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'रोबोट स्केलेटन' का कमाल, दौड़ने लगीं 10 साल तक व्हील चेयर पर चलने वाली महिला, वीडियो वायरल

भारत समेत दुनियाभर में करोड़ों ऐसे लोग हैं, जो लकवा जैसी बीमारी का सामना करना रहे हैं. इसमें वे लोग बिस्तर से उठ तक नहीं पाते हैं. कई लोगों की जीवनभर व्हीलचेयर पर चलना पड़ता है. ऐसे लोगों के लिए रोबोटिक स्केलेटन काफी उपयोगी साबित हो

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10 साल में पहली बार अपने पैरों पर चलीं. (Photo: Instagram/Jessica Tawil)
10 साल में पहली बार अपने पैरों पर चलीं. (Photo: Instagram/Jessica Tawil)

भारत समेत दुनियाभर में लाखों लोग लकवा नाम की बीमारी का सामना कर रहे हैं. 10 साल से बिस्तर पर रहने वाली महिला जेसिका टाविल अपने पैरों पर दोबारा खड़ी हो सकीं, वह ना सिर्फ खड़ी हो पाईं बल्कि खुद चलकर भी दिखाया. 10 साल पहले उनका एक एक्सीडेंट हुआ था, जिसकी वजह से उनको स्पाइन कोर्ड इंजरी हुई थी. 

ऐसे लोगों के लिए रोबोटिक स्केलेटन बड़े काम का है. यह AI पावर्ड मशीन है, जो सेल्फ बेलेंसिंग रोबोटिक सूट से लैस होती है. इस सूट की मदद से पैरालाइज शख्स एक सामान्य शख्स की तरह चल फिर सकेंगे. 

इसका पूरा नाम Eve Exoskeleton नाम है और इसको वेंडरक्राफ्ट नाम की कंपनी ने तैयार किया है. इसको साल 2026 के अगस्त महीने में ही FDA की तरफ से क्लीयरेंस मिल चुकी है. 

कंपनी ने बताया है कि उसको रोबोटिक स्केलेटन की मदद से घर में रहते हुए डेली टास्क को कंप्लीट किया जा सकेगा. इसमें कुकिंग और वॉशरूम जैसे काम भी शामिल हैं.  

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रोबोटिक स्केलेटन क्या होते हैं?

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रोबोटिक स्केलेटन, असल में एक तरह का रोबोटिक सूट होता है. यह सूट उन लोगों के लिए है, जो लकवा नाम की बीमारी का सामना कर रहे होते हैं. 

रोबोटिक स्केलेटन को इंसानी शरीर के लिए तैयार किया है, जिससे लकवा का शिकार लोगों को ताकत, संतुलन और स्पीड मिल सके. AI फीचर्स की मदद से यह सिस्टम ऑटोमैटिक काम करता है. रोबोटिक स्केलेटन के अंदर कई जगह पर मोटर होती है. 

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दुनियाभर में करोड़ों लोग परेशान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब 1.50 करोड़ लोग स्पाइन कोर्ड इंजरी के साथ जीवन जी रहे हैं. पूरी दुनिया में हर साल करीब 7 लाख से 12 लाख लोग स्पाइन कोर्ड इंजरी के नए केस सामने आते हैं. 

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