कें खाली हैं, घर वीरान पड़े हैं और पुरानी गाड़ियां जंग खा रही हैं. यह जगह अब भूतिया शहर यानी घोस्ट टाउन के नाम से मशहूर है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां आने वाले पर्यटकों को एक अजीब चेतावनी दी जाती है- शहर से कोई सामान उठाकर अपने साथ मत ले जाना. कहा जाता है कि अगर किसी ने यहां से कोई पत्थर, बोतल, कील तक भी चोरी की, तो उसके साथ बुरा होना शुरू हो जाता है. इसे 'बोडी कर्स' यानी बोडी का श्राप कहा जाता है.
कहा जाता है कि इस श्राप की वजह से कुछ लोग चोरी की गई चीजें वापस भेज चुके हैं और साथ में माफी की चिट्ठी भी लिखी. किसी ने बीमारी का जिम्मेदार इसे बताया, तो किसी ने नौकरी जाने और कार दुर्घटना जैसी बदकिस्मती का.
सोने की तलाश में बसा था पूरा शहर
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलिफोर्निया की सिएरा नेवादा पहाड़ियों में मौजूद बोडी की कहानी साल 1859 से शुरू होती है. इसी साल सोने की तलाश में निकले खोजकर्ताओं ने यहां सोने का बड़ा भंडार खोजा. इनमें विलियम एस. बोडी नाम का एक व्यक्ति भी था.
जिस शख्स के नाम पर आगे चलकर पूरा शहर बसा. वह खुद कभी उस शहर को देख भी नहीं पाया. उसी साल नवंबर में सामान लेने की यात्रा से लौटते वक्त बर्फीले तूफान में उसकी मौत हो गई.
कहानी में एक और दिलचस्प मोड़ है. बताया जाता है कि उसके नाम की स्पेलिंग गलत लिखे जाने की वजह से शहर का नाम 'Bodie' पड़ गया और यही नाम हमेशा के लिए चल पड़ा.
कुछ ही साल में पहुंची हजारों लोगों की भीड़
शुरुआत में बोडी एक छोटा-सा माइनिंग कैंप था. लेकिन 1876 में स्टैंडर्ड कंपनी को यहां सोने वाला अयस्क मिला. इसके बाद सोने की तलाश में लोगों की भीड़ यहां पहुंचने लगी.
1879 तक बोडी की आबादी करीब 7,000 से 10,000 तक पहुंच गई थी. शहर में करीब 2,000 इमारतें थीं. इसकी मुख्य सड़क करीब एक मील लंबी थी और यहां कारोबार खूब चलता था.
कभी इस सड़क पर करीब 65 सैलून होने की बात कही जाती है. लेकिन शहर जितना अमीर हुआ, उतना ही बदनाम भी होता गया. हत्या, गोलीबारी, शराब के नशे में झगड़े और स्टेजकोच लूटने जैसी घटनाएं यहां आम होने लगी थीं.
फिर अचानक उजड़ने लगा शहर
बोडी की चमक ज्यादा दिनों तक नहीं रही. 1880 के दशक से ही खदानों से जुड़े लोग बेहतर मौके की तलाश में दूसरी जगह जाने लगे. सोने का उत्पादन घटा तो शहर की कमाई भी कम होने लगी.
इसके बाद आग, कड़ाके की ठंड और लगातार घटते मुनाफे ने बोडी को और कमजोर कर दिया. 1932 में लगी एक बड़ी आग ने शहर के कारोबारी इलाके का बड़ा हिस्सा तबाह कर दिया.
फिर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सरकार ने गैर-जरूरी सोने की खदानों को बंद करने का आदेश दिया. बोडी की आखिरी खदान भी 1942 में बंद हो गई. इसके बाद शहर लगभग पूरी तरह वीरान हो गया.
घरों में आज भी रखा है पुराना सामान
आज बोडी को उसी हालत में बचाकर रखा गया है. जैसी हालत में लोग इसे छोड़कर गए थे. 1962 में इसे स्टेट हिस्टोरिक पार्क का दर्जा मिला. इसे 'अरेस्टेड डिके' यानी ऐसी स्थिति में संरक्षित किया गया है, जहां पुरानी इमारतों को उनकी मौजूदा हालत में बचाया जाता है, लेकिन उन्हें नया बनाकर चमकाया नहीं जाता.
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यही वजह है कि यहां घूमते समय ऐसा लगता है जैसे लोग अचानक अपना घर छोड़कर चले गए हों. पुराने घरों में फर्नीचर रखा है, दुकानों और कमरों में सामान मौजूद है और कई जगह धूल से ढकी प्लेटें तक दिखाई देती हैं.
और फिर शुरू हुई 'श्राप' की कहानी
बोडी की वीरानी के साथ-साथ यहां भूतों और आत्माओं की कहानियां भी मशहूर हो गईं. ऐसी ही एक स्थानीय कहानी के मुताबिक, बोडी की लकड़ी से बनी मेथोडिस्ट चर्च में कुछ लोग आग से बचने के लिए छिपे थे. तभी उन्होंने आग की लपटों के बीच विलियम बोडी की आत्मा को चलते देखा.
कहानी के मुताबिक, उसकी आत्मा ने चेतावनी दी-'मेरी चीजों को मत छूना.' यहीं से आगे चलकर बोडी के श्राप की कहानी और मजबूत होती गई.
चोरी की चीज वापस करने लगे पर्यटक
बोडी के पार्क कर्मचारियों का कहना है कि कई बार उन्हें ऐसी चीजें डाक से वापस मिली हैं, जिन्हें पर्यटक यहां से ले गए थे. इनमें पत्थर, बोतलें और कील जैसी छोटी-छोटी चीजें शामिल थीं.
दिलचस्प बात यह है कि इनके साथ कई बार माफी मांगने वाली चिट्ठियां भी भेजी गईं. कुछ लोगों ने दावा किया कि बोडी से चीज ले जाने के बाद उनकी जिंदगी में बुरी घटनाएं होने लगीं. किसी ने बीमारी, किसी ने नौकरी जाने और किसी ने कार दुर्घटना जैसी घटनाओं को 'बोडी कर्स' से जोड़ दिया.
एक पर्यटक ने तो अपनी चिट्ठी में लिखा कि वह पत्थरों को वापस भेज रहा है क्योंकि उन्हें ले जाने के बाद उसकी किस्मत लगातार खराब रही.
लेकिन क्या सच में है कोई श्राप?
इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बोडी का श्राप शायद असली भूतिया शक्ति नहीं, बल्कि लोगों को चोरी से रोकने के लिए बनाई गई कहानी थी. पार्क के एक इंटरप्रेटर के मुताबिक, श्राप की कहानी को एक रेंजर ने कथित तौर पर इस मकसद से बढ़ावा दिया था कि पर्यटक शहर से पुरानी चीजें उठाकर न ले जाएं.
यानी लोगों को डराने के लिए बनाई गई कहानी इतनी मशहूर हो गई कि आज भी पर्यटक यहां से कोई चीज उठाने से पहले कई बार सोचते हैं. बताया तो यहां तक जाता है कि एक पर्यटक ने कभी बोडी से पूरा पियानो ही उठाकर ले जाने की कोशिश की थी.
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आज बोडी में न पहले जैसी भीड़ है, न सैलून की आवाजें और न सोने की तलाश में दौड़ते हजारों लोग. लेकिन इसकी वीरान गलियां, खाली घर और 'श्राप' की कहानी इसे अमेरिका के सबसे रहस्यमय घोस्ट टाउन में शामिल कर देती हैं. यहां की सबसे बड़ी सीख शायद यही है- यहां से कोई चीज यादगार के तौर पर उठाकर ले जाना भले आसान हो, लेकिन उसे वापस करने के लिए माफी की चिट्ठी लिखने की नौबत न आए, इसलिए पर्यटक दूर से ही चीजों को देखते हैं.