भारत में नया स्मार्टफोन खरीदने जाएं तो लगता है कि 5G अब एक नॉर्मल फीचर बन चुका है. लगभग हर कंपनी 5G फोन बेच रही है. कई सालों से ये ट्रेंड चल रहा है. लेकिन थोड़ ठहर कर गौर करें तो पाएंगे कि 5G से ज्यादा 4G यूज हो रहा है. कई सालों से ये दावा है कि 5G कनेक्टिविटी बढ़ रही है, लेकिन तस्वीर कुछ और ही है. टेलीकॉम कंपनियां भी लगातार दावा करती हैं कि उनका 5G नेटवर्क देश के ज्यादातर हिस्सों तक पहुंच चुका है.
जमीनी तस्वीर थोड़ी अलग है
दिल्ली, मुंबई, नोएडा, बेंगलुरु और दूसरे बड़े शहरों में भी कई यूजर्स का एक्सपीरिएंस यही है कि फोन पर 5G का आइकॉन तो दिखता है, लेकिन नेटवर्क हर जगह एक जैसा नहीं चलता. कहीं स्पीड शानदार मिलती है, तो कुछ दूरी पर फोन वापस 4G पर आ जाता है. घर के अंदर, बेसमेंट, मेट्रो, भीड़भाड़ वाली जगहों और कुछ इलाकों में 5G का एक्सपीरिएंस लगातार एक जैसा नहीं है.
और शायद इसी वजह से भारत में 4G अभी खत्म नहीं हुआ है. कागज पर 5G भारत में कई साल से मौजूद है, लेकिन आम मोबाइल यूजर की दुनिया में 4G अब भी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है. यहां तक की भारत अब 6G पर काम कर रहा है, लेकिन लोग 5G डेटा के लिए परेशान हैं. स्पीड है, कनेक्टिविटी भी है, लेकिन कन्सिस्टेंसी नहीं है. मसलन, आपको एक कदम आगे पीछे हुए तो गारंटी नहीं है आपका 5G चलेगा ही.
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ताजा एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक भारत, नेपाल और भूटान क्षेत्र में 5G सब्सक्रिप्शन 43 करोड़ तक पहुंच गए थे. यह कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का करीब 35 प्रतिशत था. वहीं 4G अब भी सबसे बड़ी तकनीक थी और इसका हिस्सा करीब 46 प्रतिशत था. यानी 5G तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन 4G अभी भी खत्म होने से काफी दूर है.
5G कवरेज और 5G एक्सपीरिएंस एक ही बात नहीं है
यहां एक बात समझना जरूरी है. किसी टेलीकॉम कंपनी का यह कहना कि उसका 5G नेटवर्क किसी शहर या जिले में उपलब्ध है, इसका मतलब यह नहीं कि आपको उस पूरे इलाके में हर समय एक जैसी 5G स्पीड मिलेगी. नेटवर्क का अनुभव कई चीजों पर निर्भर करता है. आपके घर या ऑफिस की लोकेशन, बिल्डिंग की दीवारें, फोन का 5G बैंड सपोर्ट, नेटवर्क पर उस समय मौजूद यूजर्स की संख्या और नजदीकी टावर जैसी चीजें फर्क डालती हैं.
यही वजह है कि एक ही शहर में दो लोगों का 5G अनुभव बिल्कुल अलग हो सकता है. एक व्यक्ति को 500Mbps की स्पीड मिल सकती है, जबकि दूसरे को उसी शहर के दूसरे इलाके में सामान्य 4G जैसा अनुभव मिले. इसका मतलब यह नहीं कि 5G फेल हो गया है. असल बात यह है कि भारत जैसे बड़े देश में नेटवर्क बनाना और उसे हर जगह एक जैसी क्वालिटी के साथ चलाना दो अलग-अलग काम हैं.
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एरिक्सन का ताजा अनुमान भी यही बताता है कि 4G से 5G का बदलाव धीरे-धीरे होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में 4G सब्सक्रिप्शन करीब 57 करोड़ से घटकर 2031 तक लगभग 16 करोड़ हो सकते हैं. यानी अगले पांच साल बाद भी करोड़ों लोग 4G इस्तेमाल कर रहे होंगे.
तो क्या 2026 में 4G फोन खरीदना गलत फैसला है?
जरूरी नहीं. अगर आप फोन सिर्फ कॉल, WhatsApp, YouTube, Instagram, UPI, ऑनलाइन बैंकिंग और सामान्य इंटरनेट के लिए खरीद रहे हैं, तो एक अच्छा 4G फोन अगले कुछ साल तक आराम से काम कर सकता है. 4G नेटवर्क अभी भारत का सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क है. और 4G की स्पीड सामान्य इस्तेमाल के लिए आज भी काफी है. Full HD वीडियो देखना हो, वीडियो कॉल करनी हो या सोशल मीडिया चलाना हो, इन कामों के लिए 5G जरूरी नहीं है.
अगर आपका बजट लिमिटेड है और आपको 4G फोन 5G मॉडल से काफी सस्ता मिल रहा है. ऐसे में सिर्फ इसलिए महंगा और खराब फोन खरीदने की जरूरत नहीं कि उसमें 5G नहीं है. बेहतर डिस्प्ले, अच्छी बैटरी, अच्छा कैमरा और ज्यादा स्टोरेज कई लोगों के लिए 5G से ज्यादा काम के हो सकते हैं. 4G अभी कुछ सालों तक यहीं है और कई मायनों में अलग अलग जगहों पर ये काफी स्टेबल भी है. यह भी पढ़ें: AI ने बना दिए 20-30 साल के अरबपति! कोई खरीद रहा ₹600 करोड़ का घर, बदल गई जिंदगी
लेकिन अगर 4G और 5G मॉडल की कीमत में बहुत कम अंतर है, तो 5G फोन लेना ज्यादा समझदारी होगी. कारण यह है कि 5G धीरे-धीरे प्राइमरी नेटवर्क बनने की तरफ बढ़ रहा है.
भारत में हर कोई 5G फोन इस्तेमाल नहीं कर रहा
5G फोन की बिक्री तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश के ज्यादातर मोबाइल कनेक्शन 5G पर चले गए हैं. ताजा आंकड़ों में 5G का हिस्सा 35 प्रतिशत है, जबकि 4G का हिस्सा 46 प्रतिशत है. बाकी में पुराने नेटवर्क और दूसरी तकनीकें शामिल हैं. साफ है कि भारत अभी ट्रांजिशन के दौर में है. यहां एक और बात है. कई लोगों के पास 5G फोन तो है, लेकिन वे हर समय 5G इस्तेमाल नहीं करते. फोन नेटवर्क की स्थिति के हिसाब से 4G और 5G के बीच बदलता रहता है. यानी 5G फोन खरीद लेना और लगातार 5G नेटवर्क पर रहना दो अलग बातें हैं.
4G फोन फिर लॉन्च क्यों हो रहे हैं?
कुछ कंपनियां अब भी 4G फोन लॉन्च कर रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कीमत है. भारत में एंट्री लेवल स्मार्टफोन खरीदने वाला कस्टमर वेब बहुत बड़ा है. हर कोई 5G के लिए ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहता. कई लोगों को बस एक भरोसेमंद फोन चाहिए जो कॉल करे, इंटरनेट चलाए और बैटरी लंबे समय तक दे.
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IDC के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में भारत के स्मार्टफोन बाजार पर बढ़ती कीमतों का असर साफ दिखाई दिया. पहली तिमाही में बाजार की बिक्री सालाना आधार पर घटी और औसत स्मार्टफोन कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. IDC ने बढ़ती मेमोरी कीमतों को भी लागत बढ़ने की एक वजह बताया. यानी सस्ता फोन बनाना पहले जितना आसान नहीं रह गया है.
AI की वजह से फोन और महंगे हो रहे फोन
अब इस कहानी में AI भी आ गया है. AI डेटा सेंटर को भारी मात्रा में मेमोरी, स्टोरेज और कंप्यूटिंग चिप्स की जरूरत पड़ रही है. यही सप्लाई चेन स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स से भी जुड़ी है. हाल में सैमसंग ने बढ़ती चिप डिमांड के बीच कुछ एडवांस्ड चिप मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज की कीमतें बढ़ाई हैं. वहीं NAND फ्लैश मार्केट में भी AI डेटा सेंटर की मांग को कीमतों पर असर डालने वाला बड़ा कारण बताया गया है.
Zoho के को-फाउंडर श्रीधर वेम्बू Vebu ने भी हाल में कहा था कि AI पर बढ़ते खर्च का असर स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतों तक पहुंच सकता है, क्योंकि मेमोरी और कंप्यूटिंग हार्डवेयर की मांग तेजी से बढ़ रही है. धीरे धीरे सैमसंग, वीवो, शाओमी, वन प्लस से लेकर तमाम कंपनियां अपने फोन की कीतमों में इजाफा करती हाी जा रही हैं.
ऐसे में 4G फोन की एक नई भूमिका बन सकती है. कम कीमत में अच्छा फोन देने के लिए कंपनियां कुछ मॉडल्स में 5G हार्डवेयर हटाकर कीमत कम रख सकती हैं. खासकर उन ग्राहकों के लिए जिन्हें अभी 5G की जरूरत महसूस नहीं होती.
4G चलेगा या नहीं
4G आने वाले कुछ सालों तक चलेगा. इस बात का संकेत खुद नेटवर्क इंडस्ट्री के अनुमान देते हैं. 2031 तक भी इस क्षेत्र में करीब 16 करोड़ 4G सब्सक्रिप्शन रहने का अनुमान है. सवाल यह है कि आप अपना नया फोन कितने साल चलाना चाहते हैं. अगर आप हर दो या तीन साल में फोन बदलते हैं और आपको कोई अच्छा 4G फोन काफी सस्ता मिल रहा है, तो उसे खरीदना पूरी तरह गलत फैसला नहीं है.