आईपीएल में छक्कों की बरसात, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार आगाज और फिर जिम्बाब्वे दौरे पर प्लेयर ऑफ द सीरीज. 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के लिए पिछले कुछ महीने किसी सपने से कम नहीं रहे. लेकिन अब उनके सामने वह चुनौती आने वाली है, जो तय करेगी कि वह सिर्फ T20 के सुपरस्टार बनेंगे या भारतीय क्रिकेट के अगले ऑल-फॉर्मेट सितारे.
BCCI ने दलीप ट्रॉफी के लिए ईस्ट जोन टीम में वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तान बनाया है. पहली नजर में यह महज नेतृत्व की जिम्मेदारी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे बोर्ड की बड़ी सोच छिपी है. चयनकर्ताओं ने साफ संकेत दे दिया है कि वे वैभव को सिर्फ विस्फोटक T20 बल्लेबाज नहीं, बल्कि भविष्य के टेस्ट क्रिकेटर के रूप में भी तैयार करना चाहते हैं.
आईपीएल 2026 में वैभव ने दुनिया के बड़े-बड़े गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 700 से ज्यादा रन बनाए थे. इसके बाद उन्हें टीम इंडिया में जगह मिली. इंग्लैंड दौरे पर शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, लेकिन जिम्बाब्वे में उन्होंने तीन T20 मैचों में 151 रन बनाए, दो अर्धशतक जड़े और प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए. इसी प्रदर्शन का इनाम उन्हें ICC T20 रैंकिंग में 230 स्थान की छलांग के रूप में भी मिला.
... लेकिन अब चर्चा उनके T20 स्ट्राइक रेट की नहीं, बल्कि रेड-बॉल तकनीक की होगी.
क्रिकेट जगत में लंबे समय से सवाल उठ रहा था कि क्या वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी टेस्ट क्रिकेट में भी सफल हो पाएगी? क्या वह धैर्य, तकनीक और लंबी पारियां खेलने का माद्दा रखते हैं? खुद सचिन तेंदुलकर भी सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि वैभव को टेस्ट क्रिकेट की दिशा में तैयार किया जाना चाहिए. वैभव भी कई बार कह चुके हैं कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि 'टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है.'
दलीप ट्रॉफी इसी सवाल का पहला बड़ा जवाब देने वाली है. 23 अगस्त से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट में वैभव पहली बार भारत की सबसे प्रतिष्ठित जोनल फर्स्ट क्लास प्रतियोगिता खेलेंगे. संभावना है कि वह अनुभवी अभिमन्यु ईश्वरन के साथ ओपनिंग करते नजर आएं.
हालांकि रेड-बॉल क्रिकेट उनके लिए पूरी तरह नया नहीं है. वह अब तक 8 फर्स्ट क्लास मैच खेल चुके हैं, जिनमें 12 पारियों में 207 रन बनाए हैं. उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है, जबकि एवरेज 17.25 रहा है. यानी आंकड़े बताते हैं कि इस फॉर्मेट में उन्हें अभी काफी सफर तय करना है.
यही वजह है कि दलीप ट्रॉफी का प्रदर्शन सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहेगा. चयनकर्ता यह देखेंगे कि वैभव नई गेंद को कैसे खेलते हैं, लंबी पारी खेलने का धैर्य कितना है और मुश्किल परिस्थितियों में उनकी तकनीक कितनी मजबूत है.
भले ही दलीप ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद भी उन्हें तुरंत भारतीय टेस्ट टीम में जगह न मिले, लेकिन यह टूर्नामेंट उनके करियर का सबसे बड़ा ऑडिशन जरूर होगा. अगर वह यहां सफल रहे तो भारतीय क्रिकेट को ऐसा बल्लेबाज मिल सकता है, जो आने वाले वर्षों में तीनों फॉर्मेट में टीम की रीढ़ बने.
फिलहाल इतना तय है कि BCCI ने अपना इरादा साफ कर दिया है. वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ T20 के पोस्टर बॉय नहीं हैं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के अगले ऑल-फॉर्मेट प्रोजेक्ट बन चुके हैं.