जसपाल राणा (Jaspal Rana) भारतीय निशानेबाजी जगत के प्रमुख खिलाड़ियों और कोचों में से एक थे. 12 जून 2026 को दिल्ली के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया. जसपाल राणा 49 साल के थे. वे म्यूनिख से नई दिल्ली लौट रहे थे. यात्रा के दौरान जसपाल राणा को असहज महसूस हुआ. जिसके बाद एयरपोर्ट से मैक्स हॉस्पिटल, साकेत ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया.
उन्होंने अपने खेल करियर के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में किया और बाद में कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया. वे विशेष रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों में अपने प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं.
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के एक गढ़वाली परिवार में हुआ था. उनके पिता नारायण सिंह राणा 1971 के युद्ध के पूर्व सैनिक रहे और बाद में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री बने. शूटिंग खेल में उनकी रुचि थी और उन्होंने ही जसपाल राणा को शुरुआती प्रशिक्षण दिया. परिवार में खेल का माहौल था. उनकी बहन सुषमा सिंह (राणा) और भाई सुभाष राणा भी निशानेबाजी से जुड़े रहे हैं.
जसपाल राणा ने कम उम्र में ही शूटिंग में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी. वर्ष 1988 में अहमदाबाद में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया. इसके बाद 1994 में इटली के मिलान में आयोजित विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (जूनियर वर्ग) में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ सफलता हासिल की.
उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इस दौरान उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर फ्री पिस्टल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया. हालांकि वे पदक नहीं जीत सके, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मौजूदगी दर्ज कराने में उनकी भूमिका रही.
कॉमनवेल्थ गेम्स में जस्पाल राणा का रिकॉर्ड बेहद उल्लेखनीय रहा था. उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल थे. वर्ष 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए सबसे सफल रहे, जहां उन्होंने छह पदक अपने नाम किए.
वर्ष 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था. इसी प्रतियोगिता में उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की.
खेल करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग के क्षेत्र में कदम रखा. वर्ष 2012 के आसपास उन्होंने युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षण देना शुरू किया. बाद के वर्षों में वे भारतीय निशानेबाज मनु भाकर के कोच रहे. मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने के बाद अपने प्रदर्शन का श्रेय भी जसपाल राणा को दिया था. उन्होंने देहरादून स्थित अपने संस्थान में भी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया था.
खेल के अलावा जस्पाल राणा राजनीति से भी जुड़े थे. 2006 एशियाई खेलों के बाद वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए थे और 2009 लोकसभा चुनाव में टिहरी सीट से चुनाव लड़ा. बाद में 2012 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई.
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनकी पत्नी आरुषि वर्मा पर्यावरण कार्यकर्ता, इंटीरियर डिज़ाइनर और राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज रही हैं। जस्पाल राणा का परिवार खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों से जुड़ा रहा। भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में उनका नाम एक खिलाड़ी, कोच और खेल प्रशासक के रूप में दर्ज है।
प्रसिद्ध निशानेबाज जसपाल राणा का निधन हो गया है. म्यूनिख से लौट रहे जसपाल राणा की तबीयत बिगड़ गई थी. उनको दिल्ली पहुंचते ही उपचार के लिए साकेत के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
देश के प्रसिद्ध पिस्टल निशानेबाज जसपाल राणा का दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. राणा का निधन किस वजह से हुआ इस बारे में मैक्स अस्पताल के कार्डियक साइंस विभाग के ग्रुप चैयरमेन डॉ बलबीर सिंह ने बताया है.
भारतीय शूटिंग के दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक जीतकर भारत के सबसे सफल एथलीटों में अपनी जगह बनाई. एशियन गेम्स और ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने कोचिंग के जरिए नई पीढ़ी को तैयार किया. राणा को अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता मनु ने कहा कि नकारात्मकता और जसपाल राणा के साथ उनके विवाद के अलावा हर कीमत पर पदक जीतने की उनकी चाहत से स्थिति और खराब हो गई.
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजों ने निराश किया है. ओलंपिक खेलों के पांचवें दिन तक निशानेबाजी में भारत के खाते में एक भी मेडल नहीं आया .