भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम की घोषणा की है. इसरो के चीफ वी. नारायणन ने हाल ही में बताया कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में स्थित कुलासेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट से पहला रॉकेट लॉन्च मार्च या अप्रैल 2027 में होने की उम्मीद है.
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के बाद भारत का दूसरा एक्टिव स्पेसपोर्ट बनेगा. लंबे समय से श्रीहरिकोटा पर निर्भर रहने के बाद अब देश की लॉन्च क्षमता बढ़ने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2024 में इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी. निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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कुलासेकरपट्टिनम की भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है. यह भारत के दक्षिणी तट पर स्थित है, जिससे रॉकेट सीधे हिंद महासागर के ऊपर उड़ान भर सकते हैं. इससे धरती पर आबादी वाले इलाकों से गुजरने का खतरा कम हो जाता है. सुरक्षा बढ़ जाती है. यहां मुख्य रूप से स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल यानी SSLV के लॉन्च की योजना है.
SSLV छोटे उपग्रहों को कम लागत में अंतरिक्ष में भेजने के लिए बनाया गया है. यह 500 किलोग्राम तक के पेलोड को ले जा सकता है. दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर संचार, पृथ्वी अवलोकन और इंटरनेट सेवाओं के लिए. इस नए स्पेसपोर्ट से भारत इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा.

श्रीहरिकोटा पर दबाव कम करने की रणनीति
अभी तक भारत के लगभग सभी कक्षीय लॉन्च श्रीहरिकोटा से ही होते रहे हैं. एक ही जगह पर ज्यादा लॉन्च होने से समय और संसाधनों पर दबाव बढ़ता है. नया स्पेसपोर्ट इस बोझ को बांटेगा. यहां निजी कंपनियों को भी मौका मिलेगा. भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया है.
कई स्टार्टअप छोटे उपग्रह बनाने और लॉन्च सेवाएं देने में सक्रिय हैं. कुलासेकरपट्टिनम इन कंपनियों के लिए भी सुविधाजनक बनेगा. इससे न सिर्फ सरकारी बल्कि व्यावसायिक लॉन्च भी बढ़ेंगे. इसरो का लक्ष्य 2029 तक चार ऑपरेशनल लॉन्च पैड रखने का है, जिसमें यह सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगी. तमिलनाडु में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी विशेषज्ञता का विकास होगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि मजबूत होगी. छोटे उपग्रहों के लॉन्च में भारत पहले से प्रतिस्पर्धी है. नया स्पेसपोर्ट लॉन्च फ्रीक्वेंसी बढ़ाएगा और लागत घटाएगा.
इससे देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिलेगी. साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी क्षमता बढ़ेगी. निर्माण में इंटीग्रेशन बिल्डिंग, लॉन्च पैड, ट्रैकिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं.
कुल मिलाकर कुलासेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को और आत्मनिर्भर और विस्तारित बनाएगा. 2027 का पहला लॉन्च इस दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा. यह कदम दिखाता है कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है.