किडनी (Kidney) यानी गुर्दे, हमारे शरीर के दो छोटे-से अंग होते हैं, जो कम दिखते हैं, लेकिन बहुत बड़ा काम करते हैं. ये हमारे शरीर को साफ और स्वस्थ रखने के लिए चुपचाप 24 घंटे काम करते रहते हैं.
किडनी बीन (राज़मा) के आकार के दो अंग होते हैं. ये हमारी पीठ की तरफ, कमर के पास रीढ़ की दोनों ओर होते हैं. एक किडनी की लंबाई लगभग 10-12 सेमी होती है.
किडनी का काम हमारे शरीर से खून को साफ करना, पानी का संतुलन बनाए रखना, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना, विटामिन D को एक्टिव करना और खून बनाने में मदद करना है.
किडनी खराब होने के लक्षणों में बार-बार पेशाब आना या बहुत कम आना, चेहरे, टखनों या पैरों में सूजन, थकान या कमजोरी, भूख कम लगना, बदन में खुजली या त्वचा सूखना, पेशाब में झाग या खून, सांस फूलना या नींद में परेशानी शामिल है.
कुछ आदतें किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है उनमें ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड खाना, पानी कम पीना, ज्यादा दर्द निवारक दवाएं लेना, uncontrolled डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा शराब या धूम्रपान और मोटापा कारण होता है.
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोज़ाना 7-8 गिलास पानी पिएं, कम नमक और कम तेल वाला खाना खाएं, ब्लड शुगर और बीपी को कंट्रोल में रखें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें, डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें साथ ही समय-समय पर क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरीन टेस्ट कराएं.
आजकल कमर दर्द आम समस्या बन गई है, लेकिन यह हमेशा मांसपेशियों के खिंचाव के कारण नहीं होता. अक्सर हम कमर के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को थकान या गलत तरीके से बैठने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं जो गलत हो सकता है.
20 से 30 साल की उम्र में पुरुष और महिलाओं को ये जरूरी मेडिकल टेस्ट जरूर कराने चाहिए, ताकि सेहत के साथ कोई लापरवाही न हो. आज की तेज़ रफ्तार लाइफस्टाइल, बढ़ता वर्क प्रेशर और अनहेल्दी खान-पान कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रहे हैं. ऐसे में समय-समय पर हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी हो गया है, खासकर टाइप-2 डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी साइलेंट बीमारियों को समय रहते पकड़ने के लिए
कानपुर किडनी स्कैम में 25 हजार के इनामी फर्जी डॉक्टर रोहित की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं. इस मामले की जांच पड़ताल में सामने आया कि फेक डॉक्टर रोहित ही पूरे अवैध ट्रांसप्लांट रैकेट का मास्टरमाइंड था. पढ़ें शातिर रोहित की गिरफ्तारी की पूरी कहानी.
कानपुर के किडनी रैकेट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जहां 20 हजार की नौकरी करने वाला एक गार्ड अस्पताल का मालिक निकला. वो गार्ड आरोपी शिवम को अस्पतालों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा था. इस मामले की जांच जारी है. जानें पूरी कहानी.
कानपुर में उजागर हुए किडनी रैकेट ने पूरे देश को हिला दिया है. 60 से ज्यादा गैरकानूनी ट्रांसप्लांट की बात सामने आई है. जिसमें करोड़ों की ठगी और डॉक्टरों की मिलीभगत का खुलासा हुआ है.इस रैकेट की मॉडस ऑपरेंडी बेहद हैरान करने वाली है. पढ़ें पूरी कहानी.
फीस जमा करने के लिए किडनी बेचने की बात करके सुर्खियों में आए आयुष की कहानी अब उलटती नजर आ रही है. उसने पहले झूठ बोला था, असल में उसने अपनी 15 बीघा जमीन बेचकर पैसे उड़ाए. इसी बीच एयर होस्टेस से शादी भी की, जो जल्द ही टूट गई. जांच-पड़ताल में उसकी ‘दर्दभरी’ कहानी की परतें खुल रही हैं और सच सामने आ रहा है.
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कांड में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. एंबुलेंस चालक और ओटी टेक्नीशियन डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज और ऑपरेशन कर रहे थे. कानपुर में विदेशी महिला का भी किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. इस पूरे मामले में अब तक 8 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि कई आरोपी फरार हैं.
अपनी किडनी बेचने वाले एमबीए छात्र आयुष कुमार को अपने फैसले पर पछतावा हो रहा है. वह बार-बार पुलिस से मां को सच न बताने की गुहार लगा रहा है. फीस और आर्थिक दबाव के चलते उसने 6 लाख में किडनी का सौदा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही मिले. अब वह किसी से भी बात करने से इनकार कर रहा है.
कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट कांड में संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया कि अलग-अलग शहरों से डॉक्टरों की टीम आकर गुपचुप सर्जरी करती थी. CCTV बंद कर ऑपरेशन किए जाते थे. पुलिस कई शहरों में छापेमारी कर मुख्य आरोपियों की तलाश में जुटी है.
कानपुर किडनी कांड के डोनर आयुष ने खुलासा किया कि आर्थिक तंगी और पढ़ाई की फीस भरने के लिए उसने 6 लाख में किडनी का सौदा किया था. हालांकि, अवैध सर्जरी के बाद उसे केवल 3.5 लाख ही मिले. फिलहाल हालत बिगड़ने पर आयुष और रिसीवर पारुल को लखनऊ रेफर किया गया है.
किडनी ट्रांसप्लांट में मैचिंग टेस्ट से लेकर 3-5 घंटे की सर्जरी और फिर हफ्तों की रिकवरी शामिल है. इसकी पूरी प्रोसेस क्या होती है, रिकवरी में कितना समय लगता है, इस बारे में विस्तार से जानेंगे.
कानपुर के अस्पतालों में चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के अवैध नेटवर्क के खुलासे के बीच आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई. दो दिनों की पड़ताल में सामने आया कि कैसे गरीबों को लालच देकर उनकी किडनी बेची जा रही थी और पूरा खेल बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रहा था.
कानपुर के आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा होने के बाद पूरा अस्पताल खाली मिला. पुलिस ने डॉक्टर दंपति को गिरफ्तार किया, जिसके बाद स्टाफ और मरीज सब फरार हो गए. गार्ड ने बताया डॉक्टर साहब और डॉक्टराइन को यही से पुलिस उठाकर ले गई.जांच में दलालों के जरिए डोनर-रिसीवर सौदे और करोड़ों के खेल के संकेत मिले हैं. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है.
कानपुर के किडनी कांड में कई बड़े खुलासे हुए हैं. बताया जा रहा है कानपुर में अब तक 60 से ज्यादा ऑपरेशन सामने आए हैं. बिना रिकॉर्ड और बिना स्टाफ के सर्जरी करने का चौंकाने वाला तरीका सामने आया. फर्जी डॉक्टर और टेलीग्राम नेटवर्क के जरिए डील होती थी. 80 लाख खर्च करने वाली मरीज की हालत गंभीर है. पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है.
कानपुर किडनी रैकेट में फर्जी डॉक्टर और टेलीग्राम नेटवर्क के जरिए 60 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट किए गए. बिना रिकॉर्ड ऑपरेशन और मरीजों की बिगड़ती हालत ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है.
कानपुर में किडनी गैंग का बड़ा खुलासा हुआ है. आरोप है कि उत्तराखंड के युवक से 10 लाख रुपये में किडनी लेकर उसे बिहार की महिला को 90 लाख रुपये में बेच दिया गया. एक प्राइवेट अस्पताल समेत कई जगहों पर छापेमारी हुई है. पुलिस ने बिचौलियों, डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
12 मार्च को मनाए जाने वाले वर्ल्ड किडनी डे के अवसर पर भारत में किडनी रोगों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई है. AIIMS भोपाल के डॉक्टर केतन मेहरा ने बताया कि ऑटो-इम्यून डिजीज और बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स का सेवन किडनी फेलियर के प्रमुख कारण हैं.
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और खराब खान-पान का असर अब किडनी पर साफ दिखने लगा है. ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) अब दुनिया में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन चुकी है. भारत में भी इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
आज के दौर में डायबिटीज और बीपी किडनी के सबसे बड़े दुश्मन हैं, लेकिन जब तक किडनी 60 प्रतिशत खराब नहीं हो जाती है, तब तक उसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. सिर्फ KFT पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, जानिए कैसे 'यूरिन ACR' टेस्ट किडनी की खराबी को 5 साल पहले पकड़कर आपको डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचा सकता है.
Death के बाद body organs कैसे और कितने समय में काम बंद करते हैं? Brain, heart, kidney, cornea से जुड़ी पूरी जानकारी और organ donation की अहमियत.
लंबे समय तक पेशाब रोकना किडनी और ब्लैडर की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, ब्लैडर के मसल्स की कमजोरी और किडनी डैमेज जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.