जिस खाकी वर्दी को पहनकर देश सेवा करने का सपना एक 19 साल का युवा रात-दिन देख रहा था, उसी पुलिस की पेलेट गन के छर्रों ने उसकी आंखों के आगे अंधेरा कर दिया. राजधानी दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र साहिल लोचब की जिंदगी 20 जुलाई की दोपहर हमेशा के लिए बदल गई. आज उसी साहिल को इंसाफ दिलाने और दिल्ली पुलिस के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं.
कौन है साहिल लोचब?
पारिवारिक पृष्ठभूमि: 19 वर्षीय साहिल लोचब मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है और वर्तमान में उसका परिवार दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रहता है. साहिल के पिता ड्राइवर का काम करते हैं और साहिल अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा है.
TOI की रिपोर्ट के अनुसार साहिल दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (DU SOL) का छात्र है. वह पढ़ाई के साथ-साथ SSC CGL और पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था. उसका सपना एक पुलिस अफसर या सशस्त्र बलों (यूनिफॉर्म सर्विस) में भर्ती होकर देश की सेवा करना था.
20 जुलाई को क्या हुआ था?
20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर नीट (NEET) धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्र संगठनों (CJP आदि) के 'संसद चलो' मार्च में साहिल भी शामिल हुआ था. प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया.
AIIMS ट्रॉमा सेंटर की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, साहिल के चेहरे, गर्दन, छाती और आंखों में 200 से ज्यादा पेलेट्स (छर्रे) लगे. सबसे गंभीर चोट उसकी दाईं आंख में आई, जहां 3 छर्रे सीधे कॉर्निया को चीरते हुए अंदर धंस गए. डॉक्टरों के अनुसार, उसकी आंख की 99% रोशनी चली गई है और इसके वापस लौटने की संभावना बेहद कम है.
'जिस खाकी का सपना देखा, उसी ने छीन ली रोशनी'
साहिल के परिजनों और दोस्तों का कहना है कि पुलिस भर्ती के लिए शारीरिक फिटनेस और आंखों की दृष्टि (6/6) सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है. पेलेट गन के छर्रों से आंख की रोशनी गंवाने के बाद अब साहिल का पुलिस अफसर बनने का सपना हमेशा के लिए टूट गया है.
थाने के बाहर क्यों बैठे राहुल गांधी?
घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी जब दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन से घायल हुए छात्रों की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की, तो राहुल गांधी खुद साहिल को साथ लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे. राहुल गांधी ने साहिल के शरीर से निकले छर्रे मीडिया और पुलिस के सामने रखे और मांग की कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज नहीं होती, वे धरने से नहीं उठेंगे.