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डोसा

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डोसा (Dosa) भारतीय खानपान का एक बेहद लोकप्रिय व्यंजन है, जिसे खासतौर पर दक्षिण भारत से जोड़ा जाता है. यह पतला, कुरकुरा और गोल आकार का होता है और इसे आमतौर पर सांभर, नारियल की चटनी या दूसरी चटनियों के साथ परोसा जाता है. आज डोसा सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लगभग हर हिस्से में आसानी से मिल जाता है.

डोसा बनाने के लिए मुख्य रूप से चावल और उड़द दाल का इस्तेमाल किया जाता है. दोनों को अलग-अलग भिगोकर पीसा जाता है और फिर इनके मिश्रण को कुछ समय के लिए खमीर उठने के लिए रखा जाता है. इसके बाद तैयार घोल को गर्म तवे पर पतली परत में फैलाया जाता है. थोड़े तेल या घी के साथ इसे सेंका जाता है, जिससे डोसा कुरकुरा हो जाता है.

डोसे की कई अलग-अलग किस्में मिलती हैं. साधारण डोसा के अलावा मसाला डोसा, पेपर डोसा, रवा डोसा, सेट डोसा, नीर डोसा और पनीर या चीज डोसा भी लोकप्रिय हैं. मसाला डोसा में आमतौर पर आलू और मसालों से तैयार भरावन डाला जाता है. वहीं रवा डोसा सूजी से तैयार किया जाता है और इसकी बनावट सामान्य डोसे से अलग होती है.

डोसे का इतिहास दक्षिण भारतीय खानपान की परंपरा से जुड़ा हुआ है. इसकी उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं. कर्नाटक के उडुपी क्षेत्र में डोसा और इससे जुड़े व्यंजनों की लंबे समय से लोकप्रियता रही है. बाद में यह व्यंजन दक्षिण भारत के दूसरे हिस्सों और फिर देश के अन्य राज्यों तक पहुंचा.

आज डोसा घरों के अलावा रेस्तरां, होटल और स्ट्रीट फूड दुकानों पर भी मिलता है. अलग-अलग जगहों पर इसे स्थानीय स्वाद के अनुसार बदला गया है. कुछ जगहों पर डोसे में अलग तरह की सब्जियां, पनीर, चीज और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है.

डोसा भारतीय व्यंजनों में अपनी अलग पहचान बना चुका है. पारंपरिक दक्षिण भारतीय भोजन से निकलकर यह आज देश-विदेश के कई हिस्सों में पसंद किया जाने वाला लोकप्रिय व्यंजन बन गया है.

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