10 गोल्ड मेडल... सुनने में आंकड़ा ऐसा है कि जश्न मनना चाहिए, लेकिन भारतीय खेमे में खुशी अभी पूरी नहीं है. वजह सिर्फ मेडल टेबल नहीं, बल्कि हांगझोउ का वह 28 गोल्ड का आंकड़ा है, जिसने भारतीय खेलों की उम्मीदों का पैमाना ही बदल दिया है. एशियन गेम्स 2026 के 11वें दिन तक भारत के खाते में 10 स्वर्ण आ चुके हैं, लेकिन सवाल है कि क्या यह रफ्तार 2022 के प्रदर्शन को टक्कर देने के लिए काफी है? गोल्ड की गिनती दहाई में पहुंच गई है, मगर मंजिल अभी बहुत दूर है.
बुधवार को 4 गोल्ड, एक झटके में बदली तस्वीर
नागोया में भारत ने 30 सितंबर को गोल्ड की रफ्तार पकड़ ली. कंपाउंड आर्चरी में महिला टीम, मिक्स्ड टीम और पुरुष टीम ने तीन गोल्ड जीते. इसके अलावा शूटिंग की ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भी भारत को स्वर्ण मिला. इस तरह एक ही दिन में चार गोल्ड आए और भारत की कुल स्वर्ण संख्या 10 हो गई. उसके खाते में अब 60 पदक (10 गोल्ड, 21 सिल्वर और 29 ब्रॉन्ज) हैं.
इससे एक दिन पहले तक भारत के खाते में 6 गोल्ड थे. 29 सितंबर को शूटिंग में नीरू ढांडा और महिलाओं की 4x400 मीटर रिले टीम ने स्वर्ण दिलाया था. नीरू व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.
यानी दो दिनों में भारत के खाते में छह गोल्ड जुड़ गए. लेकिन गोल्ड की इस तेज रफ्तार के बावजूद एक बड़ा सवाल सामने है- क्या भारत की गोल्ड मशीन अब सच में चल पड़ी है या कुछ चुनिंदा खेलों ने अचानक टैली को ऊपर खींच दिया है?
हांगझोउ का 28 गोल्ड पीछा नहीं छोड़ रहा
भारत के लिए सबसे बड़ा पैमाना हांगझोउ है. तीन साल पहले भारत ने पहली बार एशियन गेम्स में 100 पदकों का आंकड़ा पार किया था. कुल 106 पदक और 28 गोल्ड के साथ भारत चौथे स्थान पर रहा था. अब नागोया में 10 गोल्ड हो चुके हैं. यानी 2022 के प्रदर्शन की बराबरी के लिए अभी 18 स्वर्ण और चाहिए.
यही वजह है कि सिर्फ कुल पदकों की संख्या देखकर संतुष्ट हो जाना तस्वीर का आधा हिस्सा देखना होगा. एशियन गेम्स की मेडल टेबल में गोल्ड सबसे अहम पैमाना है.
60 पदक, लेकिन सोने की हिस्सेदारी कितनी?
भारत ने 60 पदक जरूर जीत लिए हैं, लेकिन इनमें 10 गोल्ड के मुकाबले 21 सिल्वर और 29 ब्रॉन्ज हैं. यानी भारतीय खिलाड़ी लगातार पोडियम तक पहुंच रहे हैं, लेकिन कई मौकों पर चांदी और कांस्य को सोने में बदलने का आखिरी कदम बाकी रह जा रहा है.
यही इस अभियान की एक अहम तस्वीर है. भारत के खिलाड़ी पदक जीत रहे हैं, लेकिन गोल्ड की संख्या बढ़ाने के लिए फाइनल में दबदबा कायम करना होगा.
... चीन से फासला अभी बहुत बड़ा
मेडल टेबल भारत की चुनौती को और साफ करती है. 30 सितंबर के अपडेट में चीन 150 गोल्ड और 274 कुल पदकों के साथ शीर्ष पर है. जापान 49 गोल्ड के साथ दूसरे और दक्षिण कोरिया 24 गोल्ड के साथ तीसरे स्थान पर हैं. भारत 10 गोल्ड के साथ आठवें स्थान पर है.
यानी भारत ने एशिया के बड़े खेल राष्ट्रों के बीच अपनी मौजूदगी जरूर मजबूत की है, लेकिन गोल्ड के मामले में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से दूरी अभी काफी है.
अभी कई गोल्ड दांव पर
हालांकि नागोया की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. एशियन गेम्स के बचे हुए दिनों में भारत के पास कई ऐसे मुकाबले हैं, जहां गोल्ड की उम्मीद कायम है. हॉकी, बॉक्सिंग, रेसलिंग, स्क्वैश और क्रिकेट जैसे खेल भारत की स्वर्ण संख्या को और ऊपर ले जा सकते हैं.
30 सितंबर को महिला हॉकी टीम ने दक्षिण कोरिया को सेमीफाइनल में 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बना ली. अब उसके पास गोल्ड जीतने के साथ 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक का टिकट हासिल करने का भी मौका है.
यानी आने वाले दिन तय करेंगे कि 10 गोल्ड सिर्फ एक पड़ाव बनकर रह जाते हैं या भारत अपनी स्वर्ण संख्या को कहीं और ऊपर ले जाता है.
10 गोल्ड की खुशी या 28 का पीछा?
नागोया में भारत के पास जश्न मनाने की वजह जरूर है. 60 पदक अपने आप में बड़ी उपलब्धि हैं. लेकिन हांगझोउ ने भारतीय खेलों के लिए जो नया पैमाना बनाया था, उसकी वजह से 10 गोल्ड पर कहानी खत्म नहीं होती.
28 गोल्ड का आंकड़ा अभी दूर जरूर है, लेकिन नागोया में कहानी बाकी है. आने वाले मुकाबलों में भारत के पास सिर्फ पदक बढ़ाने नहीं, बल्कि सिल्वर और ब्रॉन्ज को गोल्ड में बदलने का मौका है. अब हर फाइनल अहम है, हर गोल्ड की कीमत है. 10 स्वर्ण तक पहुंच चुका भारत अब किस आंकड़े पर जाकर रुकेगा, यही नागोया का सबसे बड़ा सवाल है.