भारत के दिग्गज निशानेबाज और शूटिंंग कोच जसपाल राणा के निधन से खेल दुनिया में शोक की लहर है. मनु भाकर ने अपने गुरु और कोच जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती.
मनु भाकर ने भावुक होकर कहा कि जसपाल राणा सिर्फ कोच नहीं थे, बल्कि उनके मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और परिवार के सदस्य जैसे थे. उनके मार्गदर्शन ने उन्हें कठिन समय में संभाला और सफलता की राह दिखाई.
मनु भाकर के कोच और दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का (शुक्रवार) 12 जून को 49 साल की उम्र में निधन हो गया. जसपाल राणा ने ही मनु भाकर को कोचिंग दी थी और उनके मार्गदर्शन में मनु ने पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था.
ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर अपने कोच जसपाल राणा के निधन से गहरे सदमे में हैं. शुक्रवार को देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ अपने कोच और गुरु जसपाल राणा को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचीं 24 वर्षीय ओलंपियन मनु एक ऐसी हकीकत का सामना कर रही थीं, जिसके लिए वह खुद को बिल्कुल तैयार नहीं मानती थीं.
उनके मार्गदर्शक और मेंटर जसपाल राणा के अचानक और दुखद निधन ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया है.
अपूरणीय क्षति 💔🕉️🙏🏻🇮🇳 pic.twitter.com/XiU38FFhmA
— Manu Bhaker🇮🇳 (@realmanubhaker) June 13, 2026
शनिवार को मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर 2018 से 2024 तक के अपने और जसपाल राणा के सफर की यादों से जुड़ी तस्वीरों का एक भावुक कोलाज साझा किया.
इन तस्वीरों के साथ उन्होंने सिर्फ दो शब्द लिखे, जो उनके दर्द और पूरे देश के शोक को बयां कर रहे थे, भाकर ने लिखा, 'अपूरणीय क्षति.' साथ में भाकर ने अपने पोस्ट में टूटे दिल वाली इमोजी भी लगाई.
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मनु भाकर ने कहा, 'मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है. यह खबर अविश्वसनीय है. मैं अभी तक इसे स्वीकार नहीं कर पा रही हूं. वह सिर्फ मेरे कोच, मेंटर या मार्गदर्शक ही नहीं थे, बल्कि एक ऐसे दोस्त भी थे जो मुझे ज्यादातर लोगों से बेहतर समझते थे.'
मनु ने आगे कहा, 'हर मेडल, हर सफलता और पोडियम पर बिताया गया हर पल मुझे हमेशा उनकी याद दिलाएगा. उन जीतों में उनका भी हिस्सा है, क्योंकि उन्होंने मेरे करियर के सबसे मुश्किल दौर में भी मुझ पर विश्वास करना कभी नहीं छोड़ा. शूटिंग रेंज अब कभी पहले जैसी नहीं लगेगी. उनकी आवाज, उनकी सलाह और उनकी मौजूदगी मेरी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं. यह सोचकर ही दिल दुखता है कि अब मैं उन्हें वहां खड़ा हुआ फिर कभी नहीं देख पाऊंगी.'