Jowar sorghum dosa making trick: आज के समय में डाइजेशन संबंधी समस्याएं काफी कॉमन हैं जिनके कारण मोटापा और पाचन संबंधी कई समस्याएं आम हो गई हैं. ऐसे में लोग अब पारंपरिक अनाज यानी मिलेट्स खाने पर अधिक जोर दे रहे हैं. ज्वार न केवल ग्लूटेन-फ्री होता है बल्कि इसमें फाइबर की मात्रा भी बहुत अधिक होती है. ज्वार का डोसा इसी सेहतमंद अनाज से तैयार एक ऐसी डिश है जिसे आप सुबह के नाश्ते या रात के खाने में बेझिझक शामिल कर सकते हैं. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो चावल के डोसे का हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं. तो आइए ज्वार का डोसा बनाने की विधि भी जान लीजिए.
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्वार में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो धीरे-धीरे पचते हैं और उससे ब्लड शुगर लेवल एकदम से नहीं बढ़ता. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी ये बहुत अच्छी मानी जाती है.
इसमें मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और हार्ट हेल्थ को मैनेज करने में मदद मिलती है. WebMD का कहना है कि मिलेट्स को डाइट में शामिल करना चाहिए ताकि शरीर को जरूरी मिनरल्स मिल सकें.
तड़के और टेस्ट के लिए
ज्वार का डोसा बनाना बेहद आसान है. इसे बनाने के लिए आपको मुख्य रूप से ज्वार का आटा, थोड़ा सा चावल का आटा (कुरकुरेपन के लिए) और छाछ या दही की आवश्यकता होती है.
ज्वार के आटे को फर्मेंट करने के लिए इसे दही या छाछ के साथ मिलाकर कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए छोड़ देना सबसे प्रभावी तरीका है क्योंकि दही के प्रोबायोटिक्स आटे में नेचुरल खमीर उठाने में मदद करते हैं. अगर आप पारंपरिक स्वाद चाहते हैं तो ज्वार के आटे को भीगी हुई उड़द दाल के पेस्ट के साथ मिलाकर रात भर (8-10 घंटे) के लिए छोड़ दें, जिससे बैटर अच्छी तरह फूल जाता है और डोसा जालीदार बनता है.
इसके बाद उस घोल में बारीक कटी प्याज, हरी मिर्च और अदरक डालकर इसके स्वाद को और बढ़ा सकते हैं. इसका बैटर पारंपरिक डोसे की तरह बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं रखा जाता, जिससे यह तवे पर आसानी से फैलता है और कम तेल में बहुत ही क्रिस्पी बनकर तैयार होता है.
ज्वार का डोसा बनाते समय ध्यान रखें कि तवा अच्छी तरह गर्म हो. डोसे को धीमी आंच पर सेकने से यह अधिक कुरकुरा बनता है. इसे आप नारियल की चटनी या गरमा-गरम सांभर के साथ परोस सकते हैं. यह हल्का होता है इसलिए इसे खाने के बाद भारीपन महसूस नहीं होता और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती रहती है.