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ऑक्सीजन कम, फूड चेन खराब! दुबई में तेल टैंकर पर ईरानी हमले के बाद क्या हैं खतरे

दुबई में कुवैती ऑयल टैंकर पर हमले के बाद तेल रिसाव का खतरा बढ़ गया है. आग बुझाने और सफाई की कोशिशें जारी हैं. समंदर में तेल फैलने से समुद्री जीवों को भारी नुकसान होता है. पक्षी, मछलियां, डॉल्फिन और व्हेल मर जाती हैं. तेल पानी में ऑक्सीजन कम कर देता है. पूरी फूड चेन बिगाड़ देता है.

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दुबई पोर्ट के पास कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी हमले के बाद अब समंदर में तेल फैलने का खतरा मंडरा रहा है. (Photo: Representative/Getty)
दुबई पोर्ट के पास कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी हमले के बाद अब समंदर में तेल फैलने का खतरा मंडरा रहा है. (Photo: Representative/Getty)

समंदर में तेल फैलना एक बहुत बड़ी आपदा है. जब कोई ऑयल टैंकर, पाइपलाइन या रिग से कच्चा तेल समुद्र में फैलता है तो यह तेल पानी की सतह पर एक पतली परत बना लेता है. यह परत हवा और पानी के बीच आ जाती है. दुबई के पास हाल ही में हुए कुवैती ऑयल टैंकर पर हमले में भी यही खतरा पैदा हो गया है.

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने चेतावनी दी है कि हमले से टैंकर को नुकसान पहुंचा और आग लग गई, जिससे आसपास के पानी में तेल रिसाव हो सकता है. 30 मार्च 2026 को दुबई बंदरगाह के पास एक बड़े कुवैती क्रूड ऑयल टैंकर अल सल्मी पर हमला हुआ. कुवैत ने इसे ईरानी हमला बताया. टैंकर पूरी तरह भरा हुआ था.

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हमले से टैंकर को नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई. 24 सदस्य सुरक्षित हैं, कोई हताहत नहीं हुआ. दुबई की आपातकालीन टीमें आग बुझाने में लगी हैं. यह हमला ईरान, अमेरिका और इजरायल जंग के बीच हुआ है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन का खतरा बढ़ गया है.

Kuwaiti Oil Tanker Attack

तेल रिसाव से समुद्री जीवन को बहुत नुकसान पहुंचता है. तेल पानी की सतह पर फैलकर पक्षियों के पंखों को चिपका देता है, जिससे वे उड़ नहीं पाते और ठंड से बचाव नहीं कर पाते. समुद्री स्तनधारी जानवरों जैसे डॉल्फिन, व्हेल और सी ओटर के फर पर तेल चढ़ने से उनका शरीर गर्म नहीं रह पाता और वे हाइपोथर्मिया से मर सकते हैं.

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मछलियां और अन्य जल जीव तेल के जहरीले रसायनों से प्रभावित होते हैं. यह उनके दिल, फेफड़ों और इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है. छोटी मछलियां और अंडे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. पूरा फूड चेन डिस्टर्ब होता है. बड़े जानवर और इंसान भी प्रभावित हो सकते हैं.

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पर्यावरण और इंसानों पर लंबे समय का असर

तेल रिसाव का असर तुरंत नहीं रुकता. तेल समुद्र की तलहटी में जमा हो सकता है. कई सालों तक रह सकता है. इससे समुद्री घास, कोरल रीफ और मैंग्रूव जंगलों को भारी नुकसान होता है. सूरज की रोशनी पानी में नहीं पहुंच पाती, जिससे प्लैंकटन और छोटे पौधे मर जाते हैं. इससे पूरी फूड चेन बिगड़ जाती है.

Kuwaiti Oil Tanker Attack

समुद्र तटों पर तेल चढ़ने से पर्यटन प्रभावित होता है, मछली पकड़ने का काम बंद हो जाता है. समुद्री भोजन खाने लायक नहीं रहता. सफाई में बहुत समय और पैसा लगता है. पिछले बड़े रिसाव जैसे डीपवाटर होराइजन में हजारों समुद्री जानवर मरे थे और असर सालों तक रहा. प्रदूषण फैलने लगता है.

अभी तक आग पर काबू पाने की कोशिशें जारी हैं. तेल रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कुवैत ने संभावना जताई है. दुबई मीडिया ऑफिस ने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है. अगर तेल फैलता है तो फारस की खाड़ी का पर्यावरण प्रभावित होगा, जहां पहले से ही तेल परिवहन बहुत ज्यादा होता है.

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तेल की कीमतें पहले ही बढ़ रही हैं. सफाई अभियान शुरू होने वाला है, जिसमें विशेष जहाज और केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं. लेकिन अगर रिसाव बड़ा हुआ तो सफाई में हफ्तों या महीनों लग सकते हैं.

Kuwaiti Oil Tanker Attack

ऐसे रिसाव से कैसे बचें?

टैंकरों में बेहतर सुरक्षा, दोहरी दीवारें, बेहतर नेविगेशन और तुरंत इमरजेंसी प्लान जरूरी हैं. अंतरराष्ट्रीय कानून और संगठन जैसे इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ऐसे रिसाव की रोकथाम पर काम करते हैं. दुबई जैसी घटना से साफ है कि युद्ध के समय तेल टैंकर भी हथियार बन सकते हैं, जिससे पर्यावरण-अर्थव्यवस्था दोनों को खतरा है.

समंदर में तेल फैलना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि लंबे समय तक रहने वाली आपदा है. यह समुद्री जीवन, पर्यावरण और इंसानी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है. दुबई में कुवैती टैंकर पर हमले से तेल रिसाव का खतरा पैदा हो गया है. अभी स्थिति नियंत्रण में लाने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अगर रिसाव हुआ तो खाड़ी क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति और बिगड़ सकती है.

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