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न्यूजीलैंड में कैसे पार लगेगी टीम इंडिया की नैया? गेंदबाजी, मिडिल ऑर्डर और फिनिशिंग पर सवाल

वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 से बराबर रहने के बाद भारतीय टीम की कई कमजोरियां सामने आई हैं. तेज गेंदबाजी के विकल्पों की कमी, हार्दिक पंड्या जैसे ऑलराउंडर की जरूरत और मध्यक्रम में फिनिशर की भूमिका न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम इंडिया के लिए बड़ी चिंता बन गई है.

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न्यूजीलैंड में बड़ा इम्तिहान! (Photo, PTI)
न्यूजीलैंड में बड़ा इम्तिहान! (Photo, PTI)

वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 से बराबर रही, लेकिन इस नतीजे ने भारतीय टीम के सामने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनसे बचना आसान नहीं होगा. कागज पर मजबूत दिखने वाली टीम इंडिया को घरेलू मैदान पर सातवें नंबर की टी20 टीम ने जिस तरह चुनौती दी, उसने उसकी तैयारियों की पोल खोल दी है. अब अगला पड़ाव न्यूजीलैंड है, जहां तेज गेंदबाजों को मदद देने वाली परिस्थितियों में भारतीय टीम की असली परीक्षा होगी. न्यूजीलैंड सीरीज का आगाज टी20 मैचों की सीरीज से होगा, जिसका पहला मुकाबला 22 अक्टूबर को है. 

सीरीज का आखिरी मुकाबला बेंगलुरु में बारिश की भेंट चढ़ गया. नौ-नौ ओवरों के मैच में भारत ने 7.4 ओवरों में पांच विकेट पर 118 रन बना दिए, लेकिन मुकाबला पूरा नहीं हो सका. नतीजा यह रहा कि सीरीज बराबरी पर खत्म हुई. मगर भारत के लिए असली चिंता स्कोरलाइन नहीं, बल्कि वे कमजोरियां हैं, जो पांच मैचों के दौरान बार-बार सामने आईं. तेज गेंदबाजी में विकल्पों की कमी, निचले क्रम में फिनिशर की भूमिका और मध्यक्रम के बल्लेबाजों का बदलती जिम्मेदारियों से तालमेल- ये तीन ऐसे मोर्चे हैं, जहां टीम को तत्काल जवाब तलाशने होंगे.

भुवनेश्वर की वापसी या भारतीय गेंदबाजी पर सवाल?

सीरीज के निर्णायक मुकाबले में भारत को अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना पड़ा. 36 साल की उम्र में उनकी वापसी निश्चित रूप से एक अच्छी व्यक्तिगत कहानी है, लेकिन टीम इंडिया के नजरिए से यह फैसला एक बड़ा सवाल भी छोड़ गया. क्या भारत के पास तेज गेंदबाजी के पर्याप्त विकल्प नहीं हैं, जो उसे पुराने भरोसेमंद चेहरे की ओर लौटना पड़ा?

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यह सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप की तैयारियों के बीच भारत को ऐसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है, जो सिर्फ रन रोकने का काम न करें, बल्कि विकेट निकालकर मैच का रुख भी बदल सकें. मयंक यादव के रूप में भारत के पास रफ्तार जरूर है, लेकिन उन्हें अभी अनुभव और निरंतरता हासिल करनी है. हैदराबाद में चौथे टी20 में उन्होंने 52 रन लुटाए और उन्हें निर्णायक मैच में मौका नहीं मिला. छोटे बाउंड्री वाले चिन्नास्वामी स्टेडियम में टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा नहीं जताया.

यानी भारत के सामने समस्या सिर्फ गेंदबाजों की उपलब्धता नहीं, बल्कि बड़े मुकाबलों में उन पर भरोसा करने की भी है. न्यूजीलैंड में तेज गेंदबाजों को मिलने वाली मदद के बीच यह कमी और भारी पड़ सकती है.

कप्तान ने भी मानी गलती, गेंदबाजों ने बढ़ाई चिंता

वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों ने कई मौकों पर दम दिखाया, लेकिन गेंदबाजी की नाकामी ने टीम की मेहनत पर पानी फेर दिया. कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी सीरीज का विश्लेषण करते हुए माना कि दूसरे और चौथे टी20 में बेहतर गेंदबाजी की जाती, तो नतीजा अलग हो सकता था.

अय्यर ने कहा कि बल्लेबाजी पूरी सीरीज में शानदार रही, लेकिन गेंदबाजी में योजनाओं को सही तरीके से लागू करने में टीम पीछे रह गई. यही बात भारत के लिए सबसे बड़ा संकेत है. टी20 क्रिकेट में सिर्फ बड़े स्कोर खड़े करना काफी नहीं है. जब विपक्षी बल्लेबाज आक्रामक रुख अपनाते हैं, तब गेंदबाजों को दबाव में सही लाइन-लेंथ और सटीक रणनीति के साथ जवाब देना होता है.

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न्यूजीलैंड में भारत को इसी मोर्चे पर ज्यादा सतर्क रहना होगा. वहां परिस्थितियां बल्लेबाजों के लिए अलग चुनौती पेश कर सकती हैं और गेंदबाजों की भूमिका मुकाबले का रुख तय करने में अहम होगी.

पंड्या जैसा ऑलराउंडर कहां से लाएगा भारत?

भारत की परेशानी का दूसरा बड़ा सिरा है- तेज गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर. हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ी टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में विकल्प देते हैं. लेकिन जब ऐसे खिलाड़ी उपलब्ध नहीं होते, तो टीम कॉम्बिनेशन बनाने की चुनौती बढ़ जाती है. न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में यह जरूरत और अहम हो जाती है, जहां टीम को ऐसे खिलाड़ियों की दरकार होगी, जो बल्ले से तेजी से रन बनाने के साथ गेंद से भी उपयोगी योगदान दे सकें.

शिवम दुबे और नीतीश कुमार रेड्डी को इसी भूमिका में आजमाया जा रहा है. दोनों के पास बड़े शॉट खेलने की क्षमता है, लेकिन गेंदबाजी में अभी उनसे मैच जिताने वाले प्रदर्शन की नियमित उम्मीद नहीं की जा सकती. टीम को उनसे कुछ ओवर निकालने और निचले क्रम में रन बनाने की उम्मीद रहती है. सवाल यह है कि क्या वे न्यूजीलैंड में इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा पाएंगे?

दुबे को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों में मौका मिला, लेकिन वह सिर्फ एक मुकाबले में बल्लेबाजी और गेंदबाजी कर सके. रांची में उन्होंने 10 गेंदों पर सात रन बनाए, जबकि गेंदबाजी में दो ओवर में 20 रन देकर दो विकेट हासिल किए. गेंद से उनका प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन बल्लेबाजी में वह अपनी लय नहीं पकड़ सके.

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रेड्डी ने दो मैच खेले. इंदौर में उन्होंने 14 गेंदों पर 21 रन बनाए और दो ओवर में 19 रन देकर एक विकेट लिया. लेकिन हैदराबाद में उनकी गेंदबाजी की जमकर पिटाई हुई. तीन ओवरों में 39 रन खर्च करने के बाद उन्होंने बल्ले से 20 गेंदों पर 41 रन जरूर बनाए, लेकिन भारत को जीत नहीं दिला सके.

रेड्डी की पारी में तेजी थी, लेकिन फिनिशर के तौर पर टीम को उनसे इससे भी ज्यादा की उम्मीद थी. जब 36 गेंदों पर 92 रन चाहिए थे, तब वह पांच गेंदों पर पांच रन बनाकर खेल रहे थे. आखिरी तीन ओवरों में समीकरण भारत के पक्ष में नहीं आया. 18वें ओवर में शमार स्प्रिंगर के खिलाफ रेड्डी और अक्षर पटेल मिलकर सिर्फ पांच रन बना सके, जिससे मैच पर भारत की पकड़ कमजोर हो गई.

फिनिशर की भूमिका में बल्लेबाज के पास जमने का समय नहीं होता. उसे आते ही बड़े शॉट खेलने पड़ते हैं. यही वह कला है, जिसे दुबे और रेड्डी को न्यूजीलैंड दौरे पर बेहतर करना होगा.

नमन धीर ने दिखाया, फिनिशर हो तो ऐसा!

बेंगलुरु में बारिश से प्रभावित आखिरी टी20 में नमन धीर ने छोटी पारी खेलकर इस भूमिका का नमूना पेश किया. उन्होंने सिर्फ छह गेंदों पर नाबाद 24 रन ठोक दिए. पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर उन्होंने अपना इरादा साफ कर दिया. उनकी पारी में तीन छक्के और एक चौका शामिल रहा.

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नमन की यह पारी बताती है कि टी20 क्रिकेट में निचले क्रम के बल्लेबाजों से किस तरह के इरादे की उम्मीद की जाती है. हर मैच में उनसे 24 रन बनाने की अपेक्षा नहीं होगी, लेकिन कम गेंदों में तेजी से रन बनाना ही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.

भारत को न्यूजीलैंड में ऐसे ही खिलाड़ियों की जरूरत पड़ेगी, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी बिना वक्त गंवाए रन बटोर सकें. अगर टीम के फिनिशर आखिरी ओवरों में तेजी नहीं दिखा पाए, तो अच्छी शुरुआत और बड़े स्कोर का फायदा भी अधूरा रह सकता है.

तिलक वर्मा के सामने नई भूमिका की चुनौती

भारतीय टीम के लिए तीसरी बड़ी चिंता तिलक वर्मा की भूमिका है. शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने वाले तिलक को अब पांचवें या छठे नंबर पर उतरकर पारी को गति देने और जरूरत पड़ने पर मैच खत्म करने की जिम्मेदारी निभानी है. यह बदलाव उनके लिए आसान नहीं रहा है.

वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु में नौ ओवरों के मैच में तिलक पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे, लेकिन सात गेंदों पर सिर्फ छह रन बना सके. छोटे मैच में हर गेंद की अहमियत बढ़ जाती है. ऐसे में बल्लेबाज को आते ही परिस्थितियों के मुताबिक अपनी गति तय करनी होती है.

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तिलक ने खुद स्वीकार किया कि तीसरे नंबर से पांचवें या छठे नंबर पर बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण है. हालांकि, उन्होंने टीम की जरूरत के मुताबिक इस भूमिका को निभाने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने की बात भी कही.

उन्होंने कहा कि वह देश के लिए मैच खत्म करना चाहते हैं और इस जिम्मेदारी को पसंद करते हैं. व्यक्तिगत तौर पर तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करना आसान हो सकता है, लेकिन ईशान किशन तीसरे नंबर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में तिलक को पांचवें और छठे नंबर पर ही अपनी जगह बनानी होगी.

तिलक का यह बयान टीम कॉम्बिनेशन की मजबूरी भी दिखाता है. भारतीय टीम के पास शीर्ष क्रम में विकल्प हैं, लेकिन मध्यक्रम में भूमिकाएं तय करना और उन पर खिलाड़ियों को सफल बनाना अलग चुनौती है. न्यूजीलैंड में तिलक को इसी परीक्षा से गुजरना होगा.

न्यूजीलैंड में गलती की गुंजाइश कम

भारत का अगला मुकाबला न्यूजीलैंड से है और लगातार सीरीज खेलने के कारण खिलाड़ियों के पास नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए ज्यादा समय नहीं होगा. वहां की पिचों पर अतिरिक्त उछाल और गेंद की मूवमेंट भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा ले सकती है. ऐसे में सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी नहीं, बल्कि परिस्थितियों को समझकर खेलने की क्षमता भी जरूरी होगी.

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तिलक वर्मा ने भी माना कि न्यूजीलैंड में खेलना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों को ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना पड़ता है. लगातार यात्राओं, अलग-अलग समय क्षेत्रों और परिस्थितियों को बहाना नहीं बनाया जा सकता.

भारत के लिए यही सबसे अहम बात है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज ने दिखाया कि टीम में रन बनाने की क्षमता है, लेकिन हर बार बल्लेबाजी के दम पर मुकाबले नहीं जीते जा सकते. गेंदबाजी में भरोसेमंद विकल्पों की कमी, ऑलराउंडरों से अपेक्षित योगदान और मध्यक्रम में फिनिशर की भूमिका- इन तीनों पर काम करना होगा.

सीरीज 2-2 से बराबर रही, लेकिन भारत के लिए यह सिर्फ एक नतीजा नहीं, बल्कि चेतावनी है. न्यूजीलैंड में तेज गेंदबाजों के अनुकूल परिस्थितियों के बीच अगर टीम ने अपनी कमजोरियां दूर नहीं कीं, तो वेस्टइंडीज के खिलाफ उठे सवाल वहां और तीखे हो सकते हैं.
 

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