एक एयरलाइन बंद हो गई. उसके विमान उड़ना बंद हो गए. कर्मचारी दूसरी नौकरियां तलाशने लगे. लेकिन कंपनी के ईमेल, चैट, दस्तावेज और सालों का काम अब भी करोड़ों रुपये की कीमत रखते हैं. इसकी वजह है - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. यही वजह है कि Google ने बंद हो चुकी अमेरिकी एयरलाइन Spirit Airlines के इंटर्नल डेटा के लिए करीब 95.75 करोड़ रुपये की बोली लगाई है.
गूगल ने बंद पड़ी Spirit Airlines का कारोबार या उसके यात्रियों की जानकारी नहीं खरीदी है, बल्कि कंपनी के अंदर इस्तेमाल हुए डेटा की बोली लगाई है. इसमें कर्मचारियों के ईमेल, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स की चैट, कैलेंडर, डॉक्यूमेंट्स, स्प्रेडशीट और दूसरे बिजनेस से जुड़़े रिकॉर्ड्स शामिल हैं. इस तरह का डेटा कॉन्फिडेंशियल होता है और कोई भी कंपनी नहीं चाहती की इसे कोई यूज करे. लेकिन अब समय बदल चुका है.
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रिपोर्ट के मुताबिक इस डेटा में करीब 10 करोड़ ईमेल और लगभग 50 करोड़ Microsoft Teams के मैसेजेस हैं. इसके अलावा कंपनी के काम करने के तरीके, सॉफ्टवेयर और दूसरे आंतरिक रिकॉर्ड भी इस पैकेज का हिस्सा हैं.
Google को इस डेटा की जरूरत क्यों पड़ी?
इस पूरी कहानी की सबसे दिलचस्प बात यही है. Google इस डेटा को अपने प्रोडक्ट्स और AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है. AI को अब सिर्फ इंटरनेट पर मौजूद आर्टिकल्स, फोटोज और किताबें पढ़ाना ही काफी नहीं माना जा रहा. हाल ही में ये भी खबर आई कि ऐमेजॉन और दूसरी कंपनियां करोड़ों किताबों को स्कैन करके AI ट्रेन कर रही हैं.
बड़ी टेक कंपनियों को ऐसे डेटा की जरूरत है जिससे AI यह समझ सके कि असली कंपनियों में काम कैसे होता है. किसी कर्मचारी ने ईमेल में समस्या कैसे बताई. टीम ने टीम्स पर उस समस्या पर कैसे चर्चा की. किसी फैसले तक पहुंचने में कितना समय लगा. किसी कस्टमर की शिकायत का जवाब कैसे दिया गया. अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के बीच काम कैसे आगे बढ़ा. इस तरह की जानकारी AI के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है.
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यही स्पिरिट एयरलाइन्स के डेटा को खास बनाता है. यह सिर्फ सामान्य जानकारी नहीं है. इसमें एक असली कंपनी के कई साल के काम का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है.
Spirit Airlines का डेटा बेचने की नौबत क्यों आई?
स्पिरिट एयरलाइन्स लंबे समय से आर्थिक मुश्किलों में थी. कंपनी ने दिवालिया होने के प्रोसेस का सामना किया और आखिरकार मई 2026 में बंद हो गई. इसके बाद कंपनी की संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसी दौरान उसके डिजिटल डेटा की भी बोली लगाई गई. गूगल ने इसके लिए करीब 95.75 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी बोली लगाई. AI डेटा कंपनी Mercor ने करीब 71.81 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.
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लेकिन अभी यह सौदा पूरी तरह अंतिम नहीं हुआ है. अमेरिकी दिवालिया अदालत में इस बिक्री को लेकर आपत्ति सामने आई है. स्पिरिट एयरलाइन्स के कर्मचारियों के संगठन ने भी इसका विरोध किया है. इसके बाद अदालत ने सुनवाई को 9 सितंबर तक टाल दिया है.
क्या कर्मचारियों की निजी जानकारी भी गूगल को मिल जाएगी?
यहीं सबसे बड़ा सवाल है. गूगल का कहना है कि बिक्री से पहले डेटा से पर्सनल पहचान वाली जानकारी हटा दी जाएगी. कस्टमर की जानकारी भी इस सौदे में शामिल नहीं है. फिर भी यह मामला एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है. हम ऑफिस में ईमेल और चैट करते हैं तो हमें लगता है कि वह बातचीत हमारी है. लेकिन असल में वह डेटा अक्सर कंपनी के सिस्टम पर रहता है. कंपनी के बंद होने या बिकने की स्थिति में उस डेटा का क्या होगा, यह हमेशा कर्मचारियों के लिए साफ नहीं होता.
गूगल का स्पिरिट एयरलाइन्स वाला ये संभावित सौदा इसी बदलती दुनिया की एक झलक है. आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए सबसे कीमती चीज सिर्फ इंटरनेट पर मौजूद जानकारी नहीं होगी. असली कंपनियों में इंसानों ने कैसे काम किया, क्या फैसले लिए और किस तरह समस्याएं सुलझाईं, यह डेटा भी बहुत बड़ा खजाना बन सकता है.