हार्ट अटैक (Heart Attack) आमतौर पर तब होता है जब ब्लड क्लॉट हार्ट में ब्लड फ्लो को ब्लॉक यानी रोकता है, बाधा पहुंचाता है. रक्त के बिना, टिशू ऑक्सीजन खो देते हैं, जिसके कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. हार्ट अटैक के लक्षणों में छाती, गर्दन, पीठ या बाहों में जकड़न या दर्द, साथ ही थकान, चक्कर आना, असामान्य दिल की धड़कन बढ़ जाती है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में असामान्य लक्षण होने की संभावना अधिक होती है.
कोरोनरी आर्टरी रोग अधिकांश दिल के दौरे का कारण बनता है. कोरोनरी आर्टरी रोग में, हृदय (कोरोनरी) धमनियों में से एक या अधिक रुकावट हो जाती हैं. यह आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल जमाव के कारण होता है जिसे प्लाक कहा जाता है. प्लाक धमनियों को संकीर्ण यानी काफी छोटा कर सकता है, जिससे हृदय में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है. इसके अलावा दिल का दौरा कारण तम्बाकू का उपयोग, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स, मोटापा, डायबिटीज, दिल के दौरे का पारिवारिक इतिहास, अनहेल्थी आहार और तनाव हो सकता है.
इसके उपचार में जीवनशैली में बदलाव और Cardiac Rehabilitation से लेकर दवा, स्टेंट और बाईपास सर्जरी तक शामिल हैं. साथ ही स्वस्थ जीवन शैली का पालन करने से भी हार्ट अटैक से बचा जा सकता है.
गलत डाइट और लाइफस्टाइल की वजह से भारतीय लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं. तेल और घी को लेकर भी काफी मिथ लोगों के बीच फैले हुए है, कोई इनको अच्छा बताता है तो कोई दिल के लिए बुरा माना है. ऐसे में डॉक्टर ने बताया कि दिन भर में कितने चम्मच घी या तेल खाना सुरक्षित है.
यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन की नई रिसर्च के अनुसार, सिर्फ 2 दिन तक ओटमील डाइट लेने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) में 10% तक की गिरावट आ सकती है। यह डाइट मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान है, जो न केवल कोलेस्ट्रॉल कम करती है बल्कि वजन घटाने और शुगर लेवल सुधारने में भी मददगार है।
शकरकंद खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ हमारी हेल्थ के लिए भी हेल्दी भी होता है. इसे खाने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं, लेकिन अगर आप इसे गलत तरीके से खाते हैं. तो आपके शरीर को कई कुछ नहीं मिलता है. इसलिए शकरकंद को सही तरीके से खाना सबसे जरूरी है, आइए जानते हैं इसे खाने का सही तरीका क्या है.
भारत में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह खराब कोलेस्ट्रॉल का अधिक होना है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों भारतीयों में बैड कोलेस्ट्रॉल अधिक क्यों होता है और इसे कैसे कम कर सकते हैं.
आज के समय में फिटनेस फ्रीक लोग हों या फिर नॉर्मल, हर कोई प्रोटीन के पीछे भाग रहा है और हाई प्रोटीन डाइट ले रहा है. ऐसे में कई लोग जरूरत से अधिक प्रोटीन ले लेते हैं और उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है.
कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना इंसान को दिल की बीमारी के करीब ले जाता है, खासतौर पर भारतीयों में तो वैसे ही बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा गुड कोलेस्ट्रॉल से ज्यादा होती है. हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर को खुद से कोसों दूर रखना चाहते हैं तो फौरन अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव कर लें. डॉक्टर का भी कहना है कि गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ अहम बदलाव जरूरी है.
साल 2026 की नई अमेरिकी डाइटरी गाइडलाइन्स ने घी, मक्खन और रेड मीट को 'हाई-क्वालिटी प्रोटीन' बताकर सबको चौंका दिया है. जहां नई रिपोर्ट सैचुरेटेड फैट को क्लीन चिट दे रही है, वहीं हार्वर्ड के विशेषज्ञ इसे दिल के लिए खतरनाक मान रहे हैं. जानें रेड मीट और डेयरी की सही मात्रा क्या होनी चाहिए.
भारतीय खाने में तेल का अहम रोल है, लेकिन इसकी अधिकता दिल के लिए खतरनाक हो सकती है. एक स्वस्थ व्यक्ति को महीने में केवल 500-600 मिलीलीटर तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए, रिफाइंड के बजाय सरसों का तेल क्यों बेहतर है.
Anil agarwal son Agnivesh Agarwal Death: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई है. न्यूयॉर्क में स्कीइंग के दौरान उनका एक्सिडेंट हुआ था जिसके बाद इलाज के दौरान उन्हें कार्डिएक अरेस्ट आया.
चुकंदर के रस में चिया सीड्स मिलाकर पीने से शरीर को काफी फायदे होते हैं. दोनों को साथ में लेने से क्या बेनिफिट्स हो सकते हैं, इस बारे में रिसर्च क्या कहती हैं ये जानेंगे.
सर्दियों में LDL यानी गंदा कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सर्दियों में मिलने वाली 3 मौसमी सुपरफूड सब्जियां नेचुरल तरीके से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद करती हैं. इन तीनों सब्जियों को आप अपनी थाली में जरूर शामिल करें.
क्या रात में नींद पूरी न होना, दिल को समय से पहले बूढ़ा कर देता है? जानिए डॉक्टर ने क्या कहा
वजन से ज्यादा कमर के आस-पास जमा फैट स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है और यह कई गंभीर बीमारियों जैसे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, फैटी लिवर का कारण बन सकता है. समय पर सावधानी से आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं और गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं.
हार्ट फेल्योर एक गंभीर दिल की बीमारी है जो दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है. इसके शुरुआती लक्षण जैसे थकान, सांस फूलना, पैरों में सूजन और वजन बढ़ना अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. मणिपाल हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक, समय पर इन संकेतों को पहचान कर हार्ट फेल्योर को कंट्रोल किया जा सकता है.
सर्दियों में पैरों का ठंडा रहना सिर्फ मौसम की वजह से नहीं होता, बल्कि यह आपके शरीर में खराब ब्लड सर्कुलेशन, डायबिटीज, या पैरीफेरल आर्टरी डिजीज जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड फ्लो में रुकावट के कारण पैरों में ठंडापन और दर्द हो सकता है.
भारत में कोविड के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है वायु प्रदूषण. ब्रिटेन में भारतीय डॉक्टरों ने चेताया कि उत्तर भारत में फेफड़ों की छिपी बीमारियां बढ़ रही हैं, भविष्य में बड़ा संकट आएगा. दिल्ली में सांस के मरीज 30% बढ़े. PM2.5 से सालाना लाखों मौतें हो रही हैं. तुरंत जांच-इलाज और स्वच्छ हवा के उपाय जरूरी हैं.
आखिर हमारी किन आदतों की वजह से हार्ट समय से पहले बूढ़ा और कमजोर हो रहा? जानिए अपने हार्ट को हेल्दी कैसा रखा जाए
दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा ने कोलेस्ट्रॉल को लेकर फैले मिथकों को तोड़ते हुए बताया कि कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है और यह हमेशा स्थिर नहीं रहता। उन्होंने कहा कि कोलेस्ट्रॉल 85% शरीर खुद बनाता है और यह इम्यूनिटी बढ़ाने, बैक्टीरिया को निष्क्रिय करने और कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
बॉडीबिल्डिंग चैंपियन वांग कुन के अचानक निधन से उनके फैंस काफी दुखी हैं और बॉडीबिल्डिंग इंडस्ट्री में हर कोई सदमे में है. महज 30 साल की उम्र में वांग कुन की हार्ट प्रॉब्लम की वजह से हुई है. ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या शरीर पर ज्यादा प्रेशर बनाना जानलेवा साबित हो सकता है, भले ही कोई क्लीन लाइफस्टाइल ही क्यों ना अपनाए.
ट्राइग्लिसराइड्स खून में पाया जाने वाला फैट है जो दिल की बीमारियों, फैटी लिवर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है. यह मुख्य रूप से अधिक कैलोरी के सेवन और गलत लाइफस्टाइल की वजह से बढ़ता है. मिठाई, तला-भुना भोजन, शराब और अधिक कार्बोहाइड्रेट से बचकर, साथ ही नियमित व्यायाम और सही खान-पान से इसे नियंत्रित किया जा सकता है.
सर्दियों में किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है. आयुर्वेद के अनुसार ठंडे मौसम में पानी की कमी से किडनी पर दबाव बढ़ सकता है, यह गले की समस्याओं में भी राहत देता है और शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है.