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जितनी बारिश नहीं, उससे ज्यादा आंधी-तूफान! आखिर इस बार मौसम को हुआ क्या है?

इस बार देश में बारिश कम हो रही है, लेकिन आंधी-तूफान और तेज हवाएं ज्यादा आ रही हैं. मुख्य कारण अल-नीनो, जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय अस्थिरता है. इससे छिटपुट बारिश के साथ आंधियां बढ़ गई हैं.

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राजस्थान के बीकानेर डूंगरगढ़ में आया रेतीला तूफान. (Photo: PTI/ITG)
राजस्थान के बीकानेर डूंगरगढ़ में आया रेतीला तूफान. (Photo: PTI/ITG)

इस साल देश के कई हिस्सों में लोग हैरान हैं. जहां पहले सामान्य बारिश की उम्मीद होती थी, वहां तेज हवाएं, धूल भरी आंधियां (अंधड़), गरज-चमक के साथ तूफान और कभी-कभी ओले पड़ रहे हैं, लेकिन लगातार और अच्छी बारिश नहीं हो रही. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे अल-नीनो, जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय अस्थिरता जैसे कई कारण काम कर रहे हैं.

2026 में अल-नीनो की स्थिति तेजी से बन रही है. अल-नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे भारत की दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. भारत मौसम विभाग (IMD) ने हाल ही में पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम यानी 90% के आसपास रह सकता है, जो 11 साल में सबसे कमजोर हो सकता है. 

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अल-नीनो के कारण कुल बारिश कम होती है, लेकिन वायुमंडल में नमी और गर्मी का संयोजन तेज आंधियों और स्थानीय तूफानों को जन्म देता है. नतीजा यह होता है कि बारिश एक जगह पर भारी हो जाती है, तो दूसरी जगह सूखा पड़ा रहता है. हवाएं तेज चलती हैं क्योंकि दबाव में अंतर ज्यादा हो जाता है.

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मौसम विज्ञानी आनंद शर्मा ने बताया कि यह सीजन बारिश का नहीं है. थोड़ी बहुत बारिश होती है वो थंडरस्टॉर्म के रूप में होती है. सुबह-शाम थंडस्टॉर्म आता है. इस मौसम में सूखा रहता है. इसकी वजह से डस्टस्टॉर्म आता है. अगर बाद ऊंचा बना गया तो ओले गिरते हैं. अभी मॉनसून देश में पहुंचा ही नहीं. इस समय जो मौसम बना है वो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से है. पहाड़ों से दिल्ली तक जो थोड़ी ठंडक है, उसके पीछे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस हैं. ये नमी लाया. तापमान कम हुआ. अगर कोई नया मौसमी सिस्टम नहीं बना तो कुछ दिन में तापमान फिर बढ़ेगा. मॉनसून में समय है अभी.  

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पूर्व-मॉनसून में बढ़ी अस्थिरता

मई-जून के आसपास पूर्व-मॉनसून की अवधि में उत्तर भारत, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में धूल भरी आंधियां और गरज वाले तूफान आम हो गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि तेज गर्मी के कारण जमीन बहुत गर्म हो जाती है. ऊपर ठंडी हवाएं आती हैं तो अचानक ऊपर की तरफ तेज गति से हवा उठती है. इससे गरज-चमक, तेज हवाएं (30-100 किलोमीटर प्रति घंटा तक) और धूल उड़ने लगती है. 

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पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) भी सक्रिय हैं. ये भूमध्य सागर से आते हैं और उत्तर भारत में नमी लाते हैं. इनके कारण हवा में अस्थिरता बढ़ जाती है, जिससे आंधी-तूफान आते हैं लेकिन बारिश असमान होती है. कई बार एक ही दिन में तेज हवा के साथ थोड़ी बारिश हो जाती है और फिर सूखा पड़ जाता है.

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जलवायु परिवर्तन की भूमिका

जलवायु परिवर्तन इस पूरे पैटर्न को और बदतर बना रहा है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण वायुमंडल में ज्यादा नमी रहती है, लेकिन बारिश के दिन कम हो रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्यम बारिश वाले दिन घट रहे हैं जबकि भारी बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं. 

इसका मतलब है कि जब बारिश होती है तो वह बहुत तेज होती है, जिससे बाढ़ आ जाती है, लेकिन कुल मिलाकर मौसम सूखा रहता है. गर्म हवाएं ज्यादा ऊर्जा लेती हैं, जिससे तूफान और आंधियां ज्यादा शक्तिशाली बनती हैं. उत्तर भारत में धूल भरी आंधियां भी बढ़ रही हैं क्योंकि गर्मी और सूखी मिट्टी के कारण हल्की हवाएं भी धूल आसानी से उड़ा लेती हैं.

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देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति अलग है. पूर्वोत्तर और दक्षिण के कुछ हिस्सों में कभी-कभी ज्यादा बारिश हो रही है, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की कमी के साथ आंधी-तूफान ज्यादा हैं. राजस्थान के थार रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं उत्तर भारत को प्रभावित करती हैं. 

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कुछ जगहों पर दो या ज्यादा मौसम प्रणालियों (जैसे पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय चक्रवाती सर्कुलेशन) के टकराने से बहुत तेज हवाएं और ओले भी गिर रहे हैं. यह सामान्य पूर्व-मॉनसून पैटर्न से ज्यादा एक्टिव और हिंसक हो गया है.

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क्या प्रभाव पड़ रहा है?

इन बदलते मौसम पैटर्नों का असर कृषि, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में दिक्कत हो रही है क्योंकि बारिश अनिश्चित है. तेज हवाएं फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं. गर्मी और धूल से सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं. शहरों में ट्रैफिक बाधित हो रहा है. बिजली की लाइनें गिर रही हैं.

IMD के अनुसार, अगर अल-नीनो मजबूत हुआ तो मॉनसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में बारिश और भी कम हो सकती है. हालांकि, भारतीय महासागर द्विपद (IOD) अगर सकारात्मक रहा तो कुछ राहत मिल सकती है.

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यह सिर्फ एक साल की समस्या नहीं है. जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे अनियमित पैटर्न भविष्य में और आम हो सकते हैं. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि हमें तैयार रहना होगा. 

समाधान के रूप में जल संरक्षण, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, सूखा-प्रतिरोधी फसलें, बेहतर मौसम पूर्वानुमान और पेड़ लगाने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार और किसानों को मिलकर नई रणनीति बनानी होगी ताकि कम बारिश में भी उत्पादन बना रहे.

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इस बार बारिश कम होने और आंधी-तूफान ज्यादा आने का मुख्य कारण अल-नीनो, ग्लोबल वार्मिंग और वायुमंडलीय अस्थिरता का मिलन है. मौसम अब पहले जैसा अनुमानित नहीं रहा. तेज हवाएं, धूल और छिटपुट भारी बारिश नया सामान्य बनता जा रहा है. 

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