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7.7, 7.4... अब 6.7, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में क्यों आ रहे हैं इतने बड़े भूकंप?

एक के बाद एक बड़े भूकंपों ने फिर दुनिया का ध्यान खींचा. आखिर क्यों पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में धरती बार-बार कांपती है. क्या इन भूकंपों के बीच सच में कोई कनेक्शन है.

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जितना इलाका लाल घेरे में दिख रहा है, वो सब का सब रिंग ऑफ फायर है. (Photo: GEtty)
जितना इलाका लाल घेरे में दिख रहा है, वो सब का सब रिंग ऑफ फायर है. (Photo: GEtty)

पेरू में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया. यूएसजीएस के मुताबिक इसका केंद्र जमीन से करीब 66 KM नीचे था. यह भूकंप ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में इंडोनेशिया और कोलंबिया समेत कई जगहों पर 7 से ज्यादा तीव्रता के बड़े भूकंप आए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन भूकंपों के बीच कोई संबंध है. क्या धरती के अंदर हलचल बढ़ रही है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका सीधा जवाब है- जरूरी नहीं. अलग-अलग जगहों पर कम समय में बड़े भूकंप आने का मतलब यह नहीं है कि वे सभी एकदूसरे से जुड़े हैं. भूकंप की सबसे बड़ी वजह धरती के अंदर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है. दुनिया के कुछ हिस्सों में ये प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकराती या खिसकती रहती हैं. इसलिए वहां भूकंप भी ज्यादा आते हैं.

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पेरू में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं?

पेरू पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के इलाके में आता है. यह दुनिया का सबसे ज्यादा भूकंप आने वाला क्षेत्र है. यूएसजीएस के मुताबिक दुनिया के सबसे बड़े भूकंपों में करीब 81 फीसदी इसी इलाके के आसपास आते हैं. इसकी वजह यहां मौजूद टेक्टोनिक प्लेटें हैं.

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पेरू के पास नाजका प्लेट, साउथ अमेरिकन प्लेट के नीचे जा रही है. जब एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे जाती है तो दोनों के बीच दबाव बनता रहता है. यह दबाव लंबे समय तक जमा हो सकता है. जब चट्टानें इस दबाव को नहीं संभाल पातीं और फॉल्ट अचानक खिसक जाता है, तो भूकंप आता है. यही वजह है कि पेरू और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में बड़े भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है.

Ring of fire earthquakes

क्या एक भूकंप से दूसरा भूकंप आ सकता है?

कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है. वैज्ञानिक इसे डायनैमिक ट्रिगरिंग कहते हैं. आसान भाषा में समझें तो एक बड़े भूकंप से निकलने वाली तेज भूकंपीय तरंगें किसी दूसरे ऐसे फॉल्ट तक पहुंच सकती हैं, जहां पहले से दबाव बना हुआ है. इससे वहां हलचल शुरू हो सकती है.

लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि पेरू में आया भूकंप इंडोनेशिया या कोलंबिया के भूकंप की वजह बना. यूएसजीएस के मुताबिक बहुत दूर के इलाकों में इस तरह की हलचल हो सकती है, लेकिन ऐसे मामलों में आने वाले भूकंप आमतौर पर छोटे होते हैं और ज्यादा देर तक नहीं चलते. इसलिए अलग-अलग देशों में आए बड़े भूकंपों को एक ही सीरीज का हिस्सा मानना सही नहीं होगा.

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क्या अभी सामान्य से ज्यादा भूकंप आ रहे हैं?

धरती पर हर दिन हजारों छोटे भूकंप आते हैं. ज्यादातर इतने हल्के होते हैं कि लोगों को पता भी नहीं चलता. बड़े भूकंप कम आते हैं, इसलिए जब कुछ बड़े झटके कम समय में अलग-अलग जगहों पर आते हैं तो वे ज्यादा नजर में आते हैं.

यूएसजीएस के मुताबिक भूकंप का सही समय और जगह पहले से बताना अभी संभव नहीं है. इसलिए पेरू का 6.7 भूकंप इस बात का सबूत नहीं है कि पूरी दुनिया में अचानक भूकंप बढ़ गए हैं. इसे पेरू के आसपास मौजूद सक्रिय प्लेटों की सामान्य हलचल के तौर पर समझना ज्यादा सही है.

पेरू में आया 6.7 तीव्रता का भूकंप वहां की टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल का नतीजा है. इंडोनेशिया, कोलंबिया और दूसरे देशों में आए बड़े भूकंप भी अपने-अपने इलाकों की प्लेट गतिविधि से जुड़े हैं. इसलिए इन सभी घटनाओं को एक ही कड़ी मानना अभी वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है.

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