ऑफिस की जरूरी मीटिंग चल रही हो, ट्रैफिक में फंसे हों या फिर बाहर का गंदा टॉयलेट इस्तेमाल करने से बचना हो, अक्सर लोग इन चीजों से बचने के लिए काफी लंबे समय तक पेशाब (यूरिन) रोककर रखते हैं. हालांकि कई लोगों को ये नॉर्मल बात लगती है लेकिन डॉक्टर्स के मुताबिक, ऐसा करना सेहत के साथ-साथ आपकी किडनी और ब्लैडर के लिए काफी खतरनाक हो सकता है. दरअसल, शरीर पेशाब के जरिए ही अपने अंदर की गंदगी बाहर निकालता है, अब जब कोई इस नेचुरल प्रोसेस में बाधा डालता है तो समस्या हो सकती है. आखिर यूरिन रोकने से क्यों बचना चाहिए, इस बारे में हम आपको समझाते हैं.
ब्लैडर एक मस्कुलर बैग की तरह होता है, जिसका काम किडनी द्वारा फिल्टर किए गए पेशाब को स्टोर करना है. धीरे-धीरे ब्लैडर जब भरने लगता है तो उसके रिसेप्टर्स दिमाग को सिग्नल भेजते हैं कि अब ब्लैडर को खाली करना चाहिए.
सीके बिरला हॉस्पिटल्स (CMRI) के यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कुमार गुप्ता के मुताबिक, 'पेशाब लगने के सिग्नल हर इंसान में अलग-अलग हो सकते हैं जो कि व्यक्ति की उम्र, ब्लैडर की क्षमता और दिन के समय पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए, रात में ये सिग्नल कम हो जाते हैं ताकि आप चैन की नींद सो सकें और आपको बार-बार टॉयलेट न भागना पड़े. लेकिन जब हम जाग रहे होते हैं और आपको यूरिन का संकेत मिले तो इसे रोकना नहीं चाहिए.'
वयस्कों के लिए कभी-कभी थोड़ी देर के लिए पेशाब रोकना सामान्य है क्योंकि एक सामान्य ब्लैडर करीब 400 से 500 मिलीलीटर यूरिन स्टोर कर सकता है. कभी-कभी मजबूरी में इसे रोकना दर्द तो दे सकता है लेकिन तुरंत कोई बड़ा नुकसान नहीं करता.
हालांकि, कुछ खास स्थितियों में डॉक्टर ही 'ब्लैडर ट्रेनिंग' की सलाह देते हैं, खासकर उन्हें जिनका ब्लैडर ओवरएक्टिव होता है. लेकिन अगर आप बिना किसी मेडिकल सलाह के अक्सर घंटों तक पेशाब रोकते हैं तो यह खतरनाक है. खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें प्रोस्टेट की समस्या है, किडनी की बीमारी है या जिनका ब्लैडर न्यूरोजेनिक (नसों से संबंधित समस्या) है, उनके लिए यह आदत जानलेवा साबित हो सकती है.
लंबे समय तक यूरिन रोकने से शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं:
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI): जब पेशाब अधिक लंबे समय तक ब्लैडर में रुकी रहती है तो बैक्टीरिया पनपने का पूरा माहौल बन जाता है जिससे इन्फेक्शन का खतरा, पेशाब में जलन, पेट के निचले हिस्से में दर्द और यूरिन से बदबू आना जैसी शिकायतें होने लगती हैं.
ब्लैडर का खिंचना और मांसपेशियों की कमजोरी: देर तक लगातार यूरिन रोकने से ब्लैडर अपनी क्षमता से ज्यादा खिंच जाता है जिससे उसके मसल्स कमजोर हो सकते हैं. इससे होता ये है कि आगे आपको ब्लैडर पूरी तरह खाली करने में परेशानी हो सकती है या फिर छींकने-खांसने पर यूरिन लीक (Incontinence) होने की समस्या हो सकती है.
किडनी पर दबाव और बैक-फ्लो: सामान्य तौर पर यूरिन किडनी से ब्लैडर की ओर बहता है. लेकिन जब ब्लैडर ओवरफ्लो होने लगता है तो कई बार यूरिन वापस किडनी की तरफ जाने लगता है. इसे 'वेसिकोयूरेटेरल रिफ्लक्स' कहते हैं. यह स्थिति किडनी डैमेज और गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है.
अक्सर लोगों के मन में डर होता है कि ज्यादा देर रोकने से कहीं ब्लैडर फट न जाए. इस पर डॉ. गुप्ता कहते हैं, 'कई लोग सोचते हैं कि यूरिन रोकने से ब्लैडर फट सकता है. हालांकि ब्लैडर का अचानक फटना संभव है, लेकिन ऐसा आमतौर पर तब होता है जब कोई गंभीर रुकावट (Blockage) हो या कोई अंदरूनी चोट लगी हो. सामान्य स्थिति में शरीर खुद को बचाने की कोशिश करता है.'
हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि 'नेचर्स कॉल' को कभी अनसुना न करें. जैसे ही आपको तेज पेशाब महसूस हो, कोशिश करें कि जल्द से जल्द बाथरूम जाएं. यह न केवल आपकी किडनी को सुरक्षित रखता है, बल्कि आपको दिनभर कंफर्टेबल और फोकस्ड रहने में भी मदद करता है. अगर आपको पेशाब करते समय दर्द होता है या बार-बार जाने की जरूरत महसूस होती है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें.