विमेंस एशिया कप 2026 में शनिवार (5 सितंबर) को भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित मुकाबले का नतीजा भले ही एकतरफा रहा, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना की हो रही है. फातिमा ने शेफाली को आउट करने के बाद जिस अंदाज में उन्हें सेंडऑफ दिया, उसके बाद वो सवालों के घेरे में हैं.
दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में भारतीय टीम को 56 रनों का मामूली लक्ष्य मिला था. रनचेज में शफाली वर्मा ने पहली ही गेंद पर छक्का लगाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए. हालांकि वह सिर्फ 12 रन बना सकीं और दूसरे ओवर में उन्हें पवेलियन लौटना पड़ा. फातिमा सना की गेंद उनके बल्ले के किनारे पर लगी और सीधे गेंदबाज के हाथों में चली गई.
शेफाली ने नहीं किया पलटवार
फातिमा सना ने शेफाली वर्मा को कॉट एंड बोल्ड आउट करने के बाद उन्हें 'कोल्ड' सेंडऑफ दिया, जिसने मैदान का माहौल अचानक गर्म कर दिया. फातिमा ने शेफाली की तरफ देखकर उन्हें पवेलियन लौटने का इशारा किया. अच्छी बात यह रही भारतीय बल्लेबाज ने पलटकर कोई जवाब नहीं दिया, नहीं तो मामला बढ़ सकता था.
फातिमा सना ने इसके बाद प्रतीका रावल को 4 रनों के निजी स्कोर पर पवेलियन भेजा. फिर स्मृति मंधाना (9 रन) को एलबीडब्ल्यू कर भारत को तीसरा झटका दिया. पावरप्ले में तीन विकेट लेने के साथ फातिमा ने एक खास उपलब्धि भी हासिल की. वह विमेंस टी20 इंटरनेशनल में पावरप्ले के दौरान दो बार तीन विकेट लेने वाली फुल मेम्बर टीम की सिर्फ चौथी गेंदबाज बन गईं. पाकिस्तानी कप्तान ने शेफाली वर्मा को सेंडऑफ देने के साथ-साथ गेंद से भारत को शुरुआती झटके भी दिए, लेकिन उनकी यह कोशिश पाकिस्तान को जीत दिलाने के लिए काफी नहीं रही.
29 रनों के स्कोर तक तीन विकेट गिरने के बाद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने जिम्मेदारी संभाली. दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी की और पाकिस्तान को कोई और मौका नहीं दिया. दीप्ति ने सातवें ओवर में नाशरा संधू की गेंद पर आगे निकलकर मिडविकेट के ऊपर से चौका लगाया. इसके बाद हरमनप्रीत ने नौवें ओवर में छक्का लगाकर भारत को 7 विकेट से जीत दिला दी.
इससे पहले भारतीय स्पिनर्स ने पाकिस्तान की पारी को सिर्फ 55 रनों पर समेट दिया था. श्री चरणी, प्रेमा रावत, शेफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा ने पाकिस्तानी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया. पाकिस्तान का स्कोर एक समय बिना किसी नुकसान के 27 रन था, लेकिन इसके बाद विकेटों की झड़ी लग गई. शवाल जुल्फिकार (14 रन) और मुनीबा अली (13) के अलावा कोई भी पाकिस्तानी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा नहीं छू सकी.