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महोबा

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महोबा (Mahoba) उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है. यह महोबा जिले का मुख्यालय भी है. शहर का इतिहास चंदेल राजवंश से जुड़ा हुआ है. मध्यकाल में महोबा चंदेल शासकों की राजधानी रहा था. इसी कारण शहर और इसके आसपास के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलते हैं.

महोबा का उल्लेख चंदेल काल के इतिहास में मिलता है. चंदेल शासकों का प्रभाव बुंदेलखंड के बड़े हिस्से में रहा था. राजा परमर्दिदेव के समय महोबा राजनीतिक और सैन्य गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था. इसी दौर से जुड़े आल्हा और ऊदल की कथाएं भी बुंदेलखंड की लोक परंपरा में प्रसिद्ध हैं. कहा जाता है कि दोनों भाइयों ने चंदेल राजा की ओर से कई युद्धों में हिस्सा लिया था.

महोबा के इतिहास में धार्मिक स्थलों का भी स्थान है. शहर में नौवी शताब्दी से जुड़ा सूर्य मंदिर स्थित है. इस मंदिर का निर्माण प्रतिहार शैली से जुड़ा माना जाता है. गोरखर पहाड़ी भी यहां का एक ऐतिहासिक स्थल है. इस पहाड़ी पर चट्टानों को काटकर बनाई गई जैन तीर्थकर प्रतिमाएं मौजूद हैं. यहां 24 जैन तीर्थकर प्रतिमाओं का उल्लेख मिलता है.

महोबा के आसपास कई ऐसे स्थान हैं जो बुंदेलखंड के इतिहास और संस्कृति से जुड़े हुए हैं. खजुराहो, लवकुशनगर, कुलपहाड़, चरखारी, कालिंजर, ओरछा और झांसी जैसे स्थान महोबा से जुड़े क्षेत्र में आते हैं. सेनापति महल भी शहर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है.

आवागमन की बात करें तो महोबा रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. महोबा जंक्शन रेलवे स्टेशन उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आता है. यहां कई एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें रुकती हैं. सड़क मार्ग से भी महोबा को उत्तर प्रदेश के अलग अलग शहरों से जोड़ा गया है.

महोबा से कई चर्चित नाम भी जुड़े हुए हैं. रानी दुर्गावती को महोबा की चंदेल राजकुमारी के रूप में जाना जाता है. लोक कथाओं में आल्हा और ऊदल का नाम भी महोबा के इतिहास से जुड़ा मिलता है. आधुनिक समय में पुष्पेंद्र सिंह चंदेल भी महोबा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख राजनीतिक नामों में शामिल हैं.
 

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