चीन में रिटायर हो चुके लोगों के बीच छुट्टियां मनाने का एक अनोखा तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें लोग होटल में कमरा बुक करने के बजाय एक-दूसरे के घर में रहकर छुट्टियां बिताते हैं. यानी कुछ दिनों के लिए अपना घर किसी दूसरे व्यक्ति को दे देते हैं और खुद उसके घर रहने चले जाते हैं. इस तरीके को 'होम स्वैपिंग' (Home Swapping) कहा जाता है. इससे लोगों को होटल का भारी खर्च नहीं उठाना पड़ता. साथ ही उन्हें किसी नए शहर में स्थानीय लोगों की तरह रहने और नए दोस्त बनाने का मौका भी मिलता है. चीन में खासतौर पर बुजुर्ग इस तरीके को पसंद कर रहे हैं.
क्या होता है होम स्वैपिंग?
होम स्वैपिंग का मतलब है दो परिवारों या लोगों का कुछ समय के लिए एक-दूसरे के घर में रहना. उदाहरण के लिए, अगर दिल्ली में रहने वाला कोई बुजुर्ग कुछ दिन शिमला में छुट्टियां बिताना चाहता है और शिमला में रहने वाला कोई व्यक्ति दिल्ली घूमना चाहता है, तो दोनों आपस में बात करके अपने घर बदल सकते हैं. इस दौरान दिल्ली वाला व्यक्ति शिमला के घर में रहेगा और शिमला वाला व्यक्ति दिल्ली के घर में. दोनों को होटल का किराया नहीं देना पड़ेगा. छुट्टियां खत्म होने के बाद दोनों अपने-अपने घर लौट आएंगे. यह तरीका उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है, जो कम खर्च में घूमना चाहते हैं और लंबी छुट्टियां बिताना पसंद करते हैं.
होटल का खर्च बचाने के लिए बुजुर्गों ने निकाला अनोखा तरीका
चीन में रिटायरमेंट के बाद घूमने-फिरने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. लेकिन महंगे होटल और रहने का खर्च कई बार उनकी यात्रा का बजट बिगाड़ देता है. ऐसे में लोगों ने इसका एक नया तरीका निकाला है. वे अपना घर किसी दूसरे शहर में रहने वाले व्यक्ति को कुछ दिनों के लिए दे देते हैं और बदले में उसके घर में रहने चले जाते हैं. इस चलन में रिटायर हो चुके बुजुर्गों के साथ-साथ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही नौकरी छोड़ दी है. इनके पास खाली समय और रहने के लिए अपनी प्रॉपर्टी होती है. ऐसे लोग घर बदलकर छुट्टियां मनाने को एक अच्छा विकल्प मान रहे हैं. चीन में इस तरह के होम स्वैपिंग ग्रुप और एजेंसियां भी बन रही हैं. सोशल मीडिया के जरिए लोग एक-दूसरे से संपर्क करते हैं और अपनी पसंद के शहर में रहने के लिए घर तलाशते हैं.
1950 के दशक में शुरू हुआ था यह चलन
घर बदलकर छुट्टियां मनाने का विचार नया नहीं है. इसकी शुरुआत 1950 के दशक में यूरोप के कुछ शिक्षकों के बीच हुई थी. बाद में साल 2006 में आई हॉलीवुड फिल्म 'द हॉलिडे' के बाद यह तरीका दुनिया के कई हिस्सों में लोकप्रिय हुआ. चीन में साल 2023 के आसपास युवाओं के बीच यह चलन बढ़ने लगा था. उस समय होटल के बढ़ते किराए के कारण लोग घूमने के लिए दूसरे विकल्प तलाश रहे थे. अब रिटायर हो चुके लोग भी इसे अपना रहे हैं. अक्टूबर में चीन की नेशनल डे छुट्टियों के दौरान प्रति व्यक्ति यात्रा पर औसत खर्च करीब 894 युआन यानी लगभग 135 डॉलर बताया गया. यह खर्च अब तक के सबसे कम स्तर पर था. ऐसे माहौल में कम खर्च में घूमने का यह तरीका लोगों को पसंद आ रहा है.
चीन के झेजियांग प्रांत के वेंझोउ में रहने वाली वू शियाओपिंग नाम की एक शिक्षिका रिटायरमेंट के करीब हैं. उन्होंने नानजिंग में रहने वाले एक बुजुर्ग के साथ अपना घर बदला. उस बुजुर्ग की बेटी जापान में पढ़ाई करती है. इस तरह दोनों को कुछ समय के लिए दूसरे शहर में रहने का मौका मिला. वू अब ऐसे कई होम स्वैपिंग ग्रुप से जुड़ी हुई हैं. उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में लोगों की पसंद भी अलग-अलग होती है. जैसे कई महिलाएं दूसरी महिलाओं के साथ घर बदलना पसंद करती हैं. वहीं, कुछ लोग अपने पेशे और सामाजिक पृष्ठभूमि के हिसाब से मेजबान चुनते हैं.
ग्वांगडोंग के रहने वाले 40 साल के शियाओ पिंग ने भी कम उम्र में नौकरी छोड़ दी थी. उन्होंने अपना खाली डुप्लेक्स घर गुइझोउ में मौजूद एक विला के बदले दिया. उस विला में बड़ा आंगन, तालाब और बैठने के लिए मंडप भी था. शियाओ पिंग वहां करीब 20 दिन तक रहे. इस दौरान उन्होंने खुद खाना बनाया और घर के मालिक के दोस्तों के साथ समय बिताया. उनके लिए यह सिर्फ रहने का खर्च बचाने का तरीका नहीं था, बल्कि नए लोगों से मिलने और नई जगह को करीब से जानने का मौका भी था.
इसी तरह शियान की रहने वाली रिटायर इंजीनियर ली फेंग साल में दो बार अपना खाली फ्लैट दूसरे लोगों को रहने के लिए देती हैं. एक बार वह ग्वांगडोंग में मौजूद हॉट स्प्रिंग विला में भी रहने गई थीं. कुछ मेहमान तो जाते समय घर के मालिकों को धन्यवाद के तौर पर नए इलेक्ट्रॉनिक सामान तक दे जाते हैं.
घर बदलने से पहले रखी जाती हैं ये शर्तें
हालांकि, किसी अनजान व्यक्ति को अपना घर देना आसान नहीं है. इसमें भरोसे के साथ-साथ सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है. इसलिए घर बदलने वाले लोग पहले ही कुछ नियम तय कर लेते हैं. आमतौर पर दोनों पक्ष एक-दूसरे के पहचान पत्र की तस्वीर और जरूरी डॉक्यूमेंट शेयर करते हैं. घर में मौजूद कीमती सामान की जानकारी भी एक-दूसरे को दी जाती है. इसके अलावा बिजली, पानी और दूसरे बिलों का भुगतान कौन करेगा, यह भी पहले तय कर लिया जाता है.
घर में रहने वाले मेहमानों से उम्मीद की जाती है कि वे बिस्तर और जरूरी सामान साफ-सुथरा रखें. छुट्टियां खत्म होने के बाद घर को साफ करके छोड़ें. कुछ लोग घर छोड़ने से पहले वीडियो बनाकर मालिक को भेजते हैं, ताकि घर की स्थिति का पता चल सके.
सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल
इस चलन के बढ़ने के साथ कुछ परेशानियां भी सामने आई हैं. सबसे बड़ी चिंता किसी अनजान व्यक्ति को अपना घर सौंपने की है. घर में रखे कीमती सामान की चोरी, प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचने और निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा बना रहता है. कुछ लोगों के अनुभव भी अच्छे नहीं रहे. एक इंटरनेट यूजर ने बताया कि हांगकांग में घर बदलकर रहने के दौरान उसे परेशानी हुई. घर की दीवारें काफी पतली थीं और वहां मच्छर भी थे, जबकि घर के मालिक ने पहले जो वीडियो दिखाया था, उसमें ऐसी कोई परेशानी नजर नहीं आई थी.
इसी वजह से कानूनी जानकारों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. उनका कहना है कि घर बदलने से पहले लिखित समझौता जरूर करना चाहिए. घर में रखे कीमती सामान की सूची बनानी चाहिए, सामने वाले की पहचान की जांच करनी चाहिए और अपने परिवार के लोगों को भी इसकी जानकारी देनी चाहिए. चीन में पर्यटन और संस्कृति से जुड़े अधिकारियों ने इस व्यवस्था के लिए एक जैसी रेटिंग और नियम बनाने के सुझाव भी दिए हैं, ताकि लोगों को सुरक्षित तरीके से घर बदलने में मदद मिल सके.
चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, साल 2030 तक देश में बुजुर्गों की आबादी 38 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. इनमें 60 फीसदी से ज्यादा ऐसे बुजुर्ग हो सकते हैं, जो स्वस्थ हैं और रिटायरमेंट के बाद भी सक्रिय जीवन जीना चाहते हैं. यही वजह है कि चीन में होम स्वैपिंग को सिर्फ पैसे बचाने का तरीका नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद नए लोगों से जुड़ने और जिंदगी में कुछ नया करने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है.