दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP के संसद चलो मार्च के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी चार दिन बाद शुक्रवार को लेडी हार्डिंग अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर लौट गए. उनके चेहरे और गर्दन से सर्जरी के जरिए पैलेट निकाले गए थे. अस्पताल से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. उनकी बाईं आंख अब भी लाल थी और माथे, गाल तथा नाक पर घाव भरने के निशान मौजूद थे. 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने विज्ञान विषय से स्नातक करने के बाद एमबीए किया और वर्ष 2022 में नौकरी के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पहुंचे. वह गुरुग्राम में रहकर एक निजी कंपनी में अकाउंट्स मैनेजर के तौर पर काम करते हैं.
मंसूरी ने बताया कि 20 जुलाई को वह CJP के संसद चलो मार्च में शामिल हुए थे. उनके अनुसार जब प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ रहे थे तो पुलिस ने इनर सर्किल के पास उन्हें रोक दिया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी हाथ उठाकर पुलिस से कह रहे थे कि वो सिर्फ प्रदर्शन कर रहे हैं. मंसूरी के मुताबिक, इसी दौरान अचानक उनके चेहरे पर कोई चीज आकर लगी. उन्होंने बताया कि वह उनकी बाईं भौंह से टकराई और कई टुकड़ों में बिखर गई. इसके बाद कई धातु के टुकड़े उनके चेहरे के अलग-अलग हिस्सों में धंस गए. एक टुकड़ा उनकी ठुड्डी पर भी लगा.
चार दिन बाद अस्पताल से घर लौटे शेख इरशाद मंसूरी
घायल होने के बाद साथी प्रदर्शनकारी उन्हें तुरंत लेडी हार्डिंग अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने पहले खून बहना रोका और फिर जांच की. मंसूरी के अनुसार डॉक्टरों ने बताया कि तीन पैलेट उनके चेहरे और गर्दन में बेहद संवेदनशील स्थानों पर फंसे हुए थे. एक पैलेट गर्दन में एक प्रमुख नस और रक्त वाहिका के पास था. दूसरा बाईं आंख की मांसपेशी के करीब था, जबकि तीसरा नाक के पास चेहरे के भीतर फंसा हुआ था. डॉक्टरों ने तत्काल सर्जरी की सलाह दी. एक रात तक स्थिति स्थिर रखने के बाद अगले दिन उनका ऑपरेशन किया गया. मंसूरी ने बताया कि सर्जरी के दौरान उनके चेहरे और गर्दन से सभी पैलेट निकाल दिए गए. उन्होंने कहा कि अभी भी उनकी गर्दन, आंख और मुंह के अंदर टांके लगे हुए हैं. उनकी आंख की रोशनी सामान्य है, लेकिन सर्जरी के कारण आंख अभी भी लाल है.
इस बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया है. वहीं उस दिन तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की रैपिड एक्शन फोर्स की तरफ से कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया गया. मिली जानकारी के अनुसार पैलेट गन से ऐसे कारतूस दागे जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में धातु या रबर के पैलेट होते हैं. मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार इसे न्यूनतम निर्धारित दूरी से चलाया जाता है और निशाना कमर के नीचे रखने का प्रावधान होता है.
इस प्रदर्शन में घायल होने वाले मंसूरी अकेले नहीं हैं. उनके साथ 10 वर्षीय साहिल लोछाब भी घायल हुए थे. नजफगढ़ निवासी साहिल की दाहिनी आंख में पैलेट लगा था. इसके अलावा उनके चेहरे, गर्दन, सीने, कंधे और हाथ पर भी चोटें आईं. पहले उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया. पैलेट लगने से उनकी आंख की कॉर्निया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और फिलहाल वह उस आंख से देख नहीं पा रहे हैं. उनकी एक सर्जरी हो चुकी है और दूसरी सर्जरी की भी संभावना बताई गई है.
20 जून से जंतर-मंतर पर जारी है CJP का आंदोलन
वहीं राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती 21 वर्षीय साक्षी की हालत में भी सुधार हुआ है. जंतर-मंतर और टॉलस्टॉय मार्ग के पास भगदड़ जैसी स्थिति में गंभीर रूप से घायल हुई साक्षी को अब वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया है. बता दें, यह मार्च CJP द्वारा 20 जून से जंतर-मंतर पर चलाए जा रहे आंदोलन का हिस्सा था. संगठन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है.