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70 की उम्र, 8 KM पैदल और 150 रुपये की कमाई... समीर काका की कहानी वायरल

उम्र 70 साल, पैरों में तकलीफ और रोज 8 किलोमीटर का सफर... कोलकाता के समीर काका परिवार का पेट पालने के लिए घंटों गुब्बारे बेचते हैं.

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कोलकाता के ठाकुरपुकुर में रहने वाले 70 साल के समीर काका की है. (Photos: storiesbyaradhana/instagram)
कोलकाता के ठाकुरपुकुर में रहने वाले 70 साल के समीर काका की है. (Photos: storiesbyaradhana/instagram)

70 साल की उम्र जिंदगी का वह पड़ाव होता है, जब इंसान जिंदगी की भागदौड़ से थोड़ा सुस्ताना चाहता है. सालों की मेहनत के बाद यह उम्र आराम करने, परिवार के साथ वक्त बिताने और अपनी जिंदगी को सुकून से जीने की होती है. लेकिन हर किसी की कहानी ऐसी नहीं होती. कुछ लोगों के लिए उम्र का यह पड़ाव भी संघर्ष से भरा होता है. पेट पालने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्हें हर सुबह फिर काम पर निकलना पड़ता है.ऐसी ही कहानी कोलकाता के ठाकुरपुकुर में रहने वाले 70 साल के समीर काका की है.

समीर काका रोज अपने घर से उस जगह तक करीब 4 किलोमीटर पैदल जाते हैं, जहां वह गुब्बारे बेचते हैं. वहां पहुंचने के बाद भी उनकी मेहनत खत्म नहीं होती. वह 6 घंटे से ज्यादा समय तक ग्राहकों का इंतजार करते हैं. सड़क से गुजरने वाला कोई व्यक्ति रुक जाए और एक गुब्बारा खरीद ले, इसी उम्मीद में उनकी नजरें लगातार ग्राहकों को तलाशती रहती हैं.फिर दिन ढलने के बाद वही 4 किलोमीटर का रास्ता उन्हें पैदल तय करके वापस घर लौटना होता है. यानी हर दिन करीब 8 किलोमीटर का सफर, घंटों इंतजार और बदले में करीब 150 रुपये की कमाई.

कोलकाता की सड़कों पर रंग-बिरंगे गुब्बारों का गुच्छा लिए समीर काका आपको आसानी से नजर आ सकते हैं. लेकिन उन गुब्बारों के पीछे छिपी उनकी जिंदगी की कहानी शायद पहली नजर में दिखाई नहीं देती.

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समीर काका पिछले 26 साल से गुब्बारे बेच रहे हैं. इतने लंबे वक्त में उनकी जिंदगी ने कई मुश्किलें देखी हैं. कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक आया था. इसके बाद वह कई वर्षों तक लकवे से जूझते रहे. उनकी गर्दन भी ठीक तरह से सीधी नहीं हो पाती.

देखें वीडियो

इसके अलावा उनके पैरों में त्वचा की गंभीर बीमारी है. इसकी वजह से चलना उनके लिए दर्दनाक और मुश्किल हो जाता है. बावजूद इसके, वह हर सुबह अपने गुब्बारों का गुच्छा उठाते हैं और उसी रास्ते पर निकल पड़ते हैं.

क्यों?

क्योंकि उनके पीछे एक परिवार है.समीर काका अपने पांच सदस्यों के परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य हैं. ऐसे में उनकी करीब 150 रुपये की रोज की कमाई मामूली जरूर लग सकती है, लेकिन उनके परिवार के लिए यही कमाई जरूरी सहारा है.

उनकी कहानी Instagram पर क्रिएटर अराधना चटर्जी के वीडियो के जरिए सामने आई. अराधना ने बताया कि उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति को सड़कों पर धीरे-धीरे चलते और लंगड़ाते हुए देखा. उनके हाथों में गुब्बारे थे और वह लगातार ग्राहकों को तलाश रहे थे.

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दूर से देखने पर यह कोलकाता की सड़कों की एक आम तस्वीर लग सकती थी. लेकिन अराधना ने जब उनकी कहानी जानी, तो उसे कैमरे में रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया.

वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने अराधना की तारीफ की. लोगों ने कहा कि उन्होंने समीर जैसे लोगों की जिंदगी और उनके रोजमर्रा के संघर्ष को सामने लाने का काम किया.

लेकिन समीर काका के लिए शायद यह कोई कहानी नहीं, बल्कि रोज की जिंदगी है.अगली सुबह फिर गुब्बारे लेकर निकलना है. फिर 4 किलोमीटर पैदल चलना है. फिर घंटों ग्राहकों का इंतजार करना है. और दिन खत्म होने पर 4 किलोमीटर पैदल घर लौटना है.बस उम्मीद यही रहती है कि आज कुछ और गुब्बारे बिक जाएं.

उम्र 70 साल है, कदमों में तकलीफ है, रास्ता मुश्किल है... लेकिन परिवार की जिम्मेदारी के आगे समीर काका का सफर अब भी जारी है.

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